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वैचारिक मतभेद को किनारे रख कृषि बिलों के खिलाफ आंदोलन में उतरे 31 किसान संगठन

पंजाब में अजमेर सिंह लोंगोवाल भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष थे। 1990 के शुरुआती दशक तक यह पंजाब का अकेला सबसे बड़ा किसान संगठन था। इसके साथ ही वाम विचारधारा वाले किसान संगठन भी थे।

Punjab, BKU, Longowal, farmer orgnisation, CM Amrinder Singh,शिअद ने भी कहा है कि वे कृषि विधेयकों के खिलाफ 25 सितंबर को पंजाब में ‘चक्का जाम’ करेंगे। (फाइल फोटो)

संसद की तरफ से पारित किए गए कृषि बिल को लेकर पंजाब में विरोध प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहा है। पंजाब में कृषि को लेकर विरोध प्रदर्शन कोई नई बात नहीं है लेकिन किसान यूनियन के इतिहास में यह पहली बार है कि सभी छोटे और बड़े किसान संगठन आपसी वैचारिक मतभेद को किनारे कर केंद्र सरकार की तरफ से पारित किए गए तीन कृषि बिलों का एकजुट होकर विरोध करेंगे।

इन बिलों के खिलाफ अलग-अलग विचारधारा वाले 31 किसान संगठनों ने 25 सितंबर को साझा रूप से पंजाब बंद करने का आह्वान किया है। इन संगठनों में 18 संगठन (जिसमें 10 बड़े नाम) संगठित समूह हैं। ये ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर पर पदाधिकारियों की नियुक्ति के लिए उचित तरीकों से चुनाव आयोजित कराते हैं। इन संगठनों का बड़ा आधार है और इनकी ग्रामीण स्तर पर इकाइयां भी हैं। इन संगठनों की सदस्यता 10 हजार से लेकर राज्य स्तर पर करीब एक लाख के आसपास है।

वहीं, इनमें से दर्जन भर छोटे संगठनों वर्तमान में एक या दो जिलों तक ही सीमित हैं। इनके सदस्यों की संख्या 100 के करीब है। रोचक बात है कि इनमें से कई किसान संगठन मशहूर किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व वाले भारतीय किसान यूनियन से अलग हो कर बने हैं। पंजाब में अजमेर सिंह लोंगोवाल भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष थे।

1990 के शुरुआती दशक तक यह पंजाब का अकेला सबसे बड़ा किसान संगठन था। इसके साथ ही वाम विचारधारा वाले किसान संगठन भी थे। 1990 के दशक में कुछ भाकियू नेता राजनीति की तरफ मुड़ गए। वैचारिक मतभेदों के कारण संगठन में टूट हो गई। भाकियू डाकौंडा के महासचिव जगमोहन सिंह ने कहा कि 1990 के दशक की शुरुआत में किसान नेता पिशूरा सिंह ने भाकियू से अलग होकर पहला संगठन भाकियू एकता बनाया। साल 2002 में भाकियू उग्राहण बना इसके बाद करीब 15 साल पहले भाकियू डाकौंडा का गठन हुआ।

भाजपा की पुरानी सहयोगी पार्टी शिरोमणि अकाली दल ने घोषणा की है कि वे संसद से पारित कृषि विधेयकों के खिलाफ 25 सितंबर को पंजाब में ‘चक्का जाम’ करेंगे। पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने हालांकि अकाली दल के फैसले को किसानों की भावनाओं का “शोषण” करने का एक और “बेशर्म प्रयास” करार देते हुए कहा कि संभवत: यह केंद्र सरकार के इशारे पर किसानों की लड़ाई को “नुकसान” पहुंचाने का एक प्रयास भी हो सकता है।

कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक 2020 तथा कृषक (सशक्तीकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक, 2020, रविवार को राज्य सभा में विपक्षी सदस्यों के विरोध के बीच पारित हो गया। ये विधेयक पिछले सप्ताह बृहस्पतिवार को लोकसभा से पारित हुए थे। राज्य सभा ने रविवार को आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक 2020 को मंजूरी दी।

इसके अलावा किसान उत्पादन व्यापार एवं वाणिज्य (प्रोत्साहन एवं सुविधा) विधेयक 2020 तथा किसान (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) मूल्य आश्वासन का समझौता एवं कृषि सेवा विधेयक 2020 को भी मंजूरी प्रदान की। इन विधेयकों को पिछले हफ्ते लोकसभा पारित कर चुकी है।

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