कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बुधवार को बैठक हुई। इसमें पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपना दुख जाहिर किया। ऐसा उन्होंने बहुत कम ही किया है। उन्होंने बैठक में मौजूद लोगों से कहा कि उन्हें इस बात का दुख है कि सीडब्ल्यूसी के कई सदस्यों ने शुद्धिकरण के मुद्दे की खुलकर निंदा नहीं की और उनका समर्थन नहीं किया।

खड़गे कुछ दिन पहले उत्तराखंड के हल्द्वानी के अपने दौरे के बाद वहां आयोजित एक शुद्धिकरण हवन का जिक्र कर रहे थे। कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया था कि शुद्धिकरण हवन आयोजित करने वाले भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हुए थे और कहा था कि यह जातिवादी मानसिकता को दिखाता है।

बीजेपी ने इस मुद्दे से खुद को किया था अलग

दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी ने इस आयोजन से खुद को अलग किया था। खड़गे ने यह मुद्दा राज्यसभा में भी उठाया था। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी किसी से दलित होने के कारण अपनी सुरक्षा करने के लिए नहीं कहा, लेकिन शुद्धिकरण कार्यक्रम ने उन्हें अपमानित महसूस कराया।

सीडब्ल्यूसी की बैठक में खड़गे ने इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात का दुख है कि सीडब्ल्यूसी के सभी सदस्य और खासकर वे लोग जिन्हें मीडिया में जगह मिलती है, इस बारे में नहीं बोले। एआईसीसी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि पार्टी ने इस मुद्दे को उठाया और इसकी निंदा की, लेकिन बैठक में मौजूद लोगों के अनुसार, खरगे के हावभाव से ऐसा लग रहा था कि वे इस बात से बिल्कुल भी सहमत नहीं थे।

खड़गे ने किसी का नाम नहीं लिया

खड़गे ने किसी का नाम नहीं लिया और कांग्रेस नेता केवल अनुमान ही लगा सकते थे कि वे किन-किन लोगों का जिक्र कर रहे थे। दरअसल, कांग्रेस अध्यक्ष ने यह बताया कि कुछ नेता पार्टी की विचारधारा के विपरीत टिप्पणियां करने और लेख लिखने के आदी हैं।

बाद में सीडब्ल्यूसी में हुई चर्चाओं के बारे में मीडिया को जानकारी देते हुए वेणुगोपाल ने शुद्धिकरण विवाद के बारे में बात की और तर्क दिया कि यह घटना पूरी तरह से अस्वीकार्य और निंदनीय थी। साथ ही आरोप लगाया कि यह बीजेपी की मानसिकता को दिखाती है।

इस बैठक में एनएसयूआई के एआईसीसी प्रभारी कन्हैया कुमार ने कॉकरोच जनता पार्टी के बारे में बात की और नेतृत्व को बताया कि पार्टी को ऐसे समूहों को राजनीतिक स्थान नहीं देना चाहिए। सूत्रों के अनुसार, पार्टी के कई सदस्य कुमार के इस विचार से सहमत हैं। पार्टी ने अब तक सीजेपी से दूरी बनाए रखी है, जबकि वह छात्र विरोध प्रदर्शनों का समर्थन कर रही है और उन्हें रोजगार के मुद्दे से जोड़ रही है।

कॉकरोच जनता पार्टी का नाम लिए बिना, सीडब्ल्यूसी की ओर से पारित प्रस्ताव में कहा गया कि छात्र समूहों और विपक्ष की एकजुटता ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया।

बैठक में लोकसभा सांसद शशि थरूर ने यह भी कहा कि भारत पर अमेरिकी दबाव के संदर्भ में ड्राफ्ट प्रस्ताव में इस्तेमाल किए गए शब्द धौंस की जगह कोई दूसरा शब्द इस्तेमाल किया जाना चाहिए। हालांकि खड़गे और अन्य लोगों का तर्क था कि धौंस शब्द असंसदीय नहीं है, लेकिन अंतिम प्रस्ताव में सिर्फ इतना कहा गया, “कांग्रेस वर्किंग कमेटी को इस बात की गहरी चिंता है कि मोदी सरकार अमेरिकी दबाव में भारत की कृषि और ऊर्जा सुरक्षा, साथ ही उसकी रणनीतिक संप्रभुता से समझौता कर रही है।”

मनीष तिवारी की बात से सहमत नहीं थे राहुल गांधी

सूत्रों के मुताबिक, छात्रों और युवाओं के विरोध-प्रदर्शनों और अपने छात्रों की गूंज कैंपेन के संदर्भ में राहुल गांधी ने फिर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब भारत का अतीत बन चुके हैं। हालांकि, सूत्रों ने बताया कि वह वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी की इस बात से सहमत नहीं थे कि आखिरी गंभीर छात्र आंदोलन 1990 के दशक में हुआ मंडल-विरोधी आंदोलन था, जिसमें 62 लोगों ने आत्मदाह कर लिया था और पुलिस फायरिंग में 100 से ज्यादा लोग मारे गए थे। राहुल ने कहा कि ‘छात्रों की गूंज’ कैंपेन एक बहुत सफल छात्र आंदोलन था। बाद में सीडब्ल्यूसी के प्रस्ताव में कहा गया कि ‘छात्रों की गूंज’ अभियान को जबरदस्त सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है।

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संसद का मानसून सत्र खत्म हो जाने के बाद बुधवार को कांग्रेस वर्किंग कमेटी की मीटिंग हुई जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बैठक की अध्यक्षता की। इस मीटिंग में सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत पार्टी के तमाम वरिष्ठ नेता शामिल हुए। इस मीटिंग के बाद मल्लिकार्जुन खड़गे ने मीडिया को संबोधित करते हुए बैठक के एजेंडे के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि बैठक में यह तय हुआ कि अब समय आ गया है युवाओं के हित में एक ठोस ‘एजुकेशन-से-एम्प्लॉयमेंट रोडमैप’ तैयार करने का। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…