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कांग्रेस नेता का खुलासाः शिवसेना से गठबंधन को तैयार नहीं थीं सोनिया गांधी, लिखवा कर लिया था यह वादा

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रह चुके अशोक चव्हाण ने बताया कि कांग्रेस की प्रदेश यूनिट के नेताओं ने सोनिया गांधी को यह फैसला लेने के लिए तैयार किया था। तब जाकर बीजेपी और शिवसेना के अलग-अलग होने पर सोनिया गांधी ने हाथ मिलाने को मंजूरी दी थी।

महाराष्ट्र सरकार में मंत्री अशोक चौव्हान, फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

महाराष्ट्र में शिवसेना से गठबंधन को लेकर कांग्रेस की अंदरूनी बातचीत पर पार्टी के सीनियर नेता अशोक चव्हाण (Ashok Chavan) ने बड़ा बयान दिया है। उद्धव ठाकरे की सरकार पीडब्ल्यूडी मंत्री बने चव्हाण ने खुलासा किया कि शिवसेना से गठबंधन के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी (Congress President Sonia Gandhi) तैयार नहीं थीं। इसके लिए उन्होंने शिवसेना से लिखित आश्वासन भी लिया था।

लिख के लिया था यह आश्वासनः महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रह चुके अशोक चव्हाण ने बताया कि कांग्रेस की प्रदेश यूनिट के नेताओं ने सोनिया गांधी को यह फैसला लेने के लिए तैयार किया था। तब जाकर बीजेपी और शिवसेना के अलग-अलग होने पर सोनिया गांधी ने हाथ मिलाने को मंजूरी दी थी। गठबंधन के बनने की प्रक्रिया पर चर्चा करते हुए चव्हाण ने कहा, ‘सोनिया गांधी ने प्रदेश कांग्रेस के नेताओं को शिवसेना से लिखित आश्वासन लेने के लिए कहा था कि महा विकास अघाड़ी गठबंधन संवैधानिक प्रावधानों के दायरे में काम करेगा।’

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यूं उथल-पुथल के बाद हुआ था गठबंधनः गौरतलब है कि महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव 2019 के नतीजों में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिल पाया था। बीजेपी-शिवसेना के गठबंधन को बहुमत मिला था, लेकिन मुख्यमंत्री के फॉर्मूले पर आपसी तकरार के चलते दोनों दल मिलकर सरकार नहीं बना पाए। इसके बाद काफी दिनों तक बयानबाजी और असमंजस का दौर चलता रहा। फिर एनसीपी के अजित पवार संग मिल देवेंद्र फडणवीस ने सरकार भी बनाई लेकिन कुछ ही समय में सरकार गिर गई। इसके बाद काफी टालमटोल के बाद कांग्रेस ने शिवसेना और एनसीपी के साथ मिल सरकार बनाने को मंजूरी दी।

गठबंधन में तकरार बरकरारः विरोधी विचारधाराओं के मेल से बना यह गठबंधन सरकार गठन के बाद से ही आंतरिक तकरार से जूझ रहा है। शिवसेना नेता संजय राउत की तरफ से इंदिरा गांधी और सावरकर को लेकर दिए गए बयानों पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। इसके बाद बीएमसी से जुड़े विकास कार्यों के उद्धाटन के लिए उद्धव ठाकरे के कार्यक्रम का कांग्रेस-एनसीपी के नेताओं ने बहिष्कार कर दिया था।

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