आर्मी चीफ के बयान पर राहुल गांधी का तंज, पूछा- क्या चीन हमारी धरती पर रहने आया? सोशल मीडिया पर आने लगे रिएक्शन

राहुल गांधी ने पूर्वी लद्दाख के संदर्भ में थल सेना प्रमुख एम एम नरवणे की ‘चीन यहां बने रहने के लिए था’ टिप्पणी को लेकर भी सरकार की आलोचना की।

Rahul Gandhi China
राहुल गांधी के सीमा विवाद को लेकर एक बार सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। फोटो सोर्स- PTI

राहुल गांधी ने पूर्वी लद्दाख के संदर्भ में थल सेना प्रमुख एम एम नरवणे की ‘चीन यहां बने रहने के लिए था’ टिप्पणी को लेकर भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के जमावड़े पर जनरल नरवणे के बयान से जुड़ी एक खबर को टैग करते हुए तंजात्मक लहजे में पूछा कि चीन यहां बने रहने वाला था, कहां? हमारी जमीन पर। बताते चले जनरल नरवणे ने ‘इंडिया टुडे कॉन्क्लेव’ में कहा था कि हां, ये चिंता का विषय है कि बड़े पैमाने पर जमावड़ा हुआ है और यह जारी है और उस तरह के जमावड़े को बनाए रखने के लिए, चीन की ओर बुनियादी ढांचे का इसी पैमाने का विकास भी हुआ है।

राहुल गांधी की इस टिप्पणी पर सोशल मीडिया पर जबरदस्त प्रतिक्रिया देखने को मिली। लोग कांग्रेस काल के दौरान चीन के साथ रिश्तों को याद दिलाने लगे। ट्विटर पर उनकी इस टिप्पणी पर आई एक प्रतिक्रिया में विकास शर्मा (@VikashSharmaIB) नाम के यूजर ने लिखा कि चीन भारत में आपके राज में घुसे लेकिन परेशान होने की जरूरत नहीं है, जल्द ही इस समस्या से निपट लिया जाएगा। विकास शर्मा की इस प्रतिक्रिया पर एक यूजर ने लिखा कि लगता है आप भूल गए हैं देश में पिछले 7 सालों से भाजपा की सरकार है। इसके जवाब में विकास कहते हैं कि हम जब चीन से युद्ध हारे थे तो देश में मोदी की सरकार नहीं थी।

शेर सिंह राठौर (@SherSinghRathore3866) नाम के यूजर ने एक तस्वीर शेयर करते हुए लिखा कि सेना से सबूत मांगने वाली कांग्रेस कभी सेना की बहादुरी पर ट्वीट नहीं करेगी, जहां भारतीय सेना ने अरुणाचल में डेढ़ सौ से ज्यादा चीनी सैनिकों को बंदी बना लिया फिर जब चीन की सेना के कमांडर और भारतीय कमांडर के बीच में मीटिंग हुई उसके बाद ही छोड़ा गया।

वहीं मानवेंद्र सिंह (@Manva_tweets) नाम के यूजर ने सवाल उठाते हुए पूछा कि क्यों आप पूरा सच नहीं बताते है, अगर चीन की सेना रुकी है तो भारतीय सेना भी तो डटी हुई हैं।

आपकी जानकारी के लिए बता दे भारत और चीन के बीच दो महीने के अंतराल के बाद रविवार को एक और दौर की हाई लेवल कमांडर लेवल बातचीत हुई। सुरक्षा प्रतिष्ठान के सूत्रों ने बताया कि इस बातचीत का उद्देश्य पूर्वी लद्दाख में बाकी के टकराव स्थलों से सैनिकों की वापसी की दिशा में आगे बढ़ना है। वार्ता करीब साढ़े आठ घंटे तक चली। समझा जाता है कि कोर कमांडर स्तर की वार्ता में मुख्य रूप से पेट्रोलिंग प्वाइंट 15 (पीपी-15) से सैनिकों की वापसी की रुकी हुई प्रक्रिया को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

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