Parliament Session 2026: नीट पेपर लीक के मुद्दे पर छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया है। इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के बाद विपक्ष दल और खासकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी अब सोमावर को संसद सत्र के दूसरे सप्ताह में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को निशाना बनाने की तैयारी कर रहे हैं।

सूत्र बताते हैं कि कई विपक्षी दल स्थगन प्रस्ताव तैयार कर रहे हैं, जिनमें 20 जुलाई को दिल्ली में कागज़ लीक के विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस द्वारा की गई हिंसा और घातक हथियारों के इस्तेमाल को मुद्दा बनाकर अमित शाह से जवाब मांगा जाएगा।

छात्रों पर अत्याचार का उठा सकते हैं मुद्दा

विपक्षी सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), सीपीआई (एम) और अन्य दल अब पेपर लीक के मुद्दे से इतर छात्रों पर हुए लाठीचार्ज और अन्य अत्याचारों का मुद्दा उठाते नजर आ सकते हैं। कागज़ लीक के मुद्दे को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित अत्याचारों की ओर मोड़ने का प्रयास करेंगे।

सियासी गलियारों से ऐसे संकेत मिले हैं कि संसद के मॉनसून सत्र के दौरान मोदी सरकार के खिलाफ अपनी लड़ाई को विपक्षी दल अमित शाह तक ले जाएंगे क्योंकि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गृह मंत्री को पत्र लिखकर छात्र प्रदर्शनकारियों पर हुए “बर्बर हमले” के लिए जवाबदेही की मांग की।

अमित शाह को राहुल गांधी ने लिखा पत्र

राहुल गांधी ने गृहमंत्री अमित शाह को लिखे पत्र कहा, “हमारे छात्र एक निष्पक्ष और जवाबदेह शिक्षा प्रणाली की मांग कर रहे थे। उनकी बात सुनने के बजाय, सुरक्षा बलों ने उन पर अंधाधुंध बल प्रयोग किया, जिसमें घातक हथियार और आंसू गैस का इस्तेमाल शामिल था।” शनिवार को भले ही कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने अपना विरोध प्रदर्शन रद्द कर दिया लेकिन दूसरे दिन ही राहुल गांधी ने विपक्ष की दो मांगों को दोहराया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माफी और शाह से जवाबदेही।

राहुल गांधी ने रविवार को अमित शाह को लिखे पत्र में कहा, “सैकड़ों लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। महिला छात्राओं पर पुलिसकर्मियों ने हमला किया है जिनमें जानबूझकर उनके गुप्तांगों को निशाना बनाना भी शामिल है। सबसे चौंकाने वाली बात घातक पेलेट गन का इस्तेमाल है।” मीडिया और सोशल मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि एक पत्रकार समेत कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या शाह ने व्यक्तिगत रूप से पेलेट गन के इस्तेमाल और प्रदर्शनकारियों पर हमला करने के लिए सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों की कथित तैनाती को मंजूरी दी थी।

राहुल गांधी ने कहा, “मैं 19 वर्षीय छात्र साहिल लोचाब से मिला, जो इस समय गंभीर दर्द में है और संभवतः उसकी एक आंख खराब हो जाएगी क्योंकि उसे पेलेट गन से गोली मारी गई है। दिल्ली में तैनात सुरक्षा बल अंततः शाह के प्रति जवाबदेह हैं।” कांग्रेस नेता ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन आवश्यक है, और प्रदर्शनकारियों की रक्षा करना और संवाद के माध्यम से उनकी चिंताओं का समाधान करना सरकार का कर्तव्य है।

किस नियम के तहत चर्चा चाहता है विपक्ष?

सूत्रों ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि कांग्रेस, टीएमसी और सीपीआई (एम) समेत कुछ विपक्षी दलों ने नियम 267 के तहत स्थगन प्रस्ताव तैयार किए हैं, जिनमें दिल्ली में छात्रों के खिलाफ हुई कार्रवाई के दौरान “घातक हथियारों” के इस्तेमाल को अधिकृत करने पर चर्चा की मांग की गई है। नियम 267 संसद में तत्काल चर्चा की मांग करने की प्रक्रिया निर्धारित करता है। सूत्रों के अनुसार, समाजवादी पार्टी भी इस प्रस्ताव का समर्थन कर सकती है लेकिन अंतिम निर्णय सोमवार को लिया जाएगा।

विपक्षी दलों के एक सांसद ने कहा, “सोमवार को संसद की बैठक होने पर हम अमित शाह से जवाब मांगेंगे। देश को यह जानने की जरूरत है कि पेलेट गन जैसे अर्ध-घातक हथियार के इस्तेमाल को किसने अधिकृत किया और संसद को शांतिपूर्ण ढंग से विरोध प्रदर्शन कर रहे देश के छात्रों के खिलाफ हुई हिंसा पर चर्चा करनी चाहिए।”

कांग्रेस के संसदीय रणनीति समूह के एक वरिष्ठ सांसद ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि विपक्ष का रुख स्पष्ट है कि सरकार को छात्रों की तीनों मांगें माननी होंगी। सांसद ने कहा, “भले ही मुख्य न्यायाधीश ने विरोध प्रदर्शन समाप्त कर दिया हो, लेकिन हम सरकार के खिलाफ यह लड़ाई जारी रखेंगे। प्रधानमंत्री को माफी मांगनी चाहिए और गृह मंत्री को संसद के सवालों का जवाब देना चाहिए।” सांसद ने कहा, “हम न केवल पूरी सरकार से, बल्कि सीधे गृह मंत्री और प्रधानमंत्री से भी जवाब मांगेंगे।”

सीपीआई(एम) के सूत्रों ने बताया कि पार्टी दिल्ली में हुई हिंसा पर चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव भी पेश करेगी। सीपीआई(एम) के एक नेता ने कहा, “गृह मंत्रालय ने पूरी घटना को नियंत्रित किया और गृह मंत्री को सवालों के जवाब देने चाहिए क्योंकि वे सीधे तौर पर इसके लिए जिम्मेदार हैं।”

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केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिला है। जब उन्हें इसकी खबर मिली तो वो जंतर-मंतर से हजार किलोमीटर से भी ज़्यादा दूर धारवाड़ में थे। सूत्रों ने बताया कि सरकारी लीडरशिप ने प्रह्लाद जोशी को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े के कुछ घंटे पहले ही बताया कि उन्हें शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त चार्ज दिया गया है। प्रह्लाद जोशी हुबली से शाम 7.30 बजे की फ़्लाइट लेकर दिल्ली वापस आए और रविवार को मंत्रालय का चार्ज संभाला। पढ़िए पूरी खबर…