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अलीगढ़ में 25 दिसंबर को ‘घर वापसी’ के एक और कार्यक्रम का एलान

केंद्र सरकार ने आगरा में कुछ मुसलिमों के कथित तौर पर जबरन धर्मांतरण के मुद्दे पर गुरुवार को उत्तर प्रदेश सरकार से रिपोर्ट मांगी है। वहीं उत्तर प्रदेश राज्य अल्पसंख्यक आयोग ने भी आगरा के जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से इस बारे में रिपोर्ट मांगी है। इस बीच अलीगढ़ में 25 को ‘घर वापसी’ […]

Author December 12, 2014 8:38 AM
अलीगढ़ में 25 को ‘घर वापसी’ के एक और कार्यक्रम का एलान किया गया है। गैर भाजपाई दलों ने धर्मांतरण के इस कार्यक्रम पर चिंता जताई है और इसे धार्मिक आधार पर समाज को बांटने की साजिश बताया है।

केंद्र सरकार ने आगरा में कुछ मुसलिमों के कथित तौर पर जबरन धर्मांतरण के मुद्दे पर गुरुवार को उत्तर प्रदेश सरकार से रिपोर्ट मांगी है। वहीं उत्तर प्रदेश राज्य अल्पसंख्यक आयोग ने भी आगरा के जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से इस बारे में रिपोर्ट मांगी है। इस बीच अलीगढ़ में 25 को ‘घर वापसी’ के एक और कार्यक्रम का एलान किया गया है। गैर भाजपाई दलों ने धर्मांतरण के इस कार्यक्रम पर चिंता जताई है और इसे धार्मिक आधार पर समाज को बांटने की साजिश बताया है।

गृह मंत्रालय ने एक पत्र में राज्य सरकार से कहा कि वह घटना के बारे में एक विस्तृत रिपोर्ट दे कि यह धर्मांतरण जबरन कराया गया था या लोगों ने अपनी मर्जी से धर्म परिवर्तन किया था। राज्य सरकार से यह भी बताने को कहा गया है कि इस प्रक्रिया में कौन से लोग और संगठन शामिल थे। आगरा में करीब 100 लोगों के कथित तौर पर धर्मांतरण के मामले पर सरकार संसद के बाहर और भीतर विपक्ष के हमलों का सामना कर रही है। इस मामले में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की एक शाखा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।

विपक्ष के हमलों का सामना कर रही सरकार ने इस मुद्दे पर चर्चा कराने और धर्मांतरण से जुड़े संभावित कानूनों के निर्माण को लेकर अपनी सहमति जताई है। विपक्षी पार्टियों का कहना है कि यह मुद्दा बहुत गंभीर है।

उधर उत्तर प्रदेश राज्य अल्पसंख्यक आयोग ने सदस्य सुहैल अयूब ने गुरुवार को बताया, ‘आयोग ने आगरा के जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से इस सिलसिले में तीन दिन के भीतर रिपोर्ट देने को कहा है।’ उन्होंने कहा कि जमीनी हकीकत का पता लगाने के लिए आयोग के सदस्य आगरा भी जाएंगे। अयूब ने कहा कि आयोग जल्द ही आगरा जाएगा। एक या दो दिन में तारीख तय हो जाएगी।

आगरा में एक हिंदू संगठन धर्म जागरण मंच की ओर से 100 मुसलमानों का कथित जबरन धर्मांतरण कराया गया था। यह मुद्दा संसद में भी उठा है। आगरा की पुलिस ने इस संगठन और इसके उप्र संयोजक नंद किशोर के खिलाफ मंगलवार देर रात एक मामला दर्ज किया और मामले में जांच का काम शुरू किया था।

इस बीच अलीगढ़ के एक संगठन हिंदू जागरण समिति ने कहा है कि 25 दिसंबर को बड़ी संख्या में ईसाई और मुसलमानों को वापस हिंदू धर्म ग्रहण कराया जाएगा। स्थानीय भाजपा सांसद ने इस ऐलान का स्वागत किया है और कहा है कि लोगों को कोई भी धर्म चुनने का पूरा अधिकार है। संगठन के क्षेत्रीय प्रभारी राजेश्वर सिंह ने बुधवार शाम यहां संवाददताओं से कहा, ‘पूर्व में हिंदू धर्म छोड़ कर ईसाई और मुसलिम धर्म स्वीकार कर लेने वाले अनेक लोग क्रिसमस के दिन माहेश्वरी इंटर कालेज में आयोजित एक बड़े समारोह में पुन: हिंदू धर्म स्वीकार करने वाले हैं।’

सिंह ने कहा, ‘यह धर्मांतरण नहीं है। जिन लोगों को लोभ, लालच में गुमराह करके अपना धर्म बदलने के लिए प्रेरित किया गया था, उन लोगों की घर वापसी है।’ अलीगढ़ से भाजपा सांसद सतीश गौतम ने सिंह की घोषणा का स्वागत करते हुए कहा, ‘यदि लोग स्वेच्छा से शांतिपूर्वक हिन्दू धर्म पुन: स्वीकार करना चाहते हैं तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है, बल्कि यह उनका अधिकार है।’

दूसरी तरफ गैर भाजपाई दलों ने धर्मांतरण कार्यक्रम पर चिंता जताई है और इसे धार्मिक आधार पर समाज को बांटने की साजिश बताया है। विधानसभा में राष्ट्रीय लोकदल के नेता दलवीर सिंह ने कहा, ‘प्रश्न धर्मांतरण का नहीं है, बल्कि यह एक राजनीतिक दल की ओर से राजनीतिक लाभ के लिए समाज को धु्रवीकृत करने और बांटने की सोची समझी रणनीति का हिस्सा है।’ उन्होंने कहा कि शहर के सभी शांति प्रिय नागरिकों को भाजपा की इस साजिश से सावधान रहना चाहिए।

कांंग्रेस प्रवक्ता विवेक बंसल ने कहा, ‘यह मामला धर्मांतरण अथवा पुनर्धर्मांतरण का नहीं है बल्कि समाज को धार्मिक आधार पर धु्रवीकृत करने की आक्रामक रणनीति का हिस्सा है। प्रदेश सरकार की जिम्मेदारी है कि वह किसी भी तरह से शांति-व्यवस्था खराब न होने दे।’ बंसल ने कहा, ‘धर्म निजी मामला है और जब ऐसे मामलों में राजनीतिक दलों की सक्रिय भागीदारी होने लगती है, तो वह सामाजिक विद्वेष बढ़ाने का कारण बन जाती है।’

 

 

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