लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। नेता विपक्ष ने उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है जिसमें सीबीआई और ईडी को उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोपों की जांच संबंधी शिकायत का वेरिफिकेशन करने को कहा गया था।

राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में इलाहाबाद हाईकोर्ट के मई और जुलाई में पारित आदेशों को चुनौती दी है। यह मामला कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता विघ्नेश शिशिर द्वारा दायर शिकायत से जुड़ा है जिसमें राहुल गांधी पर आय से अधिक संपत्ति रखने का आरोप लगाया गया था।

हाईकोर्ट ने क्या कहा था?

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने मई के आदेश में कहा था कि अगर याचिकाकर्ता की शिकायत संबंधित एजेंसियों को प्राप्त हुई है तो कानून के अनुसार उसमें लगाए गए आरोपों का वेरिफिकेशन किया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि CBI और ED कानून के तहत उपलब्ध अधिकारों के अनुसार जरूरी कदम उठा सकती हैं।

इसके बाद हाईकोर्ट ने दोनों एजेंसियों से आगे की जांच की जानकारी देने के लिए कहा था।

CBI की रिपोर्ट पर जताई थी नाराजगी

20 जुलाई को हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने CBI की ओर से दाखिल हलफनामे पर असंतोष जताया था। अदालत ने कहा था कि हलफनामा उसके पहले दिए गए निर्देशों के अनुरूप नहीं है।

वहीं अदालत ने कहा कि ED ने आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है और अगर जांच के दौरान कोई प्रासंगिक जानकारी सामने आती है तो एजेंसी कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई कर सकती है। मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त के लिए निर्धारित की गई थी।

दिल्ली हाईकोर्ट में ट्रांसफर की भी मांग

राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में एक अलग ट्रांसफर याचिका भी दाखिल की है। इसमें उन्होंने अनुरोध किया है कि इस मामले को इलाहाबाद हाईकोर्ट से ट्रांसफर कर दिल्ली हाईकोर्ट भेजा जाए।

17 अगस्त को होगी सुनवाई

7 अगस्त को दायर दोनों याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में 17 अगस्त को सुनवाई होगी। मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहन की पीठ करेगी।

2014 से 2024 तक कितनी बढ़ी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी की संपत्ति

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफार्म्स (एडीआर) ने लोकसभा सांसदों की संपत्तियों के ब्योरे को एक रिपोर्ट जारी किया है। इनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत विपक्ष नेता राहुल गांधी की संपत्ति का भी ब्योरा भी शामिल हैं। एडीआर ने अपने रिपोर्ट में साल 2014 से लेकर 2024 तक का डेटा लिया है। रिपोर्ट में बताया गया कि एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स और नेशल इल्केशन वॉच ने लोकसभा चुनाव 2014 से 2024 में दोबारा सांसद चुने जाने वाले 102 सांसदों के शपथपत्रों का विश्लेषण किया है।