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राफेल मामला: नरेंद्र मोदी सरकार सुप्रीम कोर्ट को नहीं दिखाना चाहती जो दस्‍तावेज, जानिए उनमें क्‍या है

‘द हिंदू’ में लिखे अपने लेख में वरिष्ठ पत्रकार एन राम ने दावा किया था कि 7.87 बिलियन यूरो के राफेल सौदे में रक्षा मंत्रालय का पीएमओ द्वारा फ्रांस के साथ “समानांतर बातचीत” पर सख्त आपत्ति थी।

rafale, rafale case, rafale deal, rafale documents, rafale documents leak, rafale narendra modiराफेल विमान सौदे के दस्‍तावेजों का आदान-प्रदान करते दोनों देशों के तत्‍कालीन रक्षा मंत्री। नेपथ्‍य में दिख रहे हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (Express Archive Photo)

सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की खंडपीठ ने बुधवार (10 अप्रैल) को सर्वसम्मति से केंद्र सरकार की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए राफेल मामले में रिव्यू पिटिशन पर नए दस्तावेज के आधार पर सुनवाई करने का आदेश दिया है। पब्लिक डोमेन में उपलब्ध इन कागजातों में राफेल डील से संबंधित कई सवाल उठाए गए हैं। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने याचिकाकर्ता यशवंत सिन्हा एवं अन्य द्वारा उपलब्ध कराए गए नए दस्तावेजों के आधार पर अदालती समीक्षा करने का फैसला किया है। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि राफेल डील में नियमों का उल्लंघन हुआ है। मशहूर अंग्रेजी अखबार ‘द हिन्दू’ में प्रकाशित कई खोजी रिपोर्ट पर भी कोर्ट विचार करेगा।

बता दें कि अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट में दावा किया गया था कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने फ्रांस से 36 राफेल विमान खरीदने के लिए पहले के 126 राफेल विमान खरीद सौदे के मुकाबले करीब 41.2 फीसदी ज्यादा कीमत चुकाई है। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया था कि एनडीए सरकार ने सौदे के तहत डिजायन एंड डेवलपमंट के लिए 1.3 बिलियन यूरो की राशि अदा करने का करार किया था। इस नॉन रेकरिंग कॉस्ट को कुल 36 राफेल विमानों पर बांट दिया गया था। अखबार के मुताबिक एक अन्य दस्तावेज से इस बात का खुलासा होता है कि राफेल बनाने वाली फ्रांसीसी कंपने दसॉ ने भारत के लिए 13 विशेष विमान संवर्द्धन के डिजायन एंड डेवलपमेंट के लिए 1.4 बिलियन यूरो की मांग की थी, इसमें भारतीय वायु सेना को हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर सपोर्ट की भी बात कही गई थी लेकिन डील 1.4 बिलियन यूरो पर तय हुई। इसका मतलब यह हुआ कि डिडायन एंड डेवलपमेंट के नाम पर प्रति एयरक्राफ्ट जो लागत साल 2007 में 11.11 मिलियन यूरो थी, वह बढ़कर 2016 में 36.11 मिलियन यूरो हो गई।

अखबार ने यह भी दावा किया था कि सरकारी दस्तावेजों से साफ होता है कि राफेल खरीद प्रक्रिया में शामिल रहे रक्षा मंत्रालय के सात बड़े अफसरों में से तीन ने फ्रांसीसी कंपनी को 36 राफेल के डिजायन एंड डेवलपमेंट मद में 1.3 बिलियन यूरो की राशि देने पर आपत्ति जताई थी। सुप्रीम कोर्ट याचिकाकर्ताओं के उस दावे पर भी सुनवाई करेगा जिसमें कहा गया है कि अगस्त 2015 से जुलाई 2016 के बीच रक्षा खरीद परिषद के पास पांच बार अलग-अलग मौकों पर 36 राफेल एयरक्राफ्ट खरीद से जुड़े प्रस्ताव भेजे गए थे।

अखबार ने सरकारी दस्तावेजों के आधार पर ये भी दावा किया था कि तत्कालीन रक्षा मंत्री और रक्षा खरीद समिति के अध्यक्ष मनोहर पर्रिकर की इस प्रक्रिया में कोई भूमिका नहीं थी। हालांकि, रक्षा खरीद समिति खरीद संबंधी फैसले लेने के लिए सक्षम थी बावजूद इसके पर्रिकर ने राफेल खरीद से संबंधित फाइलें रक्षा से संबंधित कैबिनेट कमेटी के पास भेज दी थी। एक अन्य दस्तावेज के आधार पर कहा गया है कि खरीद सौदे में एंटी करप्शन पैनाल्टी और एस्क्रो अकाउंट के जरिए पेमेंट करने से संबंधित नियमों में डील पर हस्ताक्षर होने से ऐन पहले ढील दी गई थी। अखबार ने दस्तावेजों के आधार पर यह भी खुलासा किया था कि इस डील में सीधे तौर पर पीएमओ का हस्तक्षेप था। रक्षा मंत्रालय के 24 नवंबर, 2015 के एक नोट के आधार पर यह भी कहा गया कि रक्षा मंत्रालय के अलावा दूसरी जगह से भी पैरालेल निगोशिएशन चल रहा था।

‘द हिंदू’ में लिखे अपने लेख में वरिष्ठ पत्रकार एन राम ने दावा किया था कि 7.87 बिलियन यूरो के राफेल सौदे में रक्षा मंत्रालय का पीएमओ द्वारा फ्रांस के साथ “समानांतर बातचीत” पर सख्त आपत्ति थी। पीएमओ के समानांतर बातचीत की वजह से यह सौदा काफी महंगा हो गया। एन राम ने 24 नवंबर, 2015 को लिखे रक्षा मंत्रालय की एक चिट्ठी का हवाला दिया है जिसमें तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर को पीएमओ के हस्तक्षेप के बारे में जानकारी दी गई थी। अखबार में प्रकाशित सरकारी दस्तावेज के आधार पर दावा किया गया था कि तत्कालीन रक्षा सचिव जी मोहन कुमार ने दिसंबर 2015 में राफेल सौदे के संदर्भ में तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर को एक पत्र लिखा था। पत्र में रक्षा मंत्रालय की तरफ से कहा गया था कि प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा राफेल सौदे में समानांतर बातचीत से रक्षा मंत्रालय की नेगोशिएशन टीम की कोशिशों को धक्का लग सकता है। रक्षा सचिव के इस नोटिंग पर रक्षा मंत्री ने अपने हाथों से साफ सुथरी और करसिव हैंडराइटिंग में टिप्पणी की थी।

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