पिछले शुक्रवार को संसद परिसर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के बीच एक मुलाकात हुई। इस’सौहार्दपूर्ण’ मुलाकात के बाद पंजाब में भाजपा और उसके पूर्व सहयोगी शिरोमणि अकाली दल के बीच फिर से गठबंधन की अटकलें तेज हो गई हैं।

हालांकि इस मुलाकात ने पंजाब की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। लेकिन अभी तक किसी भी पक्ष की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दल वास्तव में फिर से गठबंधन की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं या नहीं।

करीब 10 मिनट तक चली यह मुलाकात इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि यह संसद परिसर में खुले तौर पर हुई। इससे पहले दोनों दलों के बीच हुई बैठकें बंद कमरे में होती थीं जो 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले गठबंधन वार्ता टूटने से पहले आयोजित की गई थीं।

शिरोमणि अकाली दल के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ”प्रधानजी (सुखबीर सिंह बादल) ने लंबे समय बाद प्रधानमंत्री से मुलाकात की है। ऐसे में अगर लोग अटकलें लगा रहे हैं तो हम इस पर क्या कह सकते है? चूंकि यह मुलाकात सार्वजनिक तौर पर हुई, इसलिए चर्चाओं ने और जोड़ पकड़ लिया है।”

2024 में नहीं हो पाया था गठबंधन

2024 के लोकसभा चुनाव से पहले सीट बंटवारे को लेकर दोनों दलों के बीच मतभेद सामने आए थे। भाजपा पंजाब की 13 लोकसभा सीटों में से पांच सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती थी जबकि अकाली दल कथित तौर पर चार सीटें देने को तैयार था। इसी विवाद के चलते दोनों के बीच गठबंधन नहीं हो पाया था।

बादल और मोदी की मुलाकात के अगले ही दिन अकाली दल ने महिला आरक्षण विधेयक को जल्द लागू करने और निष्पक्ष एवं समान परिसीमन (Delimitation) कराने की मांग की। इससे दोनों दलों के फिर से करीब आने की चर्चाओं को और बल मिला।

अकाली दल के इस रुख का केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने सोशल मीडिया पर स्वागत किया। हालांकि आम आदमी पार्टी (AAP), कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने इसकी आलोचना की।

वहीं पंजाब भाजपा के महासचिव अनिल सरीन ने गठबंधन को लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया। उन्होंने कहा, ”मुलाकात में क्या चर्चा हुई, यह स्पष्ट नहीं है। लेकिन जिस तरह अकाली दल ने महिला आरक्षण और परिसीमन का समर्थन किया है, उससे लगता है कि बैठक में इन दोनों मुद्दों पर चर्चा हुई होगी।” उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है।

क्या साथ आएंगे BJP-SAD

भाजपा के नेताओं का निजी तौर पर मानना है कि अगर शिरोमणि अकाली दल (SAD) के साथ दोबारा गठबंधन होता भी है तो उसका स्वरूप 2020 से पहले जैसा नहीं होगा। कृषि कानूनों को लेकर दोनों दलों का गठबंधन टूटने से पहले सीट बंटवारे के तहत भाजपा 117 में से 23 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ती थी जबकि अकाली दल 94 सीटों पर उम्मीदवार उतारता था। भाजपा के एक सूत्र ने कहा, ”पंजाब में भाजपा अब छोटे भाई की भूमिका नहीं निभा सकती।”

सूत्र ने यह भी कहा कि दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के बीच जमीनी स्तर पर आज भी अच्छे संबंध हैं। उनका मानना है कि अगर दोनों दल फिर साथ आते हैं तो इससे राज्य में सांप्रदायिक सौहार्द का माहौल बन सकता है।

पंजाब भाजपा के अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सुखबीर सिंह बादल की मुलाकात का स्वागत किया। हालांकि उन्होंने दोहराया कि भाजपा राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है।

वहीं पंजाब की राजनीति में सक्रिय हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने गठबंधन की संभावनाओं को सिरे से खारिज कर दिया। सोमवार को उन्होंने कहा, ”ऐसी कोई बात नहीं है। पंजाब में भाजपा का गठबंधन वहां की जनता के साथ है। प्रधानमंत्री के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं।”

सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जल्द ही पंजाब में रैलियां करेंगे। साथ ही राज्य के लिए कुछ नई घोषणाएं भी किए जाने की संभावना है।

क्या गठबंधन के मुद्दे पर अकाली दल में मतभेद?

शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने सोमवार को भाजपा के साथ संभावित गठबंधन को लेकर पूछे गए सवालों से बचते हुए कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। वहीं पार्टी के कई नेताओं ने सार्वजनिक तौर पर गठबंधन की अटकलों को खारिज किया।

अकाली दल के वरिष्ठ नेता बलविंदर सिंह भूंदर ने कहा कि परिसीमन का समर्थन पूरी तरह पंजाब के हितों को ध्यान में रखकर किया गया है। उन्होंने कहा, ”अगर केंद्र लोकसभा सीटों में समान रूप से 50 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव लागू करता है तो आबादी के आधार पर पंजाब की सीटें 18 की बजाय करीब 20 हो सकती हैं।”

पार्टी के एक अन्य वरिष्ठ नेता सिकंदर सिंह मलूका ने कहा कि भाजपा-अकाली दल गठबंधन की मांग जमीनी स्तर से उठ रही है। उन्होंने कहा, ”दोनों दलों के कार्यकर्ताओं और समर्थकों की यही इच्छा है कि गठबंधन हो। हालांकि गठबंधन होगा या नहीं, इसका फैसला दोनों पार्टियों के नेतृत्व को ही करना है।”

अकाली दल की एकमात्र सांसद हरसिमरत कौर बादल ने भी इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट टिप्पणी करने से परहेज किया। उन्होंने कहा, ”मैं उस बैठक का हिस्सा नहीं थी। इसलिए उसमें क्या चर्चा हुई, इस बारे में कुछ नहीं कह सकती।”

हालांकि, अकाली दल के एक अंदरूनी सूत्र का कहना है कि अगर दोनों दल सीट बंटवारे के किसी स्वीकार्य फार्मूले पर सहमत हो जाते हैं तो गठबंधन संभव है। सूत्र ने कहा, ”अगर किसी एक पार्टी को बहुत ज्यादा समझौता करना पड़े तो गठबंधन होना मुश्किल होगा।”

चुनावी गणित क्या कहता है?

चुनावी आंकड़े बताते हैं कि भाजपा और शिरोमणि अकाली दल के बीच संभावित गठबंधन की अटकलों को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा और अकाली दल ने मिलकर चुनाव लड़ा था। दोनों दलों का संयुक्त वोट शेयर 37.08% रहा और दोनों ने दो-दो लोकसभा सीटें जीती थीं।

वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव में दोनों दल अलग-अलग मैदान में उतरे। इस चुनाव में भाजपा का वोट शेयर 9.63% से बढ़कर 18.56% हो गया जबकि अकाली दल का वोट शेयर 27.45% से घटकर 13.42% रह गया। दोनों का संयुक्त वोट शेयर 31.98% रहा जो कांग्रेस (26.3%) और आम आदमी पार्टी (26.02%) से अधिक था।

इसके बावजूद भाजपा एक भी सीट नहीं जीत सकी जबकि अकाली दल को सिर्फ एक सीट मिली। दूसरी ओर, कांग्रेस ने सात और आम आदमी पार्टी ने तीन लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की।

अकाली दल के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ”सिर्फ वोट प्रतिशत पर्याप्त नहीं होता, सीट जीतना ज्यादा महत्वपूर्ण है। दोनों दल अब अपनी-अपनी ताकत और कमजोरियों को समझ चुके हैं। गठबंधन दोनों पार्टियों के साथ-साथ पंजाब के हित में भी होगा क्योंकि केंद्र के साथ तालमेल वाली सरकार राज्य के लिए बेहतर नतीजे दे सकती है।”

दोनों दलों के सूत्रों के मुताबिक, 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले राज्य के बदलते राजनीतिक माहौल को देखते हुए भी गठबंधन की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है। उनका कहना है कि आम आदमी पार्टी को सरकार विरोधी माहौल (एंटी-इन्कंबेंसी) का सामना करना पड़ रहा है जबकि कांग्रेस अब भी आंतरिक गुटबाजी से जूझ रही है।

‘ना-ना करते प्यार तुम्हीं से कर बैठे…’, पीएम मोदी-सुखबीर बादल की मुलाकात पर केजरीवाल ने कसा तंज

शिरोमणि अकाली दल (बादल) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की है। यह मुलाकात संसद भवन में हुई। इसके बाद पंजाब के स्थानीय मीडिया में बीजेपी-अकाली दल के गठबंधन को लेकर जोर-शोर से चर्चाएं चलने लगी हैं। पंजाब में सरकार चला रही आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इस मामले में सोशल मीडिया पर तंज कसा।