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दलित मजदूर की 9 दिन बाद मौत, खंभे से बांधकर हुई थी पिटाई, जबरन पिलाई थी पेशाब

37 साल के दलित मजदूर जगमेल सिंह को गांव के ही दबंगों ने बंधक बनाया और उन्हें पोल से बाधकर लांठी और रॉड से पिटाई की। इसके बाद उन्हें मूत्र पीने पर मजबूर किया। लेकिन घटना के 9 दिन बाद जगमेल की मौत हो गई।

जगमेल को दंबगों ने 7 नवंबर को बुरी तरह पीटा था। (फोटो सोर्स: द इंडियन एक्सप्रेस)

पंजाब के संगरूर जिले के चंगाली गांव में एक दलित मजदूर की पिटाई के बाद मौत हो गई। 37 साल के जगमेल सिंह को गांव के ही दबंगों ने बंधक बनाकर पीटा था और उन्हें मूत्र पीने के लिए मजबूर किया था। घटना के 9 दिन बाद पीड़ित जमगेल की अस्पताल में मौत हो गई। मामले के सभी चार आरोपियों अमरजीत सिंह, उसका बेटा रिंकू और उसके दोस्त लकी तथा बिंदर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। सभी एक ही गांव के निवासी हैं। सभी आरोपी जट सिख समुदाय से ताल्लुक रखते हैं।

संगरूर के एसएसपी संदीप गर्ग ने कहा, “हमने 14 नवंबर को अमरजीत, रिंकू और लकी को गिरफ्तार किया। जबकि बिंदर को 15 नवंबर को गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ पर इन लोगों ने बताया कि पीड़ित ने उनके साथ गाली-गलौज की थी।” चारों आरोपियों पर हत्या और एससी / एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।

एफआईआर में दर्ज पुलिस को दिए बयान में जगमेल ने बताया था कि उसे 7 नवंबर को रिंकू के घर ले जाया गया और वहां उसकी पिटाई की गई। अपने बयान में जगमेल ने बताया है, “मुझे एक पोल से बांधकर दो-तीन घंटे तक रखा गया। बीता उर्फ बिंदर ने अपने हाथ में एक लाठी पकड़ रखी थी। रिंकू ने मेरी बाहें पकड़ी हुई थी। वहीं, उसके पिता एक छोटा रॉड लेकर आए। उन लोगों ने मुझे निर्दयता से खूब पीटा। जब मैंने रिंकू से पानी मांगा, तो वह बाथरूम गया और पेशाब किया और मुझे अपना मूत्र पीने के लिए मजबूर किया। एफआईआर के मुताबिक मेडिकल रिपोर्ट में पाया गया कि पीड़ित के घाव भारी हथियार से पिटने की वजह से उपजे हैं।

मृतक जगमेल की पत्नी मंजीत कौर (32) ने संडे एक्सप्रेस को बताया, “21 अक्टूबर को मेरे पति की रिंकू, बिंदर और उसके दोस्त के साथ कहा-सुनी हो गई थी। हालांकि, मामला सुलझ गया था। लेकिन, 7 नवंबर को रिंकू, बिंदर और लकी ने मेरे पति को अमजीत के घर ले गए और वहां उनकी पिटाई की।” जगमेल और मंजीत कौर का एक 15 साल का बेटा दो बेटिया जिनकी उम्र 9 और 6 साल है।

वहीं, जगमेल के भतीजे गुरदीप थांडीवाल ने कहा, “उसे पोल से बांदकर पीटा गया। रॉड और लाठी से पीटने के चलते उसके (जगमेल) पैर टूट गए थे। उसके घावों पर पेचकस से छेद किया गया। घावों पर एसिड डाले गए। जब उसने पानी मांगा तो उसे मूत्र पीने के लिए बाध्य किया गया।” जानकारी के मुताबिक जगमेल की पिटाई करने के बाद उसे उसके घर के बाहर गली में फेंक दिया गया। वह अपने घर में तीन दिनों तक रहा। लेकिन, 10 नवंबर को उसकी हालत खराब होने लगी और उसे नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। एसएसपी गर्ग ने बताया, “पुलिस को वारदात की जानकारी 10 नवंबर को मिली, जब जगमेल को अस्पताल लाया गया।”

जगमेल ने पुलिस को अपना बयान 13 नवंबर को दिया और तब मामला दर्ज हुआ। इस दौरान उसे पटियाला स्थित राजेंद्र मेडिकल कॉलेज में शिफ्ट किया गया। इसके बाद PGIMER चंडीगढ़ ले जाया गया। यहां उसके पैर शुक्रवार को काटकर अलग कर दिए गए। पीजीआई के कर्मचारियों ने बताया, “पीड़ित को 13 नवंबर को पीजीआई लाया गया। इंफेक्शन फैलने से डॉक्टर ने उसके दोनों पैरों को काट दिया। लेकिन, इस दौरान उसके अन्य अंगों में भी इंफेक्शन पहुंच गया।” गौरतलब है कि इससे पहले भी रिंकू पर जगमेल के भाई के साथ मारपीट के आरोप लगे थे। जगमेल के भाई गुरतेज सिंह ने बताया कि रिंकू ने उसके साथ भी मारपीट की थी और उसके हाथ तोड़ दिए थे। आज भी वह अपने हाथ से ठीक से काम नहीं कर पाता।

फिलहाल पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। वहीं, जिले के डीसी घनश्याम थोरी ने बताया कि ऐसे मामलों में एससी और बीसी की तरफ से पीड़ित पक्ष को 8.25 लाख रुपये की मदद दी जाती है। लेकिन, इस दौरान दलित अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाली जमीन प्रतापी संघर्ष कमेटी ने जगमेल के परिवार को 25 लाख रुपये बतौर मुआवजा देने की मांग की है। कमिटी का कहना है कि अपर-कास्ट के अन्याय के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती। अगर उनकी मांगे नहीं मानी गई तो वे रविवार को जखल-संगरूर हाईवे को जाम कर देंगे।

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