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डॉक्टर और एनजीओ की लापरवाही ने छीनी आंखों की रोशनी

गुरुदासपुर के पास एक एनजीओ की ओर से लगवाए गए नेत्र शिविर में तकरीबन 33 लोगों की आंखों की रोशनी जाने की बात प्रशासन ने मानी है। लेकिन शुक्रवार को प्राथमिक जांच के बाद पता चलता है कि इस मामले में सारी लापरवाही आॅपरेशन करने वाले डॉक्टर, स्वयंसेवी संस्था की है। शिविर में चिकित्सा सुविधा […]

Author December 6, 2014 9:13 AM
नेत्र चिकित्सा शिविर में अपनी आंखें गंवा चुके बुजुर्ग शुक्रवार को अमृतसर में।

गुरुदासपुर के पास एक एनजीओ की ओर से लगवाए गए नेत्र शिविर में तकरीबन 33 लोगों की आंखों की रोशनी जाने की बात प्रशासन ने मानी है। लेकिन शुक्रवार को प्राथमिक जांच के बाद पता चलता है कि इस मामले में सारी लापरवाही आॅपरेशन करने वाले डॉक्टर, स्वयंसेवी संस्था की है। शिविर में चिकित्सा सुविधा भी बदतर थी। गुरुदासपुर से 25 किलोमीटर दूर घुम्मन में गुरु नानक मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल में 31 अक्तूबर से चार नंवबर के बीच 157 लोगों की आंखों का मोतियाबंद आॅपरेशन किया गया था। इनमें से 33 लोगों की आंखों की रोशनी चली गई है। हालांकि अपुष्ट सूत्रों ने यह संख्या 60 बताई है।

इस बीच पुलिस ने शुक्रवार को उस डॉक्टर को गिरफ्तार कर लिया, जिसने गुरदासपुर में लोगों की आंखों में मोतियाबिंद की शल्य चिकित्सा की थी। इसके अलावा, एक निजी अस्पताल और गुरदासपुर में नेत्र जांच शिविर लगाने वाली मथुरा की एक गैर-सरकारी संस्था के खिलाफ भी मामला दर्ज कर लिया गया है। उधर केंद्र सरकार ने करीब 60 लोगों की आंखों की रोशनी चले जाने के मामले में पंजाब सरकार से रिपोर्ट मांगी है। गुरदासपुर में घटी इस घटना की पंजाब सरकार ने उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।

गुरादासपुर से मिली खबर के अनुसार, मरीजों के ऑपरेशन के दौरान लापरवाही बरती गई। नियम के अनुसार एक डॉक्टर दिन में 25 से ज्यादा मोतियाबंद ऑपरेशन नहीं कर सकता। लेकिन डॉ विवेक अरोड़ा ने इसका पालन नहीं किया, और एक दिन में 49 आॅपरेशन किए गए। ऑपरेशन के दौरान जरूरी थिएटर की सुविधा नहीं थी और हर तरह के ऑपरेशन में इस्तेमाल होने वाले थिएटर का प्रयोग किया गया। सूत्रों का कहना है कि मोतियाबिंद शिविर लगाने के पहले आयोजकों ने जिला प्रशासन से भी कोई इजाजत नहीं ली थी।

इस मामले को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी गंभीरता से लिया है। मीडिया की खबरों का खुद संज्ञान लेते हुए आयोग ने सूबे के मुख्य सचिव, स्वास्थ्य सचिव और गुरदासपुर के कलेक्टर से इस मामले में दो हफ्ते के भीतर विस्तृत ब्योरा तलब किया है। आयोग ने पहली नजर में इसे गंभीर मामला मानते हुए कहा है कि अगर खबर के तथ्य वाकई सही हैं तो यह पीड़ित लोगों के मानवाधिकार हनन का गंभीर मामला बनता है। यह शिविर मोतियाबिंद के मुफ्त आपरेशन के नाम पर लगाया गया था।

गुरदासपुर के उपायुक्त अभिनव त्रिखा ने बताया कि जलंधर में नेत्र चिकित्सा केंद्र के डा विवेक अरोड़ा के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया है। शिविर के आयोजक मनजीत सिंह को भी पकड़ा गया है।

नई दिल्ली में पत्रकारों से चर्चा में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा, ‘हमने पंजाब सरकार से रपट देने को कह दिया है। पर जैसा कि हमें बताया गया है कि चूंकि यह नेत्र जांच शिविर किसी गैर-सरकारी संस्था की ओर से लगाया गया था और उसके लिए प्रदेश सरकार से कोई पूर्वानुमति भी नहीं ली गई थी, हम इस संदर्भ में पूरा ब्योरा खंगाल रहे हैं।’

नड्डा ने संसद भवन परिसर में संवाददाताओं को बताया, ‘हमने पंजाब सरकार से रिपोर्ट मांगी है क्योंकि हमें बताया गया है कि ये ऑपरेशन किसी एनजीओ ने करवाए और उसके पास इसके लिए राज्य सरकार की मंजूरी नहीं थी। हम इसकी विस्तृत जानकारी हासिल कर रहे हैं।’ उन्होंने बताया कि राज्य सरकार अगर मदद मांगती है तो केंद्र सरकार इस मामले में राज्य सरकार की मदद करने को तैयार है।

गुरुवार को यह जानकारी मिली थी कि 60 साल की उम्र से अधिक के कम से कम 60 लोगों ने गुरदासपुर के घुम्मन गांव में आयोजित शिविर में अपनी आंखों का ऑपरेशन करवाया था और इन सभी की आंखों की रोशनी चली गई। इन सभी की माली हालत अच्छी नहीं है। इनमें से 16 अमृतसर के गांवों से ताल्लुक रखते हैं जबकि बाकी गुरदासपुर जिले से हैं।

इस बीच, पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। बादल ने स्वास्थ्य विभाग के मुख्य सचिव विनी महाजन से इस दुर्भाग्यपूर्ण हादसे के सभी पहलुओं की निजी तौर पर जांच करने को कहा है।

राज्य सरकार ने बिना आला चिकित्सा अधिकारी की अनुमति के ऐसे किसी भी स्वास्थ्य जांच शिविर लगाने पर रोक लगा दी है। एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री बादल ने प्रधान स्वास्थ्य सचिव विनी महाजन को गुरदासपुर में घटित बेहद दुर्भाग्यपूर्ण त्रासदी की सभी पहलुओं से जांच के आदेश दे दिए हैं। उन्होंने महाजन को खुद मौके पर पहुंचकर प्रभावितों और उनके परिवारों के लिए राहत कार्यों की निगरानी करने और वहां उपजे हालात का जायजा लेने के भी आदेश दे दिए हैं। मुख्यमंत्री ने प्रत्येक पीड़ित परिवार के सदस्य को एक लाख रुपए की फौरी राहत की भी घोषणा कर दी है।

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