अगले साल की शुरुआत में होने जा रहे पंजाब विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने अकेले मैदान में उतरने का ऐलान किया है। दूसरी तरफ, अकाली दल बीजेपी के साथ गठबंधन के लिए बातचीत में जुटा है। बीजेपी के सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने के ऐलान के एक दिन बाद मंगलवार को पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बी.एल. संतोष ने राज्य इकाई के लिए बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने का एक्शन प्लान तैयार किया।

पंजाब दौरे के दूसरे दिन, संतोष ने सत्ताधारी आम आदमी पार्टी की लीडरशिप पर निशाना साधते हुए कहा, “जो नेता दिल्ली में चुनाव हार गए थे, वे अब पंजाब चला रहे हैं, जिसकी वजह से राज्य का विकास रुक गया है। पंजाब के इंडस्ट्रियल सेक्टर से बड़े पैमाने पर पलायन हो रहा है। इसके उलट, बीजेपी शासित उत्तर प्रदेश और बिहार में विकास और तरक्की हो रही है।”

संतोष लुधियाना में राज्य बीजेपी की जोनल मीटिंग को संबोधित कर रहे थे, जिसमें लुधियाना, खन्ना, जगरांव, मोगा, रोपड़ और मलेरकोटला जिलों के पार्टी नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। उन्होंने कहा, “आम आदमी पार्टी को पंजाब से बाहर करना और राज्य को बचाना बीजेपी का संकल्प है।”

भले ही संतोष ने आने वाले पंजाब चुनावों में बीजेपी के अकेले लड़ने की बात कही हो, लेकिन पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि सुखबीर बादल की अगुवाई वाली शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) के साथ गठबंधन के लिए पार्टी की अंदरूनी बातचीत जारी है।

दोनों पक्षों के आपसी हित और मजबूरियां भी हैं

बीजेपी के एक सीनियर नेता ने कहा, “दोनों पार्टियों के बीच अलग-अलग स्तरों पर बातचीत हो रही है, लेकिन अभी तक बड़े नेताओं के बीच बातचीत नहीं हुई है। हम किसी समझौते पर पहुंचने के बाद ही औपचारिक चुनावी गठबंधन का ऐलान कर सकते हैं।” नेता ने कहा, “दोनों पक्षों के आपसी हित और मजबूरियां एक मजबूत गठबंधन बनाने की कोशिशों की वजह बन सकती हैं।”

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने बताया कि अकाली दल, जो अपने सपोर्ट बेस में भारी कमी और अंदरूनी बगावत जैसी कई चुनौतियों से जूझ रहा है, बीजेपी के साथ गठबंधन करने के लिए “बेताब” है। वहीं, बीजेपी भी इस बात को अच्छी तरह समझती है कि “वह एक मजबूत साथी के बिना सीमावर्ती राज्य में सत्ता हासिल नहीं कर सकती”।

कई संकटों का सामना कर रहे बादल परिवार के बारे में कहा जा रहा है कि वे फिर से बीजेपी के साथ हाथ मिलाने के लिए “उत्साहित” हैं। बीजेपी के एक नेता ने कहा, “अपनी पार्टी में बढ़ती बेचैनी के बीच, सुखबीर बादल सचमुच बीजेपी के साथ गठबंधन चाहते हैं। 2027 के चुनावों में अकेले लड़ना उनकी पार्टी और उसके भविष्य के लिए तबाही जैसा होगा।”

बीजेपी सूत्रों के मुताबिक, खडूर साहिब के सांसद और अकाली दल (वारिस पंजाब दे) के प्रमुख अमृतपाल सिंह का उभार भी बादल परिवार के लिए एक चुनौती बन गया है। अमृतपाल सिंह अभी असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद हैं। माना जा रहा है कि पंथिक वोटों का एक बड़ा हिस्सा, जो अकाली दल का मुख्य आधार है, उनकी तरफ जा सकता है।

बीजेपी और अकाली दल के बीच फिर से गठबंधन की चर्चा इस महीने की शुरुआत में तब और तेज हो गई, जब सुखबीर ने संसद के हाल ही में खत्म हुए मॉनसून सत्र के दौरान दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की।

बीजेपी सूत्रों ने माना कि गठबंधन के सवाल पर पार्टी के अंदर मतभेद हैं। पार्टी का एक धड़ा तर्क दे रहा है कि इससे बीजेपी को कोई फायदा नहीं होगा क्योंकि “अकाली वोट बीजेपी को ट्रांसफर होने की संभावना नहीं है”। एक बीजेपी नेता ने कहा, “अगर हम गठबंधन भी कर लेते हैं, तो भी चुनाव की तैयारी कर रहे अकाली नेताओं का एक गुट उन सीटों पर कट्टरपंथी अकाली दल (वारिस पंजाब दे) में शामिल हो सकता है जो एसएडी बीजेपी को देगी। अगर बीजेपी अकेले चुनाव लड़ती है, तो हम 25 से ज्यादा सीटें जीत सकते हैं – लोकसभा चुनावों में हम लगभग 30 सीटों पर मजबूत स्थिति में थे।”

हालांकि एसएडी का लोकसभा में सिर्फ एक सांसद – हरसिमरत कौर बादल – है, फिर भी बीजेपी उनका समर्थन चाहती है। मोदी सरकार महिला आरक्षण कानून को 2029 तक लागू करने के लिए एक नया संवैधानिक संशोधन बिल और लोकसभा में सांसदों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने के लिए परिसीमन बिल पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिश कर रही है – ये दोनों बिल अप्रैल के विशेष सत्र में निचले सदन में गिर गए थे।

पार्टी के एक सूत्र ने कहा, “बीजेपी परिसीमन से जुड़े संवैधानिक संशोधन बिल के लिए एसएडी का समर्थन चाहेगी। हमारे सुधारों के प्रयासों के लिए हर वोट मायने रखता है।”

हरसिमरत ने अब तक सदन में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए और कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष, दोनों से बराबर दूरी बनाए रखी है।

बीजेपी के सबसे पुराने सहयोगियों में से एक, एसएडी ने सितंबर 2020 में किसानों के आंदोलन के दौरान एनडीए और मोदी सरकार, दोनों का साथ छोड़ दिया था। यह आंदोलन केंद्र के उन कृषि कानूनों के खिलाफ था जिन्हें अब रद्द कर दिया गया है।

अकाली दल और बीजेपी ने पंजाब में 2022 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव अलग-अलग लड़े थे, और दोनों ही पार्टियों को इनमें हार का सामना करना पड़ा था।

बीजेपी की रणनीति

लुधियाना में पार्टी की जोनल बैठक के दौरान, पंजाब बीजेपी के एक नेता ने बताया कि संतोष ने विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी के लिए एक रोडमैप तैयार किया है। नेता ने कहा, “हर बूथ को मजबूत करने पर ध्यान दिया गया। अगर किसी बूथ में 50 परिवार हैं, तो कार्यकर्ताओं से कहा गया है कि वे हर परिवार तक पहुंचें और उन्हें पीएम मोदी की उपलब्धियों के बारे में बताएं।”

बीजेपी सूत्रों ने बताया कि राज्य के नेताओं से डेटा का इस्तेमाल करने और पार्टी-शासित हरियाणा और आम आदमी पार्टी-शासित पंजाब के कामकाज की तुलना करने के लिए कहा गया।

लुधियाना बैठक में शामिल हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री रवनीत बिट्टू ने कहा, “बूथ को मजबूत करना चुनाव जीतने का आधार है। संतोष जी ने हमें नवंबर तक का एक प्रोग्राम दिया है और हम 2027 में अकेले चुनाव लड़ेंगे।”

राज्य बीजेपी के प्रवक्ता प्रीतपाल सिंह बलियावाल ने कहा, “अभी तक पार्टी ने 15,000 से ज्यादा बूथों के लिए कमेटियां बना ली हैं। हम बाकी 10,000 बूथों के लिए यह काम 30 सितंबर तक पूरा कर लेंगे। मंडल (सर्कल) और सब-सर्कल स्तर पर टीमों को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। अब हम चुनावी मोड में हैं।”

बिट्टू ने कहा: “पार्टी ‘मन की बात’ जैसे प्रोग्रामों से लोगों को जोड़ने और प्रधानमंत्री आवास योजना, पीएम किसान और आयुष्मान भारत जैसी केंद्रीय योजनाओं के फायदों के बारे में बताने पर भी ध्यान देगी। बीजेपी की चुनावी रैलियां 15 सितंबर से शुरू होंगी, जिसके बाद पूरे पंजाब में ‘नशा मुक्ति यात्रा’ निकाली जाएगी।”

सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के भी इस यात्रा में शामिल होने की संभावना है। बिट्टू ने दावा किया, “बीजेपी ने पंजाब के ग्रामीण और शहरी, दोनों इलाकों में सर्वे किए हैं। एक बात जो साफ तौर पर सामने आई है, वह यह है कि लोग बदलाव चाहते हैं और इस बार बीजेपी ही वह बदलाव लाएगी।”

बीजेपी-एसएडी गठबंधन के सवाल पर राज्य के एक बीजेपी नेता ने कहा, “गठबंधन के दरवाजे हमेशा खुले हैं, लेकिन अभी हम अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। हर बूथ, मंडल और जिले में जो बड़े पैमाने पर कार्यक्रम की योजना बनाई जा रही है, उसे देखिए।” पंजाब के लिए बीजेपी के नए नियुक्त राष्ट्रीय महासचिव सतीश पूनिया के अगले हफ्ते पंजाब का दौरा करने की संभावना है।

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पंजाब की राजनीति में इस बार ऊंट किस करवट बैठेगा, यह अनुमान लगाना बेहद मुश्किल है। ‘सियासत पंजाब दी’ में आज तकरीबन हर पार्टी की रणनीति की तरफ इशारा करने वाला अपडेट हैं। असम की जेल में बंद खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह के पिता ने ऐलान किया है कि उनका बेटा ही विधानसभा चुनाव में परिवार की तरफ से इकलौता उम्मीदवार होगा। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक