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राहुल गांधी हैं ‘प्रभावी प्रतिद्वंद्वी’, BJP की मजाक उड़ाने की तरकीब कारगर नहीं रही: शशि थरूर

भाजपा पूर्व में राहुल गांधी का मजाक बनाने में बहुत हद तक सफल रही थी। वह चीज अब बहुत अधिक कारगर नहीं रही क्योंकि राहुल गांधी को भाजपा के प्रभावी प्रतिद्वंद्वी के तौर पर देखा जा रहा है।

Author नई दिल्ली | October 23, 2017 2:40 AM
शशि थरूर ने यह बात ट्वीट करके कही। (फाइल फोटो)

पूर्व मंत्री शशि थरूर ने कहा है कि भाजपा राहुल गांधी का ‘मजाक बनाने में बहुत हद तक सफल रही’ लेकिन यह तरीका अब कारगर नहीं रहा क्योंकि लोग कांग्रेस उपाध्यक्ष को अब ‘प्रभावी प्रतिद्वंद्वी’ के तौर पर देख रहे हैं। कांग्रेस सांसद ने एक साक्षात्कार में कहा कि पिछले कुछ महीनों में समूचे परिदृश्य में ‘बहुत स्पष्ट फर्क’ आया है और लोग नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर खुलेआम अपना ‘संशय’ जाहिर कर रहे हैं। तिरुवनंतपुरम से लोकसभा के सदस्य ने कहा कि लोग कांग्रेस को भाजपा के उपयुक्त विकल्प के तौर पर देखना चाहते हैं।

उन्होंने कहा, ‘भाजपा पूर्व में राहुल गांधी का मजाक बनाने में बहुत हद तक सफल रही थी। वह चीज अब बहुत अधिक कारगर नहीं रही क्योंकि राहुल गांधी को भाजपा के प्रभावी प्रतिद्वंद्वी के तौर पर देखा जा रहा है। सोच में जो बदलाव आया है, वो अगर जारी रहा तो चीजें कांग्रेस के पक्ष में जा सकती हैं।’ थरूर ने कहा कि पंजाब के गुरदासपुर में कांग्रेस और केरल के वेंगारा में उसके सहयोगी दल की हालिया जीत से परिवर्तन नजर आ रहा है। उन्होंने दावा किया कि केरल और गुजरात में यात्रा निकालने की भाजपा की कोशिश ‘पूरी तरह विफल’ रही।

61 वर्षीय नेता ने कहा, ‘मैं भी यह प्रबल रूप से महसूस कर रहा हूं कि लोगों ने यह पूछना शुरू कर दिया है कि सरकार अपने वादों को पूरा करने के लिए क्या कर रही है। इस बात को लेकर कोई संदेह नहीं है कि लोग हमें अप्रैल या मई 2014 की तुलना में अधिक संभावना के साथ देख रहे हैं।’ उनका बयान काफी अहम है क्योंकि गांधी के जल्द ही कांग्रेस की कमान संभालने की संभावना है। पिछले महीने अमेरिका में कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में छात्रों को संबोधित करते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा था कि दूसरे राजनीतिक खेमे द्वारा उनके खिलाफ चलाए गए अभियान से ऐसी धारणा बनी कि वह एक अनिच्छुक राजनेता हैं। रोहिंग्या मुसलमानों पर सरकार के रुख की आलोचना में मुखर रहे पूर्व विदेश राज्य मंत्री ने कहा कि जबरन वापस भेजे जाने से अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भारत का नाम खराब होगा।

 

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