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70 साल का कलंक मिटाया, अब राजधर्म निभा रहे पीएम मोदी, जम्मू-कश्मीर पर लोकसभा में बोले केंद्रीय मंत्री

केंद्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह ने कहा कि जम्मू कश्मीर में पिछले 30 वर्षो में आतंकी हिंसा के दौर में 40 हजार लोग मारे गए लेकिन कुछ लोगों को सिर्फ 2-3 परिवारों की चिंता है।

Author Updated: March 18, 2020 6:18 PM
केंद्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह ने कहा कि जम्मू कश्मीर में पिछले 30 वर्षो में आतंकी हिंसा के दौर में 40 हजार लोग मारे गए तथा अनुच्छेद 370 और 35ए को समाप्त होने के बाद आज की स्थिति में 300 से कुछ अधिक लोग ही हिरासत में हैं लेकिन कुछ लोगों को सिर्फ 2-3 परिवारों की चिंता है।

कांग्रेस सहित कुछ विपक्षी दलों ने बुधवार को लोकसभा में जम्मू कश्मीर के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती को हिरासत में रखे जाने और राज्य में इंटरनेट पर पाबंदी का विषय उठाते हुए आरोप लगाया कि पांच अगस्त के अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को समाप्त करने के सरकार के फैसले के बाद वहां सामाजिक शांति बिगड़ गयी और ऐसी स्थिति में दोनों केंद्रशासित राज्यों में आर्थिक तरक्की भी नहीं हो सकती।

वहीं केंद्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह ने कहा कि जम्मू कश्मीर में पिछले 30 वर्षो में आतंकी हिंसा के दौर में 40 हजार लोग मारे गए लेकिन कुछ लोगों को सिर्फ 2-3 परिवारों की चिंता है। भाजपा ने कहा कि इस निर्णय से 70 साल के कलंक को मिटाने के साथ वहां भारत के संविधान के प्रावधान, केंद्रीय कानून और कल्याण एवं विकास योजनाएं लागू की गई हैं और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राजधर्म एवं राष्ट्र धर्म निभाते हुए जम्मू कश्मीर के विकास का मार्ग प्रशस्त किया है।

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने जम्मू कश्मीर और लद्दाख केंद्रशासित प्रदेशों के लिए अनुदानों की मांगों पर सदन में चर्चा की शुरूआत करते हुए केंद्र सरकार पर ‘संकीर्ण सोच’ के साथ यह फैसला लेने का आरोप लगाया और कहा कि पांच अगस्त के फैसले (अनुच्छेद 370 के प्रावधान समाप्त करने) के माध्यम से सरकार ने कश्मीर की जनता को यह गलत संदेश दिया कि हमें जमीन चाहिए, अवाम नहीं।

उन्होंने मांग की कि सरकार को सदन में जम्मू कश्मीर के उन लोगों की सूची रखनी चाहिए जिन्हें अलग-अलग राज्यों की जेलों में रखा गया है। कांग्रेस सांसद ने दावा किया कि सरकार ने आज तक इस बात का संतोषजनक जवाब नहीं दिया कि तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती को एनएसए के तहत हिरासत में क्यों रखा गया? उन्होंने फारूक अब्दुल्ला को छोड़े जाने पर संतोष जताते हुए बाकी दोनों नेताओं को भी जल्द रिहा किये जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार ने जनवरी में उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद भी राज्य में पूरी तरह इंटरनेट बहाली नहीं की।

उन्होंने कहा कि क्या यह न्यायालय के फैसले की अवमानना तो नहीं? केंद्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह ने कहा कि जम्मू कश्मीर में पिछले 30 वर्षो में आतंकी हिंसा के दौर में 40 हजार लोग मारे गए तथा अनुच्छेद 370 और 35ए को समाप्त होने के बाद आज की स्थिति में 300 से कुछ अधिक लोग ही हिरासत में हैं लेकिन कुछ लोगों को सिर्फ 2-3 परिवारों की चिंता है।

उन्होंने कहा, ‘‘चिंता केवल 2-3 नामों की है। पिछले 30 वर्षो में आतंकी हिंसा के दौर में 40 हजार लोग मारे गए। क्या इन लोगों का कोई नहीं था, क्या इनकी औलाद नहीं थी, क्या इनका कोई भाई-बहन नहीं था।’’ जितेन्द्र सिंह ने कहा कि हमें यह सोचना चाहिए कि ऐसा ही रहा तो भविष्य के इतिहासकार कहीं ये नहीं कहने लगें कि हमने केवल 2-3 परिवारों की चिंता की, उन 40 हजार लोगों के बारे में नहीं सोचा जिन्होंने जान गंवायी।

भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि जम्मू कश्मीर भारत का मुकुटमणि है लेकिन आजादी के इतने दशक बाद तक वहां भारत का संविधान लागू नहीं था और भारत की संसद से पारित कानून लागू नहीं था। अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को समाप्त किये जाने का बचाव करते हुए पाल ने कहा कि इस निर्णय से सरकार ने 70 साल के कलंक को मिटाने का काम किया है और आज किसी की हिम्मत नहीं है कि जम्मू कश्मीर में कोई पाकिस्तान का झंडा फहरा सके। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए भाजपा नेता ने कहा कि पाकिस्तान इस मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र, चीन आदि के पास गया लेकिन सभी ने कहा कि यह भारत का अंदरूनी मामला है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान चुप बैठ गया लेकिन कांग्रेस अब भी इसे उठा रही है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस आज भी देश की 130 करोड़ जनता की भावना को समझने को तैयार नहीं है। जम्मू कश्मीर और लद्दाख केंद्रशासित प्रदेशों के लिये केंद्र सरकार की योजनाओं का जिक्र करते हुए जगदम्बिका पाल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि विकास का प्रभाव काफी होता है और यह बुलेट और बम पर भारी पड़ता है। उन्होंने कहा कि आज जम्मू कश्मीर में बुलेट और बम खत्म हो गये हैं और केवल विकास है।

अर्थव्यवस्था को लेकर विपक्ष के आरोपों पर उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के कारण एक स्थिति उत्पन्न हुई है। अमेरिका और यूरोप के देश जिस तरह से इस स्थिति से निपट रहे हैं, उससे बेहतर ढंग से भारत निपट रहा है। उन्होंने कहा कि इसके बाद आने वाले समय में स्थितियां बेहतर होंगी। वहीं कांग्रेस के मनीष तिवारी ने कहा कि सात महीने तक इंटरनेट पर पूरी तरह रोक के लिए आतंकवाद का हवाला नहीं दिया जा सकता। उन्होंने कहा कि पहले भी आतंकवाद की घटनाएं देश में होती रही हैं।

उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में सात महीने तक स्कूल बंद रहे और सबसे बुरा असर बच्चों और उनकी पढ़ाई पर पढ़ा। तिवारी ने जम्मू कश्मीर चैंबर आॅफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि जम्मू कश्मीर में चार महीने में 18000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि वहां सेब उत्पादन और पर्यटन उद्योग बुरी तरह बैठ गया।

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