Amit Shah News: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को लोकसभा में कहा कि देश नक्सल-मुक्त हो चुका है। उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य 31 मार्च तक नक्सल-मुक्त भारत का था। पूरी प्रक्रिया औपचारिक रूप से पूरी होने के बाद देश को सूचित किया जाएगा, मगर मैं ऐसा बोल सकता हूं कि हम नक्सल मुक्त हो गए हैं।”
अमित शाह ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, “राहुल गांधी अपने लंबे राजनीतिक करियर में कई बार नक्सलवादियों के हमदर्दों के साथ देखे गए हैं। भारत जोड़ो यात्रा में कई नक्सल फ्रंटल संगठन हिस्सा लिए, इसका मेरे पास रिकॉर्ड है। 2010 में ओडिशा में लाडो शिकोका के साथ मंच साझा किया, शिकोका ने उसी मंच से भड़काऊ भाषण दिया और राहुल गांधी को माला भी पहनाई। 2018 में हैदराबाद में गुमड़ी विट्ठल राव उर्फ गद्दार से मुलाकात की, जो विचारधारा के करीब रहे। मई 2025 को-ऑर्डिनेशन कमिटी ऑफ पीस इसके साथ मुलाकात की।”
अमित शाह ने जोर देकर कहा, “और जब 172 जवानों को मारने वाला हिड़मा मारा गया तो इंडिया गेट पर नारे लगे, कितने हिड़मा मारोगे, हर घर से हिड़मा निकलेगा, और इस वीडियो का राहुल गांधी ने खुद ट्वीट किया। इन्होंने 1970 से लेकर मार्च 2026 तक नक्सलवाद का समर्थन किया है।”
बस्तर के अंदर हर गांव में स्कूल बनाने की मुहिम चली- शाह
अमित शाह ने कहा, “आज बस्तर से नक्सलवाद लगभग-लगभग समाप्त हो चुका है। बस्तर के अंदर हर गांव में स्कूल बनाने की मुहिम चली। बस्तर के अंदर हर गांव में राशन की दुकान खोलने की मुहिम चली। मैं इतना ही पूछना चाहता हूं कि नक्सलवाद को जो लोग यहां पर वकालत कर रहे थे कि ये 70 से अब तक क्यों नहीं मिला। पूरे देश को 2014 में नरेंद्र मोदी जी की सरकार आने के बाद देश के हर गरीब को घर मिला, गैस मिला, शुद्ध पीने का पानी मिला, 5 लाख तक का स्वास्थ्य का बीमा मिला, प्रति व्यक्ति, प्रतिमाह 5 किलो मुफ्त अनाज मिला। लेकिन ये बस्तर वाले क्यों छूट गए थे। ये बस्तर वाले इसलिए छूट गए थे, क्योंकि वहां लाल आतंक का परछाई थी, इसलिए वहां विकास नहीं पहुंचा। ये नरेंद्र मोदी की सरकार है, जो हथियार उठाएगा, उसका हिसाब चुकता होगा।”
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अमित शाह ने कांग्रेस पर बोला हमला
अमित शाह ने कांग्रेस पार्टी पर हमला बोला और सवाल किया, “मैं पूछना चाहता हूं कि 75 साल में 60 साल तो शासन आपने किया, आदिवासी अभी तक विकास से क्यों महरूम रहे? आदिवासियों का विकास तो अब पीएम मोदी कर रहे हैं। 60 साल आपने (कांग्रेस) उन्हें घर नहीं दिया, पानी नहीं दिया, स्कूल नहीं बना, बैंक की फैसिलिटी नहीं पहुंचने दिया, इसलिए पहले थोड़ा अपनी गिरेबान में झांककर देखो कि दोषी कौन है।”
वामपंथी विचारधारा के कारण नक्सलवाद फैला- अमित शाह
केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने आगे कहा, “वामपंथी विचारधारा के कारण ये नक्सलवाद फैला है, राष्ट्रपति पद का चुनाव जीतने के लिए इंदिरा गांधी ने भी स्वीकार की थी। मनमोहन सिंह जी ने पूरे देश के सामने स्वीकार किया था कि कश्मीर और नॉर्थ-ईस्ट की तुलना में भी देश में आंतरिक सुरक्षा की सबसे बड़ी समस्या माओवादी हैं, लेकिन कुछ नहीं हुआ। 2014 में परिवर्तन हुआ और मोदी जी के शासन में कई सारी वर्षों पुरानी समस्याओं का निराकरण हुआ। धारा 370 हट गई, राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर बना, जीएसटी इस देश में आज वास्तविकता बनकर आया है, सीएए का कानून आ गया है, विधायी मंडलों में मातृशक्ति को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है।”
लोकसभा में नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई पर बोलते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “उनका (नक्सलियों का) लोकतंत्र में कोई विश्वास नहीं है। यहां कई लोगों ने कहा कि वे अन्याय के खिलाफ लड़ रहे हैं। लेकिन आपकी लड़ाई का तरीका क्या है? हम अब ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के अधीन नहीं रह रहे हैं। कुछ लोगों ने तो भगत सिंह और बिरसा मुंडा से तुलना करने तक की कोशिश की है। यह कितनी बेशर्मी है? आप भगत सिंह और बीरसा मुंडा जैसे शहीदों, विशेष रूप से भगवान बीरसा मुंडा, जिन्होंने ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ लड़ाई लड़ी, की तुलना उन लोगों से कर रहे हैं जो संविधान का उल्लंघन करते हैं, हथियार उठाते हैं और निर्दोष लोगों का कत्लेआम करते हैं? ऐसे गंभीर मामलों पर विचार करते समय संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ से ऊपर उठना जरूरी है।”
जो भी हथियार उठाएगा उसे जवाब दिया जाएगा- अमित शाह
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “जो लोग अन्याय के खिलाफ लड़ने का दावा करते हुए सशस्त्र आंदोलन की वकालत कर रहे हैं, उनसे मैं पूछता हूं: क्या आप संविधान का सम्मान करेंगे या नहीं? अगर किसी के साथ अन्याय होता है, तो अदालतें स्थापित की गई हैं, विधानसभाएं, जिला परिषदें और तहसील गठित की गई हैं। मैं कहना चाहता हूं कि वह युग समाप्त हो गया है। यह नरेंद्र मोदी की सरकार है। जो भी हथियार उठाएगा, उसे जवाबदेह ठहराया जाएगा। इस तरह का व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार इन मुद्दों के प्रति संवेदनशील है; वह सभी शिकायतों को सुनने के लिए तैयार है और उन्हें हल करने के लिए प्रतिबद्ध है।”
