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राहुल गांधी ने खुद झंडा फहराने से मना कर दिया, पर केसी वेणुगोपाल को मंच पर बिठाने की जताई ख्वाहिश, देखते रहे ग़ुलाम नबी आज़ाद

राहुल गांधी ने लोकसभा में पार्टी के नेता अधीर रंजन चौधरी को भी मंच पर बुलाया। इस कड़ी में राहुल ने पार्टी के सीनियर नेताओं में शामिल गुलाम नबी आजाद को नजरअंदाज कर दिया।

Author Translated By प्रमोद प्रवीण नई दिल्ली | Updated: August 30, 2020 9:55 AM
rahul gandhi ghulam nabi azad congressकांग्रेस कार्यालय में मौजूद राहुल गांधी व अन्य वरिष्ठ नेता। (एक्सप्रेस फोटो)

15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पर देशभर में झंडारोहण हुआ। 24 अकबर रोड स्थित कांग्रेस के मुख्यालय में भी हर बार की तरह तिरंगा फहराया गया लेकिन इस बार जिस तरीके से यह समारोह हुआ, उससे पार्टी के अंदर गुटबाजी और अदावत बढ़ती दिखी। पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से तिरंगा फहराने का पहले अनुरोध किया गया लेकिन उन्होंने मना कर दिया। तब पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेता और पूर्व रक्षा मंत्री ए के एंटनी ने ध्वजारोहण किया।

इंडियन एक्सप्रेस में छपे कुमी कपूर के कॉलम ‘इनसाइड ट्रैक’ के मुताबिक, राहुल गांधी ने इस बीच पार्टी के संगठन महासचिव के सी वेणुगोपाल को भी मंच पर बैठाने की ख्वाहिश जताई। तभी किसी ने टिप्पणी की कि केरल के दो-दो नेता एक साथ मंच पर राज्य का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इसी बीच राहुल गांधी ने लोकसभा में पार्टी के नेता अधीर रंजन चौधरी को भी मंच पर बुलाया। इस कड़ी में राहुल ने पार्टी के सीनियर नेताओं में शामिल गुलाम नबी आजाद को नजरअंदाज कर दिया। आजाद उन 23 नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने पार्टी आलाकमान को आमूल-चूल बदलाव के लिए लिखी गई चिठ्ठी पर हस्ताक्षऱ किए हैं।

बता दें कि पांच पूर्व मुख्यमंत्रियों समेत कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) के कई पदाधिकारियों, वर्तमान सांसदों और कई पूर्व केंद्रीय मंत्रियों ने पिछले दिनों पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर पार्टी में टॉप-टू-बॉटम बदलाव करने की मांग की थी। पत्र में कहा गया था के देश के युवाओं के बीच नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता बढ़ रही है, जबकि कांग्रेस के प्रति उनका रुझान लगातार कम हो रहा है। नेताओं ने पार्टी में पूर्णकालिक अध्यक्ष की नियुक्ति की भी मांग की थी।

इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में राज्यसभा में पार्टी के नेता गुलाम नबी आज़ाद के अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल, आनंद शर्मा, मनीष तिवारी, शशि थरूर भी शामिल हैं। इनके अलावा सांसद विवेक तन्खा, कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य मुकुल वासनिक और जितिन प्रसाद भी शामिल हैं। पूर्व मुख्यमंत्रियों में भूपेंद्र सिंह हुड्डा, राजिंदर कौर भट्टल, वीरप्पा मोईली, पृथ्वीराज चव्हाण ने भी उस चिट्ठी पर दस्तखत किए हैं।

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