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फ्रांस की वेबसाइट ने राफेल सौदे में जताई भ्रष्टाचार की आशंका, कांग्रेस ने की जांच की मांग तो BJP बोली- सुप्रीम कोर्ट और CAG ने सही ठहराई डील

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने पूछा- "अगर घूस दी गई है जो यह पता लगना चाहिए कि भारत सरकार में किसे पैसा दिया गया, क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब देश को जवाब देंगे?’’

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र नई दिल्ली | Updated: April 5, 2021 7:22 PM
Rafale Jets, Dassault Aviationफ्रांस की एविएशन कंपनी दसौ है राफेल की निर्माता कंपनी। (फाइल फोटो)

फ्रांस की एक न्यूज वेबसाइट ने राफेल लड़ाकू विमान सौदे में भ्रष्टाचार की आशंका जताई है। मीडिया पार्ट नाम की इस साइट ने फ्रांस की भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी AFA की रिपोर्ट के हवाले दावा किया है कि राफेल बनाने वाली कंपनी दसौ ने करीब 11 लाख यूरोज एक बिचौलिए को दिए थे। इसे लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है। पार्टी ने मांग की है कि सरकार इन आरोपों की जांच कराए। हालांकि, बाजपा ने फिर दोहराया है कि फ्रांस के साथ राफेल डील में कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ है।

क्या है पूरा मामला?: मीडिया पार्ट की खबर के मुताबिक, कंपनी के 2017 के खातों के ऑडिट में 5 लाख 8 हजार 925 यूरो (4.39 करोड़ रुपए) क्लाइंट गिफ्ट के नाम पर खर्च दर्शाए गए। मगर इतनी बड़ी धनराशि का कोई ठोस स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। मॉडल बनाने वाली कंपनी का मार्च 2017 का एक बिल ही उपलब्ध कराया गया।

AFA के पूछने पर दसौ एविएशन ने बताया कि उसने राफेल विमान के 50 मॉडल एक भारतीय कंपनी से बनवाए। इन मॉडल के लिए 20 हजार यूरो (17 लाख रुपए) प्रति विमान के हिसाब से भुगतान किया गया। हालांकि, यह मॉडल कहां और कैसे इस्तेमाल किए गए इसका कोई प्रमाण नहीं दिया गया। मीडिया पार्ट की रिपोर्ट में बताया गया है कि मॉडल बनाने का काम कथित तौर पर भारत की कंपनी डेफसिस सॉल्यूशन्स (Defsys Solutions) को दिया गया। यह कंपनी दसौ की भारत में सब-कॉन्ट्रैक्टर कंपनी है।

क्या हैं कांग्रेस के आरोप?: कांग्रेस ने इस खुलासे पर सोमवार को कहा कि राफेल विमान सौदे की निष्पक्ष और गहन जांच होनी चाहिए। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला संवाददाताओं से कहा कि फ्रांस के एक समाचार पोर्टल ने अपने नये खुलासे से कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के इस रुख को सही साबित किया है कि राफेल विमान सौदे में भ्रष्टाचार हुआ है।

उन्होंने सवाल किया, ‘‘क्या इस मामले की पूरी और स्वतंत्र जांच कराने की जरूरत नहीं है? अगर घूस दी गई है जो यह पता लगना चाहिए कि भारत सरकार में किसे पैसा दिया गया।’’कांग्रेस नेता ने यह भी पूछा, ‘‘क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब देश को जवाब देंगे?’’

सुरजेवाला ने कहा कि इस पैसे को दसौ ने ग्राहकों को उपहार पर किए गए खर्च के रूप में दिखाया है। उन्होंने कहा कि रक्षा खरीद प्रक्रिया के अनुसार, अगर किसी तरह के बिचौलिये या कमीशन का सबूत मिलता है तो फिर इसके गंभीर दंडात्मक नतीजे होंगे तथा आपूर्तिकर्ता पर प्रतिबंध, अनुबंध को रद्द करने, भारी जुर्माना लगाने और प्राथमिकी दर्ज किए जाने तक के कदम उठाए जा सकते हैं।

भाजपा ने क्या दिया जवाब?: कांग्रेस की ओर मामला उठाए जाने के बाद भाजपा ने भी इस मामले में सफाई जारी की और आरोपों को निराधार बताया। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि विपक्षी दल ने 2019 के लोकसभा चुनाव में भी इसे एक बड़ा मुद्दा बनाया था लेकिन उसे करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था।

उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के आरोप ‘‘पूरी तरह निराधार’’ है और दावा किया कि इस खरीद में वित्तीय अनियमितताओं संबंधी फ्रांस की मीडिया में छपी खबरें उस देश में ‘‘व्यावसायिक प्रतिद्वंद्विता’’ के चलते हो सकती है। उन्होंने ध्यान दिलाया कि कांग्रेस ने इस मामले को पूर्व में भी उठाया है और उच्चतम न्यायालय में भी उसकी हार हुई। यहां तक कि कैग जांच में कुछ गलत नहीं पाया गया।

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