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मुद्दों की बारीकियां समझने को राहुल गांधी ले रहे क्‍लासेज, अब तक 150 घंटे एक्‍सपर्ट्स संग किया मंथन

किसानों के मुद्दे को लेकर राहुल अब तक 10 अलग-अलग सत्रों में शामिल हुए हैं। रोजगार सृजन पर भी राहुल पांच सत्र में हिस्‍सा ले चुके हैं। इसके अलावा दलितों, समाज के कमजोर वर्गों, महिलाओं पर अत्‍याचार से जुड़े मुद्दों पर भी सत्र आयोजित हुए हैं।

नई दिल्‍ली में एक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस के दौरान कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी। (Photo : PTI/30 August, 2018)

कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी 2019 लोकसभा चुनाव के लिए खूब तैयारी कर रहे हैं। पिछले साल दिसंबर में पद संभालने के बाद से ही उन्‍होंने विभिन्‍न क्षेत्रों के विशेषज्ञों संग मंथन शुरू किया है। इस तरह के 50 से ज्‍यादा सत्र आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें राहुल गांधी करीब 150 घंटे तक विशेषज्ञों से विभिन्‍न मुद्दों की बारीकियां समझते रहे। ‘दैनिक भास्‍कर’ में छपी रिपोर्ट के अनुसार, किसानों के मुद्दे को लेकर राहुल अब तक 10 अलग-अलग सत्रों में शामिल हुए हैं। रोजगार सृजन पर भी राहुल पांच सत्र में हिस्‍सा ले चुके हैं। इसके अलावा दलितों, समाज के कमजोर वर्गों, महिलाओं पर अत्‍याचार से जुड़े मुद्दों पर भी सत्र आयोजित हुए हैं।

जब सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने प्रेस कॉन्‍फ्रेंस की, तब राहुल ने पार्टी के विशेषज्ञ वकीलों को बुलाकर उनकी राय ली थी। पूर्व नौकरशाहों से मुलाकात कर राहुल शासन की बारीकियां समझ रहे हैं। विदेश नीति और डोकलाम को लेकर भी राहुल पूर्व राजनयिकों संग चर्चा कर चुके हैं। अखबार ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि राहुल ‘बड़ी जिम्‍मेदारी’ स्‍वीकर करने के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं।

ऐसी ही एक क्‍लास राहुल के 12, तुगलक रोड स्थित आवास पर लगी थी। इसमें ब्‍लॉगर्स, ट्विटर यूजर्स को बुलाया गया था जिनकी पोस्‍ट्स वायरल होने में देर नहीं लगती। इसी दौरान जब एक एक्‍सपर्ट ने कहा कि ‘मैंने कांग्रेस को आज तक वोट नहीं दिया और वाजपेयीजी (पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी) का प्रशंसक रहा हूं’ तो राहुल मुस्‍कुरा दिए।

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कांग्रेस ने फ्रांस के साथ हुए राफेल फाइटर प्‍लेन के सौदे में कथित भ्रष्‍टाचार का मुद्दा जोर-शोर से उठा रखा है। इस सौदे की पेचीदगियां समझने को राहुल ने पूर्व अधिकारियों व सैन्‍य विशेषज्ञों से बात की है। सौदे से जुड़े नियम, डिफेंस डील्‍स में निजी हिस्‍सेदारी, वायुसेना की जरूरतों पर राहुल चर्चा कर चुके हैं।

इन सत्रों में विशेषज्ञों की संख्‍या सीमित रखी जाती है ताकि वे सबसे आंख मिलाकर बात कर सकें। पार्टी से अलग राय रखने वाले लोगों को भी चर्चा के लिए बुलाया जाता है। इन चर्चाओं का पावर प्‍वॉइंट प्रजेंटेशन भी तैयार किया जा रहा है।

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