पंजाबः ‘मेरा घर मेरे नाम’ की आड़ में कांग्रेस का नया दांव, लाल डोरे में रहने वालों को मालिकाना हक देगी सरकार

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, लाल लकीर के अंदर रजिस्ट्री नहीं होती है, इसी वजह से सीएम चन्नी ये योजना लेकर आए हैं।

Charanjit Singh Channi
योजना का फायदा शहरों और गांवों में 'लाल लकीर' के भीतर के घरों में रहने वाले लोगों को मिलेगा। (फोटो- एएनआई)

पंजाब के सीएम चरणजीत सिंह चन्नी ने ‘मेरा घर मेरे नाम’ से एक योजना की घोषणा की है। इसका फायदा शहरों और गांवों में ‘लाल लकीर’ के भीतर के घरों में रहने वाले लोगों को मिलेगा।

न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, इस संबंध में पूरी कवायद दो महीने के भीतर पूरी हो जाएगी। ये जानकारी पंजाब सीएमओ ने दी है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, लाल लकीर के अंदर रजिस्ट्री नहीं होती है, इसी वजह से सीएम चन्नी ये योजना लेकर आए हैं। इसके तहत जमीन की रजिस्ट्री होगी और पंद्रह दिन का समय आपत्ति दर्ज कराने के लिए मिलेगा।

इसके अलावा पंजाब सरकार आने वाले समय में एनआरआई की प्रॉपर्टी के लिए बिल लेकर आ रही है। इससे कागजों में ये बात दर्ज हो जाएगी कि ये प्रॉपर्टी एनआरआइ की है।

बता दें कि चरणजीत सिंह चन्नी, पंजाब में कांग्रेस का दलित चेहरा माने जाते हैं। कैप्टन की सरकार में रहने के साथ साथ उनके पास विपक्ष में रहने का भी अनुभव है। पंजाब की राजनीति पर नजर रखने वाले जानकार मानते हैं कि चरणजीत के जरिए कांग्रेस ने चुनावों से पहले दलित कार्ड फेंका है।

राज्य में दलितों की करीब 20 फीसदी आबादी है, पिछले चुनावों में यह वोटबैंक बिखरा हुआ नजर आया था। ऐसे में इसे कांग्रेस की दलितों के बिखरे हुए वोटों को एकजुट करने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है।

हालही में चन्नी उस वक्त चर्चा में आए थे, जब उन्होंने अपने बेटे की शादी बेहद सादे तरीके से की। इस दौरान सीएम चन्नी अपनी कार खुद चलाकर पहुंचे थे।

चन्नी के बेटे की शादी रविवार को मोहाली के गुरुद्वारा सांचा धन साहिब में हुई थी। शादी समारोह में पहुंचे मेहमानों के लिए गुरूद्वारा साहिब के लंगर की व्यवस्था की गई थी। नवदीप और सिमरंधीर को आशीर्वाद देने के बाद मेहमानों ने लंगर में ही खाना खाया था।

इस दौरान खुद सीएम चन्नी भी जमीन पर बैठकर लंगर का प्रसाद ग्रहण करते हुए दिखाई दिए थे। पार्टी नेताओं के अनुसार, इस कार्यक्रम को सादगी से इसलिए किया गया ताकि शहरवासियों को किसी प्रकार की परेशानियों का सामना न करना पड़े। राजनीतिक गलियारों में इस शादी की सादगी की खूब चर्चा रही थी।

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