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राफेल मुद्दा : CVC पहुंची कांग्रेस, कहा- एफआईआर कर सौदे से जुड़ी सभी फाइलें हो सीज

हाल ही में फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने खुलासा करते हुए बताया था कि भारत सरकार ने ही इस डील के लिए रिलायंस का नाम सुझाया था। फ्रांस्वा ओलांद के इस खुलासे के बाद कांग्रेस रफाल डील को लेकर और भी ज्यादा आक्रामक हो गई है।

कांग्रेस डेलिगेशन ने सीवीसी से की मुलाकात। (image source-ANI)

कांग्रेस रफाल डील मुद्दे पर सरकार को घेरने की योजना बना चुकी है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी जहां रफाल डील पर लगातार केन्द्र सरकार पर हमले बोल रहे हैं, वहीं कांग्रेस नेताओं का एक डेलिगेशन आज CVC (केन्द्रीय सतर्कता आयोग) (Central vigilance Commission) के दफ्तर पहुंच गया। कांग्रेस के इस डेलिगेशन में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल, आनंद शर्मा, मनीष तिवारी, रणदीप सुरजेवाला जैसे नेता शामिल थे। कांग्रेस के डेलिगेशन में शामिल आनंद शर्मा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि “उन्होंने रफाल जेट खरीद घोटाले को लेकर एक ज्ञापन सीवीसी को सौंपा है। इस ज्ञापन में हमने मांग की है कि सीवीसी संज्ञान लेकर रफाल डील से जुड़े सभी फाइल और दस्तावेज सीज करे और एक एफआईआर दर्ज करे।”

बता दें कि कांग्रेस का आरोप है कि केन्द्र की एनडीए सरकार ने, यूपीए सरकार के कार्यकाल में हुई रफाल डील में हुए सौदे से महंगी कीमत पर नई डील की है। इसके साथ ही कांग्रेस ने भारत की ओर से इस सौदे में रिलायंस को साझेदार कंपनी बनाए जाने पर भी सवाल खड़े किए। कांग्रेस का कहना है कि HAL की बजाए सौदे से कुछ दिन पहले ही बनी रिलायंस कंपनी को साझेदार बनाया गया। कांग्रेस का आरोप है कि इस डील के तहत अनिल अंबानी के स्वामित्व वाली रिलायंस को 30,000 करोड़ का फायदा पहुंचाया गया।

हाल ही में फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने खुलासा करते हुए बताया था कि भारत सरकार ने ही इस डील के लिए रिलायंस का नाम सुझाया था। फ्रांस्वा ओलांद के इस खुलासे के बाद कांग्रेस रफाल डील को लेकर और भी ज्यादा आक्रामक हो गई है। ओलांद के खुलासे के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पीएम मोदी की इस मुद्दे पर चुप्पी पर सवाल खड़े किए। राहुल गांधी ने कहा कि फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद पीएम मोदी को ‘चोर’ कह रहे हैं। हालांकि भाजपा रफाल डील को ‘चुनावी मुद्दा’ बनाने के लिए कांग्रेस की आलोचना कर रही है। वहीं अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस ग्रुप ने भी अपना और सरकार का बचाव किया है। रिलायंस का कहना है कि उसे कॉन्ट्रैक्ट दिलाने में सरकार की कोई भूमिका नहीं है।

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