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राफेल लड़ाकू विमान की खरीद बेहद जरूरी, विवाद के बीच वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ की रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण को चिट्ठी

एयर चीफ मार्शन बीएस धनोआ ने रक्षा मंत्री निर्मला सितारमण को एक चिट्ठी लिखी और निवेदन किया कि तमाम राजनीतिक विवादों के बावजूद फ्रांस से राफेल विमानों की खरीद नहीं रुकनी चाहिए।

राफेल डील को लेकर एयरफोर्स चीफ ने रक्षा मंत्रालय को चिट्ठी लिखी और विमानों की खरीद को जरूरी बताया. (फोटो सोर्स: एक्सप्रेस आर्काइव)

राफेल लड़ाकू विमान सौदे पर मचे राजनीतिक घमासान के बीच वायुसेना प्रमुख द्वारा रक्षा मंत्रालय को लिखी चिट्ठी चर्चा में है। इस चिट्ठी में उन्होंने राफेल डील को देश की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी बताया है। ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ के मुताबिक नवंबर के पहले सप्ताह में एयर चीफ मार्शन बीएस धनोआ ने रक्षा मंत्री निर्मला सितारमण को एक चिट्ठी लिखी और निवेदन किया कि तमाम राजनीतिक विवादों के बावजूद फ्रांस से राफेल विमानों की खरीद नहीं रुकनी चाहिए। हिंदुस्तान टाइम्स ने यह खुलासा गोपनीय सूत्र के हवाले से किया है। हालांकि, इस मामले में भारतीय वायुसेना की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

गौरतलब है कि यह मामला तब घटित हुआ है, जब सुप्रीम कोर्ट में 36 राफेल विमानों की खरीद को लेकर एक जनहित याचिका पर सुनवाई चल रही थी। हालांकि, यह याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी। जानकारी के मुताबिक एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ ने निर्मला सीतरमण को चिट्ठी लिखकर सरकार का ध्यान वायुसेना में शामिल विमानों के बेड़े की घटती सामरिक क्षमता की ओर दिलाया है। वर्तमान में पश्चिमी और उत्तरी सीमा की सुरक्षा के लिए वायुसेना को कम से कम 42 लड़ाकू विमानों के स्कॉड्रन (एक स्कॉड्रन में 14-16 लड़ाकू विमान होते हैं) की जरूरत है। जबकि, फिलहाल इसके पास 31 फाइटर स्कॉड्रन हैं और आने वाले महीनों में इनकी संख्या में और कमी आएगी।

वायु सेना प्रमुख ने अपनी चिट्ठी में 36 विमानों की खरीद को अनिवार्य बताया है। उन्होंने सुझाव दिया है कि विमानों की खरीद से पीछे नहीं हटा जाए। वर्ना, खरीद से संबंधित किसी भी तरह की अनिश्चितता का खामियाजा एयरफोर्स को भुगतना पड़ेगा। जानकारी के मुताबिक एयरफोर्स राफेल विमानों की असली कीमत सार्वजनिक करने के भी पक्ष में नहीं है। उसका मानना है कि कीमतों के आंकलन के जरिए विमान की क्षमता का अंदाजा लगाया जा सकता है। गौरतलब है कि राफेल डील को लेकर कांग्रेस लगातार बीजेपी की मोदी सरकार पर सवाल खड़े कर रही है। पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस डील में पीएम मोदी पर ऑफसेट पार्टनर के रूप में अनिल अंबानी को निजी लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया है।

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