लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को SIR को लेकर फिर से सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि मतदाता पंजीकरण के लिए ऑनलाइन फॉर्म 6 में किए गए बदलावों को किसने अधिकृत किया और क्या टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) पर इन्हें लागू करने के लिए दबाव डाला गया था।
राहुल गांधी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “ऑनलाइन फॉर्म 6 में अवैध रूप से बदलाव किया गया, जैसा कि चुनाव आयोग के आयुक्तों ने खुद दर्ज किया है। चुनाव आयोग में किसने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज को यह बदलाव करने का आदेश दिया? टीसीएस में किसने इस पर हस्ताक्षर किए? और क्या उन पर ऐसा करने के लिए दबाव डाला गया था?”
न्यूज एजेंसी पीटीआई ने बुधवार को बताया कि जिन राज्यों में मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। वहां चुनाव आयोग ने फॉर्म 6 से जुड़ी अतिरिक्त विशेष गहन संशोधन (SIR) संबंधी घोषणा को वापस ले लिया है।
यह घोषणा ECINET ऐप और पोर्टल के साथ-साथ संबंधित मुख्य निर्वाचन अधिकारी पोर्टलों से भी हटा दी गई है। जिसका अर्थ है कि इन राज्यों में नए आवेदकों को मतदाता नामांकन के लिए केवल नियमित वैधानिक फॉर्म 6 जमा करना होगा। जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची (एसआईआर) तैयार करने की प्रक्रिया अभी भी जारी है, वहां अतिरिक्त घोषणा ईसीआईएनईटी पोर्टल पर उपलब्ध है। इस घोषणा के तहत, नए आवेदकों को अपने, अपने माता-पिता या दादा-दादी के नाम को पिछली एसआईआर के दौरान तैयार की गई मतदाता सूचियों से जोड़ने वाले विवरण प्रदान करने होंगे।
राहुल गांधी का यह बयान इंडियन एक्सप्रेस की इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट के बाद आया। रिपोर्ट में खुलासा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने ऑनलाइन फॉर्म 6 में किए गए बदलावों पर आपत्ति जताई थी। यह वह आवेदन है जिसका उपयोग मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए किया जाता है।
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एसआईआर मतदाता सूची से संबंधित एक अतिरिक्त घोषणा ईसीआईएनईटी पोर्टल पर ऑनलाइन फॉर्म 6 में जोड़ी गई थी । इस घोषणा में यह जानकारी मांगी गई थी कि क्या आवेदक का नाम या उनके माता-पिता या दादा-दादी का नाम, पिछले एसआईआर के दौरान तैयार की गई मतदाता सूची में दर्ज था।
विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच SIR और चुनाव निकाय के कामकाज को लेकर चल रहे व्यापक राजनीतिक टकराव के बीच एक बड़ा विवाद सामने आया है।
बुधवार को इससे पहले, इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने नई दिल्ली में एक बैठक की और चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों कीघोषणा की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि विपक्षी दल 2 से 8 अक्टूबर तक जिला स्तर पर राष्ट्रव्यापी “लोकतंत्र बचाओ मार्च” का आयोजन करेंगे।
विपक्षी सांसदों द्वारा 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग तक मार्च निकालने की भी योजना है, जबकि इंडिया ब्लॉक के नेताओं द्वारा अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलकर अपनी चिंताओं को उठाने की उम्मीद है।
राहुल गांधी ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि इंडिया ब्लॉक के नेता लोकतांत्रिक संस्थानों के लिए कथित खतरों के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि भारत के सभी नेताओं की यह व्यक्तिगत प्रतिबद्धता है कि हम यह सुनिश्चित करेंगे कि भारतीय लोकतंत्र को नष्ट करने वालों को दंडित किया जाए। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे कितने वरिष्ठ हैं, कौन हैं। भारतीय लोकतंत्र इस देश के हर एक व्यक्ति से बड़ा है। हालांकि, चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची स्थापित वैधानिक प्रक्रियाओं के माध्यम से तैयार की जाती है और उसने ईसीआईएनईटी के कामकाज की समीक्षा के लिए कदम उठाए हैं।
जस्टिस अमित एस. जमसांडेकर और जस्टिस वाल्मीकि मेनेजेस की बेंच ने कहा कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट किसी का नाम हटाने का आधार नहीं हो सकती। अदालत ने कहा कि अगर ऐसा होने लगे तो Form 6, 7 और 8 का कोई मतलब ही नहीं रह जाएगा। ये फॉर्म अलग-अलग परिस्थितियों के लिए बनाए गए हैं। पढ़ें पूरी खबर।
