Punjab News: पंजाब में अगले साल 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। उससे पहले पंजाब कांग्रेस के नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं भी हो रही है। इन सुर्खियों के बीच ही कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने पंजाब कांग्रेस के 5 दिग्गज नेताओं से अपने आवास पर व्यक्तिगत मुलाकात की है। राज्य के नेताओं के साथ बातचीत में मुख्य मुद्दा विधानसभा चुनाव ही रहा है।

हाल ही में, कांग्रेस कोषाध्यक्ष अजय माकन की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पर्यवेक्षक समिति द्वारा पंजाब में पार्टी की संगठनात्मक और राजनीतिक स्थिति को लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को दी थी। रविवार को राहुल गांधी ने उस रिपोर्ट को सौंपे जाने के बाद पंजाब के नेताओं से मुलाकात की है।

संगठन को लेकर बनी है रिपोर्ट

जानकारी के मुताबिक, पंजाब कांग्रेस को लेकर बनाई गई इस कमेटी में अजय माकन के अलावा मीनाक्षी नटराजन और भजन लाल जाटव भी शामिल थे। इस समिति को राज्य इकाई के संगठनात्मक स्वास्थ्य का आकलन करने और नेतृत्व, गुटबाजी और चुनाव तैयारियों जैसे मुद्दों पर प्रतिक्रिया एकत्र करने का कार्य सौंपा गया था।

राहुल गांधी ने किस-किस से की मुलाकात?

सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी ने पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग, विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, पूर्व मंत्री सुखजिंदर रंधावा और विजय इंदर सिंगला से अलग-अलग मुलाकात की।

कमेटी से आई रिपोर्ट्स को पार्टी के हाईकमान द्वारा पंजाब इकाई पर अंतिम निर्णय लेने के लिए चल रही प्रक्रिया के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। पंजाब में पार्टी आक्रामकता के साथ चुनाव प्रचार कर रही है, क्योंकि राहुल गांधी राज्य में कांग्रेस की सत्ता में वापसी की उम्मीद कर रही है।

विधानसभा चुनाव पर सारा फोकस

बैठक से बाहर निकलते हुए कांग्रेस नेता अमरिंदर सिंह राजा वारिंग ने नेतृत्व की बहस के बजाय पार्टी की चुनावी रणनीति पर ध्यान केंद्रित करने की कोशिश की। उन्होंने कहा, “मुझे सिर्फ इतना पता है कि कांग्रेस को चुनाव कैसे लड़ना है, किन मुद्दों पर चुनाव लड़ना है और हमारे मुद्दे क्या होंगे। इन सभी मुद्दों पर आज चर्चा हुई। हमारी पार्टी में कोई मतभेद नहीं है। हम आम आदमी पार्टी को जड़ से उखाड़ फेंकेंगे और पंजाब में भी आम आदमी पार्टी का वही हाल होगा जो दिल्ली में हुआ था ।”

राज्य विधानसभा में नेता विपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने संगठनात्मक बदलावों को लेकर चल रही अटकलों पर टिप्पणी करने से भी परहेज किया। उन्होंने कहा, “हमारी बैठक अच्छी रही। पंजाब के मुद्दों पर चर्चा हुई। राहुल गांधी जो भी फैसला लेंगे, वह हमें स्वीकार्य है।”

स्थानीय नेताओं से लिया फीडबैक

पर्यवेक्षक पैनल की रिपोर्ट का विशेष महत्व इसलिए है क्योंकि यह पंजाब कांग्रेस के भीतर प्रतिद्वंद्वी गुटों द्वारा हफ्तों तक की गई पैरवी के बाद आई है। इस महीने की शुरुआत में, पार्टी नेतृत्व ने तीन पर्यवेक्षकों को चंडीगढ़ भेजा था। पर्यवेक्षकों ने सांसदों, विधायकों, पूर्व विधायकों, जिला अध्यक्षों और अन्य पदाधिकारियों के साथ व्यक्तिगत बातचीत की। नेताओं से संगठन के कामकाज, 2027 के चुनावों की संभावनाओं और पार्टी को मजबूत करने के लिए किसी संगठनात्मक परिवर्तन की आवश्यकता है या नहीं, इस बारे में अपने विचार देने को कहा गया।

नेतृत्व परिवर्तन को लेकर हाईकमान में असमंजस

दिल्ली में हुई बैठकों की में राज्य इकाई के भीतर लगातार मतभेद उजागर हुए है। एक गुट कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और समन्वय सुधारने के लिए संगठनात्मक परिवर्तनों की वकालत कर रहा है, जबकि दूसरा गुट यह तर्क दे रहा है कि विधानसभा चुनावों से कुछ ही महीने पहले नेतृत्व में बदलाव करना व्यवधान उत्पन्न कर सकता है।

हालांकि, कांग्रेस के हाई कमान ने आधिकारिक तौर पर यह नहीं बताया है कि वह किस दिशा में आगे बढ़ना चाहती है, सूत्रों ने कहा कि परामर्श प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। रविवार की बैठकों के बारे में बात करते हुए विजय इंदर सिंगला ने कहा कि बैठक की चर्चा पंजाब की राजनीतिक स्थिति के उन मुद्दों पर केंद्रित थी जिन पर पार्टी सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी का मुकाबला करने की योजना बना रही है, और आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों पर चर्चा हुई।

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पंजाब भाजपा में इन दिनों सियासी हलचल तेज है। पूर्व आईएएस अधिकारी और भाजपा नेता डॉ. जगमोहन सिंह राजू ने प्रदेश उपाध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया है। पार्टी हाईकमान को एक पत्र लिखकर अपील की है कि फिलहाल उन्हें कोई भी संगठनात्मक जिम्मेदारी न दी जाए। उन्होंने कहा है कि पंजाब से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर वह अपना पूरा समय देना चाहते हैं। पढ़िए पूरी खबर…