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Rahul Gandhi Birthday: उस रात खूब रोए थे राहुल, एक फोनकॉल ने बदल दी थी जिंदगी, छुपानी पड़ी थी पहचान

Rahul Gandhi Birthday: दादी इंदिरा गांधी और पिता राजीव गांधी की हत्या के बाद से राहुल गांधी की जिंदगी बेपटरी हो गई थी। उन्हें दादी की हत्या के बाद दून स्कूल छोड़ना पड़ा था। पिता राजीव ने तब उन्हें घर पर रखकर ही पढ़ाई पूरी करवाई थी।

दादी इंदिरा गांधी और पिता राजीव गांधी की हत्या के बाद से राहुल गांधी की जिंदगी बेपटरी हो गई थी।(PTI फोटो)

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी आज (19 जून, 2018 को) 48 साल के हो गए। उनका जीवन उथल-पुथल भरी घटनाओं से भरा रहा है। जब वो 10 साल के थे, तभी चाचा संजय गांधी की प्लेनक्रैश में मौत हो गई थी। किशोर हुए तब 14 साल की उम्र में 1984 में उनकी दादी और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या कर दी गई। 21 साल के होने से पहले ही पिता और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या कर दी गई। जब दादी इंदिरा गांधी की हत्या हुई थी तब राहुल बहन प्रियंका के साथ मशहूर दून स्कूल में पढ़ रहे थे। भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच उन्हें देहरादून से दिल्ली लाया गया था। कुछ महीने पहले राहुल गांधी ने एक इंटरव्यू में यह बताया था कि वो कैसे 1984 से लगातार भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच जी रहे हैं। आईआईएम सिंगापुर में एक कार्यक्रम में तब राहुल ने कहा था, 1984 से सुबह-शाम 15 सुरक्षाकर्मियों से घिरे रहते हैं। यह सुरक्षा घेरा उनकी जिंदगी में शामिल हो चुका है।

जब उनसे पिता राजीव गांधी की हत्या पर पूछा गया तो भावुक राहुल ने कहा, “हमलोगों को आभास था कि पापा मारे जाएंगे, दादी मारी जाएंगी।” उन्होंने बताया कि 21 मई 1991 को जब पिता राजीव गांधी की हत्या हुई थी तब वो बॉस्टन में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे थे। उस वक्त भारत में लोकसभा का चुनाव प्रचार चल रहा था। राहुल ने बताया, “एक रात पापा के दोस्त के एक भाई ने मुझे फोन किया और कहा कि आपके लिए एक बुरी खबर है, इसके बाद मैंने पूछा कि क्या वो मर गए? उन्होंने कहा-हां। इसके बाद फोन कट गया। इसके बाद मैं खूब रोया।”

पिता स्व. राजीव गांधी, मां सोनिया गांधी और बहन प्रियंका के साथ राहुल गांधी। (फोटो-एक्सप्रेस आर्काइव)

दादी इंदिरा गांधी और पिता राजीव गांधी की हत्या के बाद से राहुल गांधी की जिंदगी बेपटरी हो गई थी। उन्हें दादी की हत्या के बाद दून स्कूल छोड़ना पड़ा था। पिता राजीव ने तब उन्हें घर पर रखकर ही पढ़ाई पूरी करवाई थी। जब पिता की हत्या हुई तो फिर उन्हें पढ़ाई छोड़नी पड़ी और नाम बदलकर रहने को विवश होना पड़ा। राहुल ने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के ट्रिनिटी कॉलेज से 1995 में एमफिल किया। इसके बाद राहुल ने तीन साल तक लंदन के मॉनीटर ग्रुप के लिए काम भी किया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस दौरान राहुल ने अपनी मूल पहचान छिपाकर नौकरी की। राहुल के बैचमेट के मुताबिक वो राजनीति में नहीं आना चाहते थे लेकिन 2004 में उन्होंने पैतृक अमेठी संसदीय सीट से चुनाव जीतकर राजनीतिक पारी की शुरुआत की।

  

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