लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को आय से अधिक संपत्ति के आरोपों से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने CBI, प्रवर्तन निदेशालय (ED) और अन्य संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिया है कि वे फिलहाल इस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के समक्ष कोई रिपोर्ट दाखिल न करें।
सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही इलाहाबाद हाई कोर्ट से 20 अगस्त को होने वाली सुनवाई स्थगित करने को भी कहा है। शीर्ष अदालत पहले राहुल गांधी की याचिका पर सुनवाई करेगी जिसमें उन्होंने हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी की याचिका पर नोटिस जारी करते हुए मामले की सुनवाई स्वीकार कर ली है। अदालत अब यह तय करेगी कि इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा जांच एजेंसियों से रिपोर्ट तलब करने का आदेश उचित था या नहीं।
हाईकोर्ट ने क्या कहा था?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने मई के आदेश में कहा था कि अगर याचिकाकर्ता की शिकायत संबंधित एजेंसियों को प्राप्त हुई है तो कानून के अनुसार उसमें लगाए गए आरोपों का वेरिफिकेशन किया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि CBI और ED कानून के तहत उपलब्ध अधिकारों के अनुसार जरूरी कदम उठा सकती हैं।
इसके बाद हाईकोर्ट ने दोनों एजेंसियों से आगे की जांच की जानकारी देने के लिए कहा था।
क्या है मामला?
यह मामला कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर द्वारा लगाए गए आय से अधिक संपत्ति के आरोपों से जुड़ा है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पहले CBI, ED और अन्य एजेंसियों से इन आरोपों की जांच कर रिपोर्ट पेश करने को कहा था।
राहुल गांधी ने इसी आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। अब सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद जांच एजेंसियां फिलहाल हाई कोर्ट में कोई रिपोर्ट दाखिल नहीं करेंगी और हाई कोर्ट की अगली सुनवाई भी तब तक टाल दी जाएगी जब तक शीर्ष अदालत इस मामले पर आगे सुनवाई नहीं कर लेती।
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एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफार्म्स (एडीआर) ने लोकसभा सांसदों की संपत्तियों के ब्योरे को एक रिपोर्ट जारी किया है। इनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत विपक्ष नेता राहुल गांधी की संपत्ति का भी ब्योरा भी शामिल हैं। एडीआर ने अपने रिपोर्ट में साल 2014 से लेकर 2024 तक का डेटा लिया है। रिपोर्ट में बताया गया कि एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स और नेशल इल्केशन वॉच ने लोकसभा चुनाव 2014 से 2024 में दोबारा सांसद चुने जाने वाले 102 सांसदों के शपथपत्रों का विश्लेषण किया है।
