पंजाब के सरकारी शिक्षक इनदिनों काफी परेशान हैं। भीषण गर्मी के बीच एक ही समय पर दो-दो जनगणना की ड्यूटी ने उन्हें हलकान कर दिया है। गर्मी के कारण उनके लिए घर-घर जाकर सर्वे करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। दरअसल, राज्य में फिलहाल दो जनगणना की जा रही है।

एक भारत सरकार की राष्ट्रीय जनगणना और दूसरी पंजाब सरकार की “ड्रग एंड सोशल-इकोनॉमिक जनगणना”। एक साथ दो जिम्मेदारियों ने राज्य के शिक्षकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई शिक्षकों का आरोप है कि उन्हें “डबल ड्यूटी” पर लगा दिया गया है यानी उनके नाम दोनों जनगणनाओं की ड्यूटी सूची में शामिल हैं।

शिक्षकों ने काम थोपने का लगाया आरोप

लुधियाना के एक शिक्षक ने कहा, “हम पहले से ही भारत सरकार की जनगणना 2027 की ड्यूटी कर रहे हैं। अब पंजाब सरकार हम पर ड्रग जनगणना भी थोप रही है। इतनी गर्मी में शिक्षकों के साथ गधों जैसा व्यवहार किया जा रहा है। हमने दोनों ड्यूटी करने से इनकार कर दिया है और अधिकारियों से कह दिया है कि हम ड्रग जनगणना में शामिल नहीं होंगे।”

पंजाब के शिक्षक पिछले कई महीनों से स्कूलों से बाहर हैं और केंद्र व राज्य सरकारों की ओर से कई गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाए जा रहे हैं। जनगणना, चुनाव आयोग के तहत मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), स्थानीय निकाय चुनाव और अब ड्रग एवं सामाजिक-आर्थिक जनगणना जैसी जिम्मेदारियों के कारण शिक्षक खुद को “बेहद परेशान” महसूस कर रहे हैं।

सरकार ने ड्यूटी अनिवार्य कर दी

उनका कहना है कि उन्हें पढ़ाने का समय ही नहीं मिल रहा जबकि वही उनका मुख्य काम है। गौरतलब है कि पंजाब सरकार की “ड्रग एंड सोशल-इकोनॉमिक जनगणना” राज्य में पहली बार कराई जा रही है, जिसका उद्देश्य राज्य में नशे की समस्या की गंभीरता का पता लगाना बताया गया है। शुरुआत में शिक्षकों से इस कार्य के लिए “स्वयंसेवक” बनने को कहा गया था और प्रति परिवार 250 रुपये देने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन पर्याप्त संख्या में लोग सामने नहीं आए, जिसके बाद कई जिलों में यह ड्यूटी अनिवार्य कर दी गई।

लुधियाना (पूर्व) के एसडीएम द्वारा शुक्रवार को जारी आदेश के अनुसार केवल लुधियाना जिले में 1,281 शिक्षकों को ड्रग जनगणना की ड्यूटी पर लगाया गया और शनिवार को प्रशिक्षण के लिए बुलाया गया। आदेश में कहा गया कि ट्रेनिंग में शामिल नहीं होने पर कार्रवाई की जाएगी। हालांकि शनिवार को लुधियाना के एससीडी कॉलेज के बाहर शिक्षकों ने जोरदार प्रदर्शन किया और डबल ड्यूटी का विरोध करते हुए ड्रग जनगणना में शामिल होने से इनकार कर दिया।

एक अन्य शिक्षक ने कहा, “राष्ट्रीय जनगणना 2027 हमारी जिम्मेदारी है और हम खुशी-खुशी कर रहे हैं। उसमें सिर्फ 30 सामान्य सवाल पूछने होते हैं। लेकिन अब पंजाब सरकार की ड्रग जनगणना में हर परिवार से 120 सवाल पूछे जाएंगे। पहले ही जनगणना और SIR के कारण हम स्कूलों से बाहर हैं, अब यह नई जिम्मेदारी थोप दी गई है। हमने डबल और ट्रिपल ड्यूटी करने से इनकार कर दिया है। सरकार जो कार्रवाई करना चाहती है, करे।”

खामियाजा शिक्षकों को भुगतना पड़ रहा

संगरूर के एक शिक्षक ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार एक तरफ कहती है कि शिक्षकों पर गैर-शैक्षणिक काम का बोझ नहीं डाला जाएगा, लेकिन दूसरी ओर उन्हें लगातार नई जिम्मेदारियां दी जा रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब राष्ट्रीय जनगणना पहले से चल रही है, तो राज्य सरकार को इसी समय ड्रग जनगणना कराने की क्या जरूरत थी। उनका आरोप था कि इस सर्वे के कई सवाल आम आदमी पार्टी सरकार की योजनाओं के प्रचार से जुड़े हैं और इसका खामियाजा शिक्षकों को भुगतना पड़ रहा है।

हालांकि, लुधियाना के एक शिक्षक संजीव कुमार ने बताया कि अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि जो शिक्षक पहले से जनगणना 2027 की ड्यूटी कर रहे हैं, उन्हें ड्रग जनगणना के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, “सोमवार तक स्थिति साफ हो जाएगी। अगर फिर भी हम पर दबाव बनाया गया, तो हम दोबारा प्रदर्शन करेंगे।”