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चौथी में पढ़ने वाली बच्ची ने पीएम नरेंद्र मोदी को लिखा खत, रेलवे की सुविधाओं को लेकर पूछे सवाल

पंजाब के फतेहाबाद जिले के गांव रत्ताखेड़ा में रहने वाली जसविंदर कौर ने पीएम को पत्र लिखा है। जसविंदर चौथी कक्षा में पढ़ती है। उसका गांव पिरथल-ललौदा रेलवे स्टेशन से करीब है। ये स्टेशन सन् 1905 में बनाया था। लेकिन आजादी के बाद भी सुविधाएं इस स्टेशन को नहीं मिल सकी हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (फाइल फोटो)

पंजाब के एक छोटे से गांव की रहने वाली लड़की ने पीएम मोदी को पत्र लिखा है। पत्र में लड़की ने अपने गांव के करीब बने रेलवे स्टेशन पर आधारभूत सुविधाएं न होने का मामला उठाया है। ये रेलवे स्टेशन अंग्रेजों ने बनाया था। हर महीने इस रेलवे स्टेशन से करीब 8 हजार लोग यात्रा करते हैं। लेकिन न तो स्टेशन पर शौचालय है और न ही पानी की टंकी। दरअसल पंजाब के फतेहाबाद जिले के गांव रत्ताखेड़ा में रहने वाली जसविंदर कौर ने पीएम को पत्र लिखा है। जसविंदर चौथी कक्षा में पढ़ती है। उसका गांव पिरथल-ललौदा रेलवे स्टेशन से करीब है। ये स्टेशन अंग्रेजों ने हिसार-लुधियाना रेलवे लाइन पर सन् 1905 में बनाया था। लेकिन आजादी के इतने सालों बाद भी आधारभूत सुविधाएं इस स्टेशन को नहीं मिल सकी हैं।

जसविंदर ने अपने पत्र में पीएम मोदी को बताया है कि रेलवे स्टेशन पर पेयजल की व्यवस्था बेहद खराब है। पानी की टंकी जर्जर हालत में है। टंकी में नल भी नहीं लगे हैं। हैंडपंप खराब हो चुके हैं, उनकी मरम्मत भी रेलवे के अधिकारी नहीं करवाते हैं। गर्मी से परेशान मुसाफिर अपना पानी साथ लेकर चलते हैं। अगर प्यास लगे तो पानी का भी कोई इंतजाम नहीं है। स्टेशन पर शौचालय की भी व्यवस्था नहीं है। शौचालय न होने का सबसे ज्यादा खामियाजा महिलाओं को उठाना पड़ता है।

ऐसा नहीं है कि उपेक्षा का शिकार हुआ पिरथल-ललौदा स्टेशन बेचिराग है। इस स्टेशन से हर महीने करीब 8000 यात्री यात्रा करते हैं। इससे रेलवे को हर महीने 2 लाख रुपये का मुनाफा होता है। इसके बावजूद स्टेशन के आसपास के रास्ते और लिंक सड़कों की हालत ठीक नहीं है। सड़कों पर स्ट्रीट लाइट न होने के कारण ये इलाका यात्रियों के लिए सुरक्षित नहीं है। कभी भी वारदात होने की आशंका बनी ही रहती है। रेलवे स्टेशन तक जाने के लिए कोई रास्ता भी नहीं है। इसलिए यात्री रेलवे लाइन को पार करके ही जाते हैं। इससे हर वक्त दुर्घटना का खतरा बना रहता है।

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