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राहुल गांधी ने हाईकोर्ट जज के ट्रांसफर पर जज लोया को किया याद, लोग बोले- ‘अमित शाह का कीजिए शुक्रिया अदा’

राहुल ने कहा कि जज लोया को याद कर रहा हूं जिनका तबादला नहीं किया गया था। राहुल के इस ट्वीट पर यूजर्स कि प्रतिक्रियाएं आना शुरू हो गई हैं। एक यूजर ने उन्हें इस बात के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का शुक्रिया अदा करने को कहा है।

Author Edited By सिद्धार्थ राय नई दिल्ली | Updated: February 27, 2020 11:29 AM
न्यायाधीश लोया और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली हिंसा मामले में सुनवाई करने वाले दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस मुरलीधर के तबादले को लेकर तंज़ कसा है। राहुल ने अपने ट्विटर अकाउंट से एक पोस्ट करते हुए न्यायमूर्ति मुरलीधर के ट्रांसफर पर जज लोया को किया याद किया है। राहुल ने कहा कि जज लोया को याद कर रहा हूं जिनका तबादला नहीं किया गया था। राहुल के इस ट्वीट पर यूजर्स कि प्रतिक्रियाएं आना शुरू हो गई हैं। एक यूजर ने उन्हें इस बात के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का शुक्रिया अदा करने को कहा है।

राहुल ने ने न्यायाधीश लोया के मामले का उल्लेख किया और सरकार पर तंज करते हुए ट्वीट किया, “बहादुर न्यायाधीश लोया को याद कर रहा हूं कि जिनका तबादला नहीं किया गया था।” राहुल के इस ट्वीट पर एक यूजर ने लिखा “और इसी बीच अमित शाह का शुक्रिया अदा कीजिए कि जस्टिस मुलरिधरण को जज लोया नहीं बनाया, ट्रांसफर किया है अच्छी बात है लेकिन बीजेपी नेताओं के ख़िलाफ़ एफआईआर का आदेश करने वाले जज का त्वरित ट्रांसफ़र बता रहा है दंगे में छुट भैया नेतओं से लेकर बड़े नेताओं का हाथ है, वह दंगा रोकना नहीं चाहते।”

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राहुल के अलावा पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी इसपर तीखा हमला बोला है। प्रियंका ने न्यायमूर्ति के तबादले पर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने न्याय अवरुद्ध करने का प्रयास किया है। प्रियंका ने ट्वीट कर कहा, “न्यायमूर्ति मुरलीधर का मध्यरात्रि में तबादला मौजूदा शासन को देखते हुए चौंकाने वाला नहीं है। लेकिन यह निश्चित तौर पर दुखद और शर्मनाक है।”उन्होंने आरोप लगाया, “करोड़ों भारतीय नागरिकों को न्यायपालिका पर आस्था है। न्याय को अवरुद्ध करने और लोगों का विश्वास तोड़ने का सरकार का प्रयास निंदनीय है।”

बता दें न्यायाधीश मुरलीधर का पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय में तबादला किया गया है। दिल्ली हिंसा मामले की सुनवाई के दौरान उनकी अगुवाई वाली पीठ ने कथित रूप से नफरत फैलाने वाले भाषणों को लेकर तीन भाजपा नेताओं के खिलाफ दिल्ली पुलिस के प्राथमिकी दर्ज नहीं करने पर “नाराजगी” जताई थी। इस हिंसा में अबतक 32 लोगों की मौत हो चुकी है।

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