राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा समेत 7 सांसदों ने आम आदमी पार्टी छोड़ दी। यह सभी बीजेपी ज्वाइन कर चुके हैं। हालांकि राघव चड्ढा और अन्य 6 सांसदों की सदस्यता अभी नहीं जाएगी। अगर चार साल पहले राज्यसभा के सबसे युवा सदस्य के तौर पर उन्होंने जो पहला बिल पेश किया था, वह कानून बन जाता, तो राघव चड्ढा AAP छोड़कर BJP में मर्ज नहीं कर पाते।
राघव चड्ढा ने क्या मांग की थी?
असल में अगर उनका प्रस्तावित बिल लागू हो जाता, तो राघव चड्ढा को पार्टी बदलने के लिए अपनी पार्टी से 6 नहीं, बल्कि 7 सदस्यों के समर्थन की ज़रूरत होती। इसके अलावा मौजूदा टीम को पार्टी तोड़ने के लिए छह साल तक चुनाव लड़ने से रोक दिया जाता। राघव चड्ढा ने 5 अगस्त 2022 को प्राइवेट मेंबर के तौर पर संविधान (संशोधन) बिल पेश किया था। यह उनके राज्यसभा में आने के तीन महीने बाद की बात है। राघव का बिल ज़्यादा सख़्त दल-बदल विरोधी कानून की मांग करता था। उन्होंने मांग की थी कि पार्टी तोड़ने के लिए दो तिहाई नहीं बल्कि तीन चौथाई बहुमत की ज़रूरत होती।
अपने बिल के जरिए राघव चड्ढा ने विधायकों द्वारा उन्हें चुनने वाले वोटरों की लोकतांत्रिक इच्छाओं को पूरी तरह नजरअंदाज़ करते हुए गलत तरीके से पार्टी बदलने का ज़िक्र किया था। राघव चड्ढा के प्रस्तावित बिल में संविधान के दसवें शेड्यूल के लिए और कड़े नियमों के जरिए दल-बदल विरोधी नियमों को मजबूत करने की मांग की गई थी। इसमें दल-बदल के आधार पर चुने हुए प्रतिनिधियों को अयोग्य ठहराने की भी मांग की गई थी।
प्रस्तावित कानून का मकसद संविधान के आर्टिकल 102 और 191 में बदलाव करके और दसवें शेड्यूल में बदलाव करके पार्टी के लेजिस्लेटिव स्ट्रेंथ के दो तिहाई से तीन तिहाई तक करने की मांग की गई थी। उन्होंने तर्क दिया था कि इंटर पार्टी मर्जर की लिमिट बढ़ाकर हमारी डेमोक्रेसी को मजबूत करना और हमारे पब्लिक प्रतिनिधियों को पॉलिटिकल पार्टी वर्कर के बजाय जानकारी रखने वाले लॉमेकर बनने में मदद करना था।
चुनाव लड़ने से बैन करने की थी मांग
इसमें यह भी प्रस्ताव दिया गया कि अगर सांसद या विधायक चुनाव जीतने के बाद अपनी पार्टी बदलते हैं, तो उन्हें छह साल के लिए चुनाव लड़ने से बैन कर दिया जाएगा। वहीं रिसॉर्ट पॉलिटिक्स को रोकने के लिए ऐसे चुने हुए प्रतिनिधियों को सरकार से समर्थन वापस लेने के 7 दिनों के अंदर चेयर के सामने पेश होना जरूरी होगा। ऐसा न करने पर उन्हें अयोग्य घोषित किया जा सकता है।
बिल में कहा गया था, “संविधान के दसवें शेड्यूल में किसी सदन के सदस्य की ओरिजिनल पॉलिटिकल पार्टी का मर्जर तभी माना जाएगा जब संबंधित पार्टी के कम से कम तीन-चौथाई सदस्य ऐसे मर्जर के लिए सहमत हों।”
संविधान के आर्टिकल 102 (2) में कहा गया है, “अगर कोई व्यक्ति दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्य है, तो वह संसद के किसी भी सदन का सदस्य होने के लिए अयोग्य होगा। 191 (2) के अनुसार अगर कोई व्यक्ति दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्य है, तो वह राज्य की विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य होने के लिए अयोग्य होगा।”
पास नहीं हो पाया बिल
बिल में कहा गया है कि दल-बदल विरोधी कानून में विधायकों की खरीद-फरोख्त को रोकने की बात कही गई थी। हालांकि बिल अभी भी पेंडिंग है। राघव चड्ढा के ऑफिस ने द इंडियन एक्सप्रेस के कमेंट की रिक्वेस्ट का जवाब नहीं दिया।
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आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्डा ने शुक्रवार के AAP के राज्यसभा संसदीय दल का बीजेपी में विलय का ऐलान कर दिया है। राघव चड्डा ने कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर पूरा भरोसा है। पढ़ें पूरी खबर
