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सिलेंडर संग स्मृति ईरानी का राहुल गांधी ने फोटो शेयर कर कहा- मैं सपोर्ट में; ट्रोल्स बोले- FM प्याज नहीं खातीं, वैसे ही ये खाना नहीं पकातीं

कैप्शन में राहुल गांधी ने लिखा है कि वह स्मृति ईरानी और बीजेपी सदस्यों के सपोर्ट में हैं, क्योंकि वह सिलेंडर के दामों में 150 रुपये की बढ़ोत्तरी के खिलाप आवाज उठा रहे हैं।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शेयर की तस्वीर। फोटो: Rahul Gandhi/Twitter

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की पुरानी तस्वीर शेयर सिलेंडर के बढ़ते दामों पर बीजेपी सरकार पर हमला बोला है। कांग्रेस नेता ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल के जरिए जो तस्वीर शेऱ की है उसमें समृति ईरानी अन्य बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ पूर्व की यूपीए सरकार के खिलाफ एलपीजी सिलेंडर लेकर बैठे नजर आ रहे हैं। इसके कैप्शन में राहुल गांधी ने लिखा है कि वह स्मृति ईरानी और बीजेपी सदस्यों के सपोर्ट में हैं, क्योंकि वह सिलेंडर के दामों में 150 रुपये की बढ़ोत्तरी के खिलाप आवाज उठा रहे हैं।

दरअसल, रसोई गैस की कीमतों में बुधवार को 144.5 रुपये प्रति सिलेंडर की भारी-भरकम वृद्धि की गयी। सरकारी पेट्रोलियम विपणन कंपनियों ने एक अधिसूचना में इसकी जानकारी दी। इसके बाद से ही कांग्रेस मोदी सरकार के खिलाफ लगातार हमलावर है। हालांकि सरकार ने रसोई गैस पर मिलने वाली सब्सिडी बढ़ाकर लगभग दोगुनी की है। बढ़ोत्तरी के बाद एलपीजी सिलेंडर की कीमत 714 से बढ़ाकर 858.50 रुपये हो गई है।

राहुल गांधी के इस ट्वीट पर सोशल मीडिया यूजर्स ने भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं। एक यूजर ने कहा कि ‘निर्मला सीतारमण (वित्त मंत्री) प्याज नहीं खातीं, इसलिए उन्हें प्याज की कीमतों से कोई फर्क नहीं पड़ता। दूसरी तरफ स्मृति ईरानी हैं जो खाना नहीं पकाती हैं, इसलिए उन्हें एलपीजी के दाम बढ़ने से कोई फर्क नहीं पड़ता।’

एक यूजर कहते हैं ‘स्मृति ईरानी साल 2011 में गैस सिलेंडर के दाम 50 रु बढ़ाए जाने का विरोध कर रही थीं। अब 2020 में नरेंद्र मोदी सरकार ने गैस सिलेंडर के दाम 150 रु बढ़ाकर कांग्रेस को करारा जवाब दिया है। वाह ईरानी स्मृति जी, वाह।’

एक अन्य यूजर ने कहा ‘भक्तों को फिर भी फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि उनके पापा ने नाले वाली गैस का आविष्कार जो किया है।’

एक यूजर कहते हैं ‘राहुल बाबा भूल गए उनकी यूपीए सरकार ने एक दिन में ही 220 रुपये बढ़ाकर सिलेंडर का दाम 1241 रुपये कर दिया था। यदि 150 रुपये astronomical हैं तो फिर 220 रुपये को क्या कहा जाएगा?’

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