सुखबीर बादल से सवाल पूछने गए किसानों पर पुलिस का लाठीचार्ज, पानी की बौछार के बाद 35 अरेस्ट

मोगा के पुलिस अधीक्षक ध्रुमन निंबाले ने कहा कि हमने उन्हें कई बार आगाह किया। लेकिन कुछ प्रदर्शनकारियों ने पथराव शुरू कर दिया, जिसके बाद हमें उन्हें तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछार का प्रयोग करना पड़ा।

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पंजाब के मोगा में किसानों पर पानी की बौछार करते पुलिस कर्मी। (फोटोः एजेंसी)

पंजाब के मोगा में शिरोमणि अकाली दल के एक कार्यक्रम में किसानों के जबरन दाखिल होने की कोशिश की। उन्हें तितर-बितर करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज के साथ पानी की बौछार का भी प्रयोग करना पड़ा। इसके बाद किसानों ने हाइवे भी जाम कर दिया। लेकिन बाद में इसे खाली करा लिया गया। पुलिस ने घटना के बाद तकरीबन 35 को हिरासत में लिया।

पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने शिअद के कार्यक्रम स्थल में घुसने की कोशिश में उनके साथ हाथापाई की और पथराव भी किया। मोगा के पुलिस अधीक्षक ध्रुमन निंबाले ने कहा कि हमने उन्हें कई बार आगाह किया। लेकिन कुछ प्रदर्शनकारियों ने पथराव शुरू कर दिया। उसके बाद हमें उन्हें तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछार का प्रयोग करना पड़ा।

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जानकारी के अनुसार शिअद अध्यक्ष एवं सांसद सुखबीर सिंह बादल अनाज मंडी में एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। तभी प्रदर्शनकारियों ने जबरदस्ती वहां घुसने की कोशिश की। प्रदर्शन कर रहे कुछ किसानों ने कहा कि वे बादल से कुछ मुद्दों पर सवाल करना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। पुलिस का कहना है कि किसानों ने अवरोधक तोड़ने की कोशिश की। पथराव भी किया गया। उन्हें तितर-बितर करने के लिए हमें लाठीचार्ज करना पड़ा।

खास बात है कि घटना के दौरान पार्टी प्रमुख सुखबीर सिंह बादल कार्यक्रम को संबोधित करते रहे। सुखबीर सिंह बादल ने हाल ही में पंजाब के 100 विधानसभा क्षेत्रों में 100 दिन की एक यात्रा शुरू की है। मोगा जिले के बाघा पुराना में भी कुछ दिन पहले शिअद के एक कार्यक्रम के दौरान किसानों के एक समूह ने उनका विरोध किया था।

प्रदर्शन कर रहे एक किसान ने कहा कि हम नौ महीने से अधिक समय से राष्ट्रीय राजधानी की सीमाओं पर डटे हैं लेकिन राजनीतिक दलों को सत्ता की अधिक चिंता है। किसानों के लिए वह केवल घड़ियाली आंसू बहाते हैं। गौरतलब है कि कृषि कानूनों के विरोध में किसानों का आंदोलन पंजाब से शुरू हुआ था लेकिन 26 जनवरी की घटना के बाद सिंघु और टीकरी बॉर्डर से पंजाब के किसान गांवों को लौटने लगे थे। इसके बाद यूपी के किसान नेता राकेश टिकैत ऐसे टिके कि आंदोलन पंजाब के हाथों से फिसलकर पश्चिमी यूपी के किसानों के पाले में जाने लगा।

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