ताज़ा खबर
 

सुमेध सिंह सैनीः कभी थे DGP, अब बन गए ‘मोस्ट वॉन्टेड’, छह पुलिस टीमें लगी हैं तलाश में

सुमेध सिंह सैनी को यकीन था कि उन पर हमला करने वाले आतंकी देविंदर सिंह भुल्लर के ठिकाने के बारे में मुल्तानी को पता था। भुल्लर फिलहाल 1993 के दिल्ली बम ब्लास्ट मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है।

Author Translated By नितिन गौतम चंडीगढ़ | Updated: September 14, 2020 8:19 AM
sumedh singh saini punjab punjab policeपंजाब के पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है। (वीडियो ग्रैब इमेज/यूट्यूब)

शनिवार को मोहाली कोर्ट ने पंजाब के पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया। बता दें कि बीते 17 दिनों से सुमेध सिंह सैनी फरार हैं। 1982 बैच के आईपीएस अधिकारी को जेड प्लस सिक्योरिटी मिली हुई थी और वह उस सिक्योरिटी को भी छोड़कर फरार हो गए हैं। एक 29 वर्षीय युवक की हत्या के आरोप में सुमेध सिंह सैनी वांछित हैं।

पंजाब में आतंक के दौर में सुमेध सिंह सैनी की पहचान एक सख्त पुलिस अधिकारी के तौर पर थी। साल 1991 में सैनी चंडीगढ़ के एसएसपी थे, जब उन पर एक जूनियर इंजीनियर बलवंत सिंह मुल्तानी की हत्या का आरोप लगा। बलवंत सिंह मुल्तानी भी उस समय के एक आईएएस अफसर के बेटे थे। साल 1991 में सैनी को निशाना बनाते हुए एक आतंकी हमला हुआ था, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हुए थे और तीन पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे।

पुलिस की चार्जशीट के अनुसार, सुमेध सिंह सैनी को यकीन था कि उन पर हमला करने वाले आतंकी देविंदर सिंह भुल्लर के ठिकाने के बारे में मुल्तानी को पता था। भुल्लर फिलहाल 1993 के दिल्ली बम ब्लास्ट मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है।

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि सैनी को गिरफ्तार नहीं किया जाता है तो वह जांच को प्रभावित कर सकते हैं। शनिवार को मोहाली की एक अदालत ने सैनी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करते हुए पुलिस को निर्देश दिए कि वह सैनी को 25 सितंबर से पहले कोर्ट के सामने पेश करे। वहीं अग्रिम जमानत के लिए सैनी ने 10 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।

साल 2012 में पंजाब के तत्कालीन सीएम प्रकाश सिंह बादल ने सुमेध सिंह सैनी को राज्य का डीजीपी नियुक्त किया था। बताया जाता है कि पंजाब में आतंकवाद के दौर में तत्कालीन सीएम बेअंत सिंह ने सुमेध सिंह सैनी और उस वक्त के डीजीपी केपीएस गिल को ‘फ्री हैंड’ दिया था। जिसके बाद सुमेध सिंह पर आतंकवाद को खत्म के लिए कई बार न्यायिक प्रणाली से बाहर जाकर काम करने के भी आरोप लगे थे।

सुमेध सिंह को जब डीजीपी नियुक्त किया गया था तो अकाली दल और भाजपा की सरकार ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ अपील भी की थी, जिसमें मुल्तानी के गायब होने की जांच करने के निर्देश दिए थे। अपनी अपील में सरकार ने सुमेध सिंह सैनी का बचाव किया था।

अकाली दल की सरकार ने चार वरिष्ठ अधिकारियों के ऊपर सुमेध सिंह को तरजीह दी और उन्हें डीजीपी बनाया लेकिन साल 2015 में बरगारी में गुरु ग्रंथ साहिब के कथित अपमान के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस की गोलीबारी में दो लोगों की मौत के बाद उन्हें अपना पद छोड़ना पड़ा था।

फिलहाल मुल्तानी मामले में पुलिस की 6 टीम सुमेध सिंह की तलाश में जुटी हैं। इन 6 में से हर टीम का नेतृत्व डीएसपी लेवल के अधिकारी द्वारा किया जा रहा है। पुलिस की ये टीमें चंडीगढ़, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली में सुमेध सिंह की तलाश में छापेमारी कर चुकी हैं।

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 दिल्ली दंगा केसः उमर खालिद को 10 दिन की पुलिस रिमांड
2 दिल्ली मेरी दिल्ली
3 स्मृति शेष डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह: ताउम्र जमीन से जुड़े रहे, बेबाकी से कही अपनी बात
ये पढ़ा क्या?
X