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पंजाब का सियासी संकट टालने को कांग्रेस का प्लान, नवजोत सिंह सिद्धू बन सकते हैं राज्य के पार्टी चीफ

कांग्रेस आलाकमान द्वारा नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में नियुक्त करने की संभावना है।

पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नवजोत सिंह सिद्धू। (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

कांग्रेस आलाकमान द्वारा नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में नियुक्त करने की संभावना है। इस बीच कैप्टन अमरिंदर सिंह और बागी मंत्रियों और विधायकों के बीच सुलह की कोशिशें जारी हैं। नाराज मंत्रियों और विधायकों ने चुनावी वादों के पूरे न होने का मुद्दा उठाया है।

कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा,“सिद्धू को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के रूप में घोषित करना उन्हें अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में सीएम पद के लिए दौड़ में आगे रखता है। सिद्धू की राज्य इकाई अध्यक्ष के रूप में उम्मीदवारी को लेकर सीएम के विरोध को देखते हुए, पार्टी को दोनों नेताओं को एक ही मंच पर लाने के लिए एक अलग फॉर्मूले के लिए तैयार रहना होगा। पीपीसीसी प्रमुख के तहत दो-तीन कार्यकारी अध्यक्षों – एक दलित और एक हिंदू चेहरे – की नियुक्ति पर भी चर्चा की जा रही है। ”

शीर्ष नेतृत्व चाहता है कि राज्य इकाई में संकट को समाप्त करने के लिए फॉर्मूले की घोषणा करने से पहले सब कुछ ठीक हो जाए। पिछले दो महीनों में राज्य इकाई में असंतोष के कारण कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने राहुल गांधी से मिलने से पहले पंजाब के नेताओं की शिकायतों को सुनने के लिए मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में तीन सदस्यीय पैनल का गठन किया था।

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया, “सिद्धू के पीपीसीसी अध्यक्ष बनने की स्थिति में, मुख्यमंत्री का खेमा नाराज मंत्रियों और विधायकों के साथ समझौता करना चाहेगा। जरूरत दोनों तरह से है। ” बढ़ते मतभेदों के बीच, मंत्री सुखजिंदर रंधावा, तृप्त राजिंदर बाजवा, सुखबिंदर सरकारिया और चरणजीत चन्नी ने मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक का भी बहिष्कार किया था।

नेता बेअदबी और पुलिस फायरिंग के मामलों में न्याय, बिजली खरीद समझौते (पीपीए) रद्द करने और परिवहन और ड्रग माफिया के खिलाफ कार्रवाई का मुद्दा उठाते रहे हैं। सूत्रों ने कहा कि अन्य कैबिनेट मंत्रियों ने सीएम और असंतुष्ट मंत्रियों के बीच गतिरोध को खत्म करने के लिए हस्तक्षेप किया था।

रंधावा ने कहा कि उनका मुख्यमंत्री से कोई मतभेद नहीं है: “मैंने कल कर्ज माफी पर मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक बैठक में भाग लिया था। मेरी लड़ाई मुद्दों पर आधारित है, व्यक्ति आधारित नहीं। पार्टी सर्वोच्च है। जो भी पार्टी अध्यक्ष नियुक्त किया जाएगा, अन्य लोग उसके साथ पार्टी के लाभ के लिए काम करेंगे, जो अगले साल सरकार बनाएगी। जब प्रताप सिंह बाजवा को पार्टी अध्यक्ष चुना गया, तो हमने उनके साथ भी काम किया।”

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