कृषि कानून वापस लिए जाने पर बोले राहुल गांधी, चर्चा से डरती है सरकार, पूछा- किसके दबाव में बनाए गए थे कानून

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को संसद में तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों को खत्म करने संबंधी विधेयक को चर्चा के बिना पारित किए जाने के बाद सरकार पर चर्चा से ‘‘डरने’’ का आरोप लगाया और दावा किया कि इस सरकार पर कुछ ऐसे लोगों के समूह का कब्जा है जो गरीब विरोधी है और किसानों-मजदूरों के हितों को नुकसान पहुंचा रहा है।

Rahul Gandhi Farm Bill
संसद के बाहर मीडिया से बात करते राहुल गांधी। Photo Source- ANI

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को संसद में तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों को खत्म करने संबंधी विधेयक को चर्चा के बिना पारित किए जाने के बाद सरकार पर चर्चा से ‘‘डरने’’ का आरोप लगाया और दावा किया कि इस सरकार पर कुछ ऐसे लोगों के समूह का कब्जा है जो गरीब विरोधी है और किसानों-मजदूरों के हितों को नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इन कानूनों का निरस्त किया जाना किसानों, मजदूरों की देश की जीत है तथा अब सरकार को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) समेत उनकी अन्य मांगें भी स्वीकार करनी चाहिए।

राहुल गांधी ने संसद के बाहर संवाददाताओं से कहा, ‘‘हमने कहा था कि तीनों काले कानून को वापस लेना पड़ेगा। हमें मालूम था कि तीन-चार बड़े पूंजीपतियों की ताकत देश के किसानों के सामने टिक नहीं सकती। यही हुआ कि तीनों कानूनों को निरस्त करना पड़ा। यह किसानों और मजदूरों की सफलता है, एक प्रकार से देश की सफलता है।’’उन्होंने आरोप लगाया कि ये कानून जिस प्रकार से बिना चर्चा के रद्द किए गए, वह दिखाता है कि सरकार चर्चा से डरती है और सरकार ने गलत काम किया है।

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘700 किसान भाइयों ने जान दी, उनके बार में चर्चा होनी थी। चर्चा इस बारे में भी होनी थी कि इन कानूनों के पीछे कौन सी ताकत थी, ये क्यों बनाए गए? एमएसपी और किसानों को दूसरी समस्याओं, लखीमपुर खीरी और गृह राज्य मंत्री (अजय मिश्रा टेनी) को लेकर चर्चा होनी थी। सरकार ने यह नहीं होने दिया।’’उनके मुताबिक, ‘‘सरकार थोड़ा भ्रम में है। वह सोचती है कि किसान और मजदूर गरीब हैं, उन्हें दबाया जा सकता है। लेकिन इस घटनाक्रम ने दिखाया है कि किसानों और मजदूरों को दबाया नहीं जा सकता।’’

एक सवाल के जवाब में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा, ‘‘ये तीनों कानूनों किसानों और मजदूरों पर आक्रमण था। किसानों की मांगों की लंबी सूची है जिसका हम समर्थन करते हैं।’’उन्होंने सरकार की टिप्पणी से जुड़े अन्य प्रश्न के उत्तर में कहा, ‘‘अगर चर्चा नहीं करनी है तो फिर संसद की क्या जरूरत है? बंद कर देते हैं, प्रधानमंत्री को जो कहना है वो कह दें।’’

राहुल गांधी ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री ने माफी मांगी है। उन्होंने यह स्वीकार किया कि उनकी गलती से 700 लोगों की जान गई और यह पूरा आंदोलन हुआ। अगर गलती मान ली तो फिर मुआवजा देना पड़ेगा।’’ उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘सरकार ने इस विधेयक में कहा कि किसानों का एक समूह प्रदर्शन कर रहा है। यह किसानों का अपमान है। पहले आपने इनको खालिस्तानी कहा और अब आप इन्हें किसानों का समूह कह रहे हैं। ये किसानों का समूह नहीं है, बल्कि देश के सारे किसान हैं। ये समझते हैं कि कौन सी शक्तियां इन आक्रमण कर रही हैं।’’

कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार मारे गए किसानों को पूरा मुआवजा दे और एमएसपी की कानूनी गारंटी समेत दूसरी मांगें माने। राहुल गांधी ने एक सवाल के जवाब में दावा किया, ‘‘ये वही ताकते हैं जिन्होंने नोटबंदी करवाई, त्रूटिपूर्ण जीएसटी लागू करवाई और कोरोना काल में गरीबों को मदद नहीं देने दी। सवाल यह नहीं है कि सरकार फिर ये ऐसे कानून लाने का प्रयास करेगी, बल्कि सवाल यह है कि इस सरकार पर एक ऐसे समूह का कब्जा है जो गरीब लोगों के खिलाफ है और उनके हितों को नुकसान पहुंचा रहा है’’ उन्होने यह सवाल किया, ‘‘अगर सरकार किसानों के पक्ष में थी तो एक साल से क्या कर रही थी, 700 किसानों की जान कैसे चली गई? प्रधानमंत्री ने माफी क्यों मांगी?’’

पढें राष्ट्रीय समाचार (National News). हिंदी समाचार (Hindi News) के लिए डाउनलोड करें Hindi News App. ताजा खबरों (Latest News) के लिए फेसबुक ट्विटर टेलीग्राम पर जुड़ें।