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मोगा छेड़छाड़ केस: मृतका के परिजनों की गुहार, मुआवज़ा नहीं ‘इंसाफ’ चाहिए

तेरह साल की बच्ची को जान गंवाए 48 घंटे से भी ज्यादा समय बीत चुका है, पर उसका शव शुक्रवार को भी सिविल अस्पताल में पड़ा रहा, क्योंकि उसके परिजन अभी उसके अंतिम संस्कार के लिए राजी नहीं हुए हैं।
Author May 2, 2015 12:46 pm
पिता बोले- ‘नौकरी और 20 लाख नहीं चाहिए, सुखबीर पर FIR हो’ (एक्सप्रेस फोटो)
तेरह साल की बच्ची को जान गंवाए 48 घंटे से भी ज्यादा समय बीत चुका है, पर उसका शव शुक्रवार को भी सिविल अस्पताल में पड़ा रहा, क्योंकि उसके परिजन अभी उसके अंतिम संस्कार के लिए राजी नहीं हुए हैं।
मोगा में गांव लड़िके की रहने वाली और सरकारी स्कूल में 7वीं में पढ़ती रही बच्ची को छेड़छाड़ के बाद उसकी माता के साथ आॅरबिट कंपनी की चलती बस से नीचे धक्का दे दिया गया था, जिस कारण उसकी मौत हो गई थी, जबकि माता गंभीर रूप से जख्मी हुई हैं और उनका अस्पताल में इलाज चल रहा है।
शुक्रवार को बंद कमरे में मोगा के उपायुक्त पीएस गिल, फिरोजपुर रेंज के डीआइजी अमर सिंह चहल, एसएसपी मोेगा जेएस खैरा, आइजी पीएस उमरानंगल और बच्ची के पिता सुखदेव सिंह के बीच बैठक हुई। सूत्रों का कहना है कि गुरुवार को ही इस मामले में विभिन्न श्रम व किसान संघों की गठित संयुक्त कार्रवाई समिति के कुछ सदस्यों ने भी बैठक में हिस्सा लिया था।
प्रशासन ने पीड़ित परिवार को 20 लाख रुपए के मुआवजे और एक सदस्य को सरकारी नौकरी की पेशकश की थी। मोगा के उपायुक्त पीएस गिल ने बताया कि परिवार को इस कांड की सही जांच और सभी दोषियों की धरपकड़ का भरोसा दिलाया गया पर परिजन बच्ची के शव का पोस्टमार्टम कराने पर राजी नहीं हुए। बैठक में मौजूद एक अधिकारी ने बताया, ‘शुरू में तो बच्ची के पिता दोनों बातों पर राजी हो गए थे पर बाद में उन्होंने इससे इनकार कर दिया और पोस्टमार्टम कराने से भी मना कर दिया।’
आप नेता जस्सी जसराज और पार्टी की जिला इकाई ने परिवार वालों के साथ एक और बैठक की और पिता सुखदेव सिंह ने कहा कि प्रशासन की पेशकश उन्हें मंजूर नहीं है और वे पोस्टमार्टम की मंजूरी नहीं देंगे।
इससे पहले दिन में पिता सुखदेव सिंह ने आरोप लगाया कि शुक्रवार सुबह पुलिस उन्हें अपने साथ लेकर गई थी और उसने समझौते के लिए उनके खाली कागज पर हस्ताक्षर लिए। उन्होंने बताया, ‘पुलिस वालों ने मुझ से खाली कागजों पर हस्ताक्षर करने को कहा और मैंने अंगूठे के निशान लगा दिए। पुलिस हम पर समझौते का दबाव बना रही है पर हमें इंसाफ चाहिए और जब तक इंसाफ नहीं मिलेगा, तब तक बच्ची का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे’।
उन्होंने मांग उठाई कि पुलिस ने जिन चारों आरोपियों को पकड़ा है, उन्हें उनकी पत्नी के सामने लाया जाए। एसपी मोगा एचएस पन्नू ने कहा, ‘हम बच्ची के परिवार के साथ समझौता करने में नाकाम रहे और वे शव का पोस्टमार्टम को भी तैयार नहीं। हमने उन्हें मुआवजे और सरकारी नौकरी की पेशकश की है पर वे राजी नहीं हैं’।
कांग्रेस और आम आदमी पार्टी बस छेड़खानी कांड और एक अन्य कथित सामूहिक बलात्कार मामले के खिलाफ मोगा के पास बागापुराना में अलग-अलग प्रदर्शन कर रही हैं। आप सांसद भगवंत मान ने बागापुराना के पुलिस उपाधीक्षक के कार्यालय के बाहर 500 प्रदर्शनकारियों के साथ प्रदर्शन किया। मान ने कहा कि जब उबर टैक्सी सेवा के अधिकारियों से ड्राइवर के उनकी कैब में कथित बलात्कार के सिलसिले में पूछताछ की जा सकती है तो ओरबिट एविएशन के मालिकों से क्यों नहीं पूछताछ की जा सकती।
मान ने कहा कि गोवा मामला (केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने ट्रायल रूम में सीसीटीवी कैमरे देखे थे) में जांच के सिलसिले में पूरे शीर्ष प्रबंधन को नोटिस जारी किए गए थे तो फिर इस मामले में भिन्न मापदंड क्यों अपनाया जा रहा है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा और पूर्व सांसद जगमीत बराड़ ने बागापुराना के थाने के सामने करीब 150 लोगों के धरने की अगुआई की। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में महिला संगठनों ने किशोरी से छेड़खानी व उसकी मौत को लेकर मार्च निकाला और पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और उनकी पुत्रवधू केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर के इस्तीफे की मांग की।
एक प्रदर्शनकारी ने कहा, ‘उन्हें इस घटना के लिए अवश्य ही जवाबदेह होना चाहिए। उन्हें इस्तीफा देना चाहिए’। गुरुवार को चार आरोपी गिरफ्तार किए गए और उन्हें न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी प्रतिमा महाजन की अदालत में पेश किया गया है। अदालत ने चारों को चार मई तक के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया।
फिरोजपुर रेंज के उपमहानिरीक्षक अमर सिंह चहल ने पत्रकारों को बताया कि अंतिम संस्कार के लिए किशोरी के परिवार को मनाने के लिए वे उससे मिले लेकिन परिवार अपनी बात पर कायम है। मोगा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जेएस खेहरा ने बताया कि बस छेड़खानी कांड और एक अन्य कथित सामूहिक बलात्कार मामले की भी जांच चल रही है।
हमारे कारण प्रभावित नहीं होगी जांच : बादल
अपने स्वामित्व वाली कंपनी की चलती बस से फेंके जाने के बाद एक लड़की की मौत के मामले में आलोचनाओं से घिरे पंजाब के उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने शुक्रवार को कहा कि यह सोचना बेकार की बात है कि वाहन के स्वामित्व की वजह से इस तरह की नृशंसता पर सजा नहीं दी जाएगी। कंपनी के स्वामित्व का जिक्र करते हुए बादल ने कहा कि इससे उनकी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। प्रदेश के गृह मंत्री बादल ने कहा, ‘मैं घटना को लेकर अत्यंत दुखी हूं और ज्यादा पीड़ा इसलिए भी है कि यह घटना उस बस में घटी’।
मौत के बाद जिंदा हुई राजनीति
मामले को लेकर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी अलग-अलग प्रदर्शन कर रही हैं। आप सांसद भगवंत मान ने बागापुराना के पुलिस उपाधीक्षक के कार्यालय के बाहर 500 प्रदर्शनकारियों के साथ प्रदर्शन किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा और पूर्व सांसद जगमीत बराड़ ने बागापुराना के थाने के सामने करीब 150 लोगों के धरने की अगुआई की। दिल्ली में महिला संगठनों ने मार्च निकाला और पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और उनकी पुत्रवधू केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर के इस्तीफे की मांग की।
पुलिस पर आरोप
पिता सुखदेव सिंह ने आरोप लगाया कि शुक्रवार सुबह पुलिस उन्हें अपने साथ लेकर गई थी और उसने समझौते के लिए उनके खाली कागज पर हस्ताक्षर लिए। उन्होंने बताया, ‘पुलिस वालों ने मुझ से खाली कागजों पर हस्ताक्षर करने को कहा और मैंने अंगूठे के निशान लगा दिए। पुलिस हम पर समझौते का दबाव बना रही है पर हमें इंसाफ चाहिए और जब तक इंसाफ नहीं मिलेगा, तब तक बच्ची का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे’।

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