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राहुल गांधी को अपनी मां सोनिया गांधी के मार्गदर्शन की जरूरत

अपनी खोई जमीन को हासिल करने के लिए जूझ रही कांग्रेस के संबंध में असम के तीन बार के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने कहा है कि राहुल गांधी की ओर से की जा रही पहलों और सोनिया गांधी की परिपक्वता व अनुभव से पार्टी को फिर से अपना इकबाल बुलंद करने में मदद मिलेगी। पार्टी […]
मई में राहुल गांधी बन सकते हैं कांग्रेस अध्यक्ष? (फोटो: भाषा)

अपनी खोई जमीन को हासिल करने के लिए जूझ रही कांग्रेस के संबंध में असम के तीन बार के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने कहा है कि राहुल गांधी की ओर से की जा रही पहलों और सोनिया गांधी की परिपक्वता व अनुभव से पार्टी को फिर से अपना इकबाल बुलंद करने में मदद मिलेगी। पार्टी को हालिया लोकसभा चुनावों समेत कई राज्यों में हुए चुनावों में करारी हार का सामना करना पड़ा है। 2001 के बाद से असम में विधानसभा चुनावों में लगातार जीत हासिल कर रहे गोगोई ने कहा कि राहुल क्रमवार तरीके से आगे बढ़ने में यकीन रखते हैं और कांग्रेस में फिर से नई जान डालने के लिए सोनिया गांधी को उनका पथप्रदर्शन करते रहना होगा।

राहुल के नेतृत्व में भरोसा जाहिर करते हुए गोगोई ने पार्टी उपाध्यक्ष को धुन का पक्का बताते हुए कहा कि उन्होंने पार्टी के लिए अपने दीर्घकालिक दृष्टिकोण को दिमाग में रखते हुए कई नई पहल की हैं। मेरा उनमें पूरा भरोसा है। मैंने इंदिराजी, राजीवजी और सोनियाजी के साथ काम किया है। वे (राहुल) धुन के पक्के हैं जो कदम दर कदम आगे बढ़ना चाहते हैं। अफरातफरी मचाते हुए आगे बढ़ने के बजाय क्रमवार ढंग से आगे बढ़ना ज्यादा बेहतर सोच है।

राहुल को अनिच्छुक उत्तराधिकारी के रूप में देखे जाने और क्या उन्हें कांग्रेस की पूरी जिम्मेदारी संभालनी चाहिए जैसे सवालों पर पूर्वोत्तर में कांग्रेस की सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण हस्ती माने जाने वाले 78 वर्षीय गोगोई ने कहा कि सोनियाजी को उनका पथप्रदर्शन करते रहना होगा। तरुण गोगोई ने कहा- हमें उनकी परिपक्वता, निर्देशन और अनुभव के साथ राहुल की नई पहलों की भी जरूरत है। दोनों का मेल होना चाहिए।

लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की बुरी गत के बाद कई कांग्रेसी नेता पार्टी की कमान पूरी तरह राहुल को सौंपने की वकालत कर रहे हैं। पार्टी को महाराष्ट्र और हरियाणा में भी मुंह की खानी पड़ी है। पार्टी में प्रियंका गांधी को महत्त्वपूर्ण पद सौंपे जाने की विभिन्न नेताओं की मांग पर गोगोई ने कहा कि इसका फैसला गांधी परिवार को करना है। उन्होंने कहा कि ये उन्हें देखना है। वे पार्टी के लिए काम कर रही हैं। इसका फैसला उनको करना है। कोई किसी को मजबूर नहीं कर सकता। 2016 के विधानसभा चुनाव में पार्टी का नेतृत्व करने संबंधी सवाल पर गोगोई ने केवल इतना कहा कि वे जोरशोर से चुनाव प्रचार करेंगे।

असम के मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकसभा चुनाव में भाजपा ने भले ही 14 में से सात सीटें जीती हों लेकिन अब उसका आधार खिसक रहा है। क्योंकि जिन लोगों ने अच्छे दिन की उम्मीद लगाई थी, उन्हें नरेंद्र मोदी सरकार से पूरी तरह निराशा हुई है। मोदी सरकार चुनाव प्रचार के दौरान किए गए वादों को पूरा करने में नाकाम रही है। कांग्रेस राज्य में केवल तीन सीटें ही जीत पाई थी। गोगोई ने दावा किया कि असम के लोगों को कोई अच्छे दिन नहीं दिखे हैं। कीमतें कम नहीं हुई हैं। राजग सरकार ने बाढ़ के दौरान असम की मदद करने की जरूरत नहीं समझी। उन्होंने आंध्र प्रदेश और जम्मू कश्मीर के लिए धन मंजूर किया लेकिन असम के लिए नहीं। इसलिए लोग निराश हैं।

2016 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत का भरोसा जाहिर करते हुए तरुण गोगोई ने कहा कि पूर्वोत्तर के प्रति पिछली यूपीए और मौजूदा राजग सरकार के दृष्टिकोण में भारी अंतर है और राज्य के लोगों को इसका अहसास है। पिछले छह महीने में मोदी सरकार के प्रदर्शन पर गोगोई ने कहा कि लोग उन्हें अभी कुछ और समय देंगे, हालांकि वे बढ़ती कीमतों पर काबू पाने समेत कई मोर्चों पर उम्मीदों पर खरे उतरने में विफल रहे हैं।

असम के मुख्यमंत्री ने कहा- प्रचार के हिसाब से कहें तो हां, मैं कहूंगा कि उन्होंने (मोदी सरकार) अच्छा काम किया है। लेकिन वादों का क्या? क्या कीमतें कम हुई? सरकार ने रिक्तियों को नहीं भरने का फैसला क्यों किया? जनता ये सवाल कर रही है। पूर्व मंत्री हिमंता बिस्व सरमा के कांग्रेस छोड़ने की संभावना संबंधी रिपोर्टों पर गोगोई ने केवल इतना कहा कि कई कद्दावरों ने पार्टी छोड़ी लेकिन इस पर कोई असर नहीं पड़ा। उन्होंने कहा- मैं कांग्रेस में हूं। मैंने इंदिरा गांधी के समय में भी कई पूर्व मुख्यमंत्रियों समेत कांग्रेसी नेताओं को पार्टी छोड़कर जाते देखा है। मैंने कांग्रेस के इतिहास में उतार चढ़ाव देखा है।

यह आम कार्यकर्ता है जो महत्त्वपूर्ण है। कांग्रेस, कांग्रेस की विचारधारा के कारण जिंदा है। आम कार्यकर्ता के कारण जिंदा है।
नेतृत्व में बदलाव की मांग पर अड़े असंतुष्ट नेताओं का नेतृत्व करने वाले सरमा ने जुलाई में कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था। यह पूछे जाने पर कि क्या वे उल्फा नेता परेश बरुआ को वार्ता के लिए मनाने में कामयाब होंगे, गोगोई ने कहा कि वे प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आतंकवादी संगठन हिंसा छोड़ेगा और मुख्यधारा में शामिल होगा। उन्होंने कहा कि मैं कोशिश कर रहा हूं। मैं नहीं कह सकता कि सौ फीसद। वे (बरुआ) अन्य ताकतों के चंगुल में हैं।

 

 

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