लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को कानून के तहत मिले संरक्षण को लेकर सवाल उठाए हैं। राहुल ने बुधवार को पूछा कि ज्ञानेश कुमार को ‘आजीवन इम्युनिटी’ क्यों दी गई है? राहुल गांधी ने खुद ही इस सवाल का जवाब देने की कोशिश की है।
राहुल ने बुधवार को ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक के बाद X पर एक पोस्ट में कहा, ”सीईसी ज्ञानेश कुमार ही ऐसे एकमात्र भारतीय क्यों हैं जिन्हें आजीवन पूर्ण कानूनी सुरक्षा मिली हुई है?”
राहुल गांधी ने इस सवाल के जवाब में कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ज्ञानेश कुमार का इस्तेमाल ‘चुनाव चोरी करने’ के लिए करते हैं।
चुनाव आयुक्तों ने दर्ज कराई थी आपत्ति
राहुल गांधी ने यह आरोप चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच लगाए हैं। द इंडियन एक्सप्रेस की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मतदाता सूची और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से संबंधित फैसलों पर 10 महीनों में कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज कराई थी।
राहुल गांधी का यह आरोप मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों को कानूनी संरक्षण देने वाले 2023 के कानून को लेकर आया है। इस कानून की धारा 16 के तहत किसी मौजूदा या पूर्व सीईसी अथवा निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ उसके आधिकारिक कर्तव्य का पालन करते हुए किए गए किसी काम, बात या अभिव्यक्ति के संबंध में दीवानी या आपराधिक कार्यवाही अदालत में शुरू या जारी नहीं की जा सकती।
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल चुनावी प्रक्रिया और एसआईआर को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
‘इंडिया’ गठबंधन ने किया राष्ट्रव्यापी अभियान का ऐलान
इस बीच, ‘इंडिया’ गठबंधन ने बुधवार को देशभर में आंदोलन और सभाएं आयोजित करने का फैसला किया है। गठबंधन ने कहा कि ‘इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन’ (ईवीएम) की जगह मतपत्र के जरिए चुनाव कराए जाएं। गठबंधन की बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि सभी नेताओं ने मिलकर लड़ाई लड़ने की बात की है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में बड़ा घोटाला हुआ है तथा भाजपा ने इन राज्यों में चुनावों को ‘लूटा’ है। ममता बनर्जी ने कहा कि अगर ज्ञानेश कुमार को नहीं हटाया जाता तो आंदोलन जारी रहेगा।
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चुनाव आयोग में पिछले 10 महीनों के दौरान 14 बार दर्ज कराई गई असहमति ने आयोग के कामकाज और फैसले लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। यहां क्लिक कर पढ़िए द इंडियन एक्सप्रेस की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट।
