राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने गुरुवार को NEET पेपर लीक मुद्दे पर अपनी चुप्पी को लेकर सफाई दी। उन्होंने कहा कि पहले जब वह विपक्ष में थे, तब उनकी जिम्मेदारी सरकार से सवाल पूछने की थी। लेकिन अब सत्ता पक्ष में होने के कारण उनकी भूमिका बदल गई है। अब उनका काम सवाल उठाना नहीं बल्कि समाधान देना है।
राघव चड्ढा लोक परीक्षा (संशोधन) विधेयक, 2026 पर राज्यसभा में चर्चा के दौरान बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या का समाधान टीवी बहसों या राजनीतिक बयानबाजी से नहीं बल्कि मजबूत संस्थागत व्यवस्था से निकलेगा।
उन्होंने कहा, ”मैंने खुद से वादा किया था कि इस मुद्दे पर संसद में तभी बोलूंगा, जब हमारे पास समाधान होगा और व्यवस्था को ठीक करने का रास्ता सामने होगा। आज वह ऐतिहासिक दिन है जब सिस्टम को ठीक करने की दिशा में कदम उठाया जा रहा है।”
राघव चड्ढा ने कहा, ”कैंसर का इलाज क्रोसिन (Crocin) से नहीं होता। उसी तरह पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या का समाधान सिर्फ बयानबाजी या राजनीतिक भाषणों से नहीं हो सकता। इसके लिए मजबूत संस्थागत सुधार की जरूरत थी और आज हमने उसी दिशा में एक ठोस कदम उठाया है।”
‘पेपर लीक को राजनीति का मुद्दा न बनाएं’
चड्ढा ने कहा कि पेपर लीक को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखना चाहिए। उनके मुताबिक यह देश की परीक्षा व्यवस्था की ‘पुरानी और गंभीर बीमारी’ है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर राजनीति नहीं बल्कि जवाबदेही और नैतिकता को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि इससे फर्क नहीं पड़ना चाहिए कि पेपर लीक किस राज्य में हुआ, उस समय किस पार्टी की सरकार थी या कौन मंत्री था। सभी राजनीतिक दलों को मिलकर इस समस्या का स्थायी समाधान निकालना चाहिए।
पंजाब और कर्नाटक का भी किया जिक्र
राघव चड्ढा ने इस दौरान अपनी पूर्व पार्टी आम आदमी पार्टी (AAP) पर भी निशाना साधा। उन्होंने 19 जुलाई को पंजाब में हुई फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि परीक्षा के दौरान कुछ अभ्यर्थियों को ब्लूटूथ डिवाइस के जरिए नकल कराई गई और इसके लिए एक संगठित गिरोह ने उम्मीदवारों से 13 लाख रुपये तक वसूले।
उन्होंने यह भी दावा किया कि पंजाब में AAP सरकार बनने के बाद कई भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई हैं।
इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में इस साल जनवरी में हुई SSLC परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र कथित तौर पर 200 रुपये में बेचे गए थे।
’22 लाख छात्रों की मेहनत पर फिर जाता है पानी’
राघव चड्ढा ने कहा कि हर साल करीब 22 लाख छात्र NEET जैसी परीक्षा के लिए महीनों तक तैयारी करते हैं। परीक्षा सिर्फ तीन घंटे की होती है, लेकिन अगर प्रश्नपत्र पहले ही लीक हो जाए तो छात्रों की मेहनत, सपने, भरोसा और भविष्य एक झटके में प्रभावित हो जाता है।
उन्होंने कहा कि वह खुद चार्टर्ड अकाउंटेंसी (CA) के छात्र रह चुके हैं। इसलिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों का दर्द अच्छी तरह समझते हैं।
सभी दलों से विधेयक का समर्थन करने की अपील
चड्ढा ने कहा कि सरकार ने देश में पहली बार एंटी-पेपर लीक फ्रेमवर्क लाने की पहल की है। उन्होंने दावा किया कि छात्रों की चिंताओं को प्रधानमंत्री ने गंभीरता से सुना और परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए व्यापक कानूनी ढांचा तैयार किया गया।
उन्होंने सभी रानजनीतिक दलों से अपील करते हुए कहा कि वे इस विधेयक का समर्थन करें ताकि परीक्षा प्रणाली में छात्रों का भरोसा दोबारा कायम हो सके। इसके साथ ही मेहनत करने वाले युवाओं के हितों की रक्षा की जा सके।
अपने संबोधन के आखिर में उन्होंने कहा, ”पेपर लीक एक पुरानी बीमारी है। इसका इलाज राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप नहीं बल्कि स्थायी और मजबूत संस्थागत सुधार हैं।”
