पंजाब में दो ऐसे दिग्गज हुए हैं जिन्होंने राज्य की राजनीति में बड़ा नाम कमाया, दोनों ही नेता मुख्यमंत्री रहे और दोनों के बीच सियासी दुश्मनी भी खूब हुई। इन नेताओं के नाम कैप्टन अमरिंदर सिंह और राजिंदर कौर भट्ठल हैं।

दोनों लंबे वक्त तक कांग्रेस में रहे लेकिन अमरिंदर सिंह 2022 में बीजेपी के साथ चले गए तो भट्ठल अभी भी कांग्रेस के साथ हैं।

इन दोनों नेताओं के शुरुआती रिश्ते कैसे थे, इनकी सियासी लड़ाई में क्या बड़े घटनाक्रम हुए। साड्डा पंजाब के आज के अंक में पढ़िए, पंजाब की राजनीति में इन दोनों दिग्गजों के राजनीतिक रिश्तों के बारे में।

भट्ठल और कैप्टन अमरिंदर सिंह आए आमने-सामने

बात शुरू करते हैं साल 2002 से। 2002 में पंजाब के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को बहुमत मिला और मुख्यमंत्री पद के लिए भट्ठल और कैप्टन अमरिंदर सिंह आमने-सामने थे।

चुनाव के नतीजे आते ही भट्ठल केंद्रीय नेतृत्व से मिलने के लिए दिल्ली पहुंच गईं। 117 सीटों वाले पंजाब में कांग्रेस को नाजुक बहुमत मिला था। बहुमत के लिए 59 सीटों की जरूरत थी और कांग्रेस 62 सीटें जीती थी। भट्ठल और कैप्टन अमरिंदर सिंह अपने समर्थक विधायकों के साथ मुख्यमंत्री पद के लिए पुरजोर दावेदारी कर रहे थे।

अमरिंदर सिंह की वापसी में थी भट्ठल की भूमिका

कैप्टन अमरिंदर सिंह और भट्ठल के बीच रिश्ते कभी इतने खराब नहीं थे। बताना जरूरी होगा कि अमरिंदर सिंह 1980 में कांग्रेस के सांसद बने थे। ऑपरेशन ब्लू स्टार के मुद्दे पर उन्होंने संसद की सदस्यता और पार्टी दोनों से इस्तीफा दे दिया था।

1997 के विधानसभा चुनाव में जब अकाली दल ने अमरिंदर सिंह को टिकट नहीं दिया तो वह 1998 में कांग्रेस में वापस आ गए थे। कहा जाता है कि कांग्रेस में उनकी वापसी में भट्ठल की अहम भूमिका रही थी। जब अमरिंदर सिंह कांग्रेस में वापस आए तो सोनिया गांधी ने उन्हें पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया था।

कहां से खराब हुए रिश्ते?

1998 के लोकसभा चुनाव में जब पंजाब में कांग्रेस की करारी हार हुई तो पार्टी नेतृत्व ने भट्ठल को प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटा दिया। यह वह वक्त था जब सोनिया गांधी अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष बन चुकी थीं। अमरिंदर सिंह के गांधी परिवार के साथ पुराने रिश्ते थे। तब भट्ठल पंजाब में कांग्रेस विधायक दल की नेता थीं। उस दौरान जब भट्ठल अपने परिजनों से मिलने के लिए कनाडा गई हुई थीं, तभी अचानक उन्हें कांग्रेस विधायक दल के नेता के पद से भी हटा दिया गया। इसके बाद भट्ठल और अमरिंदर सिंह के बीच विवाद बढ़ गया और दोनों ने एक दूसरे को राजनीतिक रूप से कमजोर करने की कोई कोशिश नहीं छोड़ी।

1999 के लोकसभा चुनाव में अमरिंदर सिंह की अगुवाई में पंजाब में कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन किया था और इससे कांग्रेस के दरबार में उनकी पकड़ और मजबूत हुई थी।

बराड़ को हटाकर भट्ठल को बनाया था मुख्यमंत्री

यहां थोड़ा सा पीछे चलना होगा। भट्ठल कैप्टन अमरिंदर सिंह से पहले ही पंजाब की मुख्यमंत्री बन चुकी थीं। 1995 में जब पंजाब सचिवालय के बाहर हुए आतंकी हमले में बेअंत सिंह की हत्या हुई तो कांग्रेस नेतृत्व ने हरचरण सिंह बराड़ को मुख्यमंत्री बनाया था। 1997 के विधानसभा के चुनाव से 3 महीने पहले ही कांग्रेस नेतृत्व ने बराड़ को हटाकर भट्ठल को मुख्यमंत्री बना दिया था।

फिर से आते हैं 2002 में अमरिंदर सिंह और भट्ठल की सियासी लड़ाई पर।

मुख्यमंत्री पद को लेकर यह लड़ाई बहुत तीखी हुई और सोनिया गांधी से लेकर मनमोहन सिंह, अंबिका सोनी, अहमद पटेल, मोतीलाल वोरा ने पंजाब कांग्रेस में चल रहे इस झगड़े को खत्म करने की कोशिश की थी। अमरिंदर सिंह और भट्ठल की सियासी लड़ाई को खत्म करने में कांग्रेस नेतृत्व के पसीने छूट गए थे। कांग्रेस नेतृत्व ने अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री बनाया और भट्ठल उनकी कैबिनेट में सीनियर मंत्री थीं।

दिल्ली में डट गई थीं भट्ठल

2005 में कैप्टन को मुख्यमंत्री पद से हटाने की मांग को लेकर भट्ठल अपने समर्थक विधायकों के साथ दिल्ली पहुंच गई थीं। तब वह एक महीने से ज्यादा वक्त तक दिल्ली में डटी रही थीं। यह विरोध तब खत्म हुआ था, जब पार्टी ने उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया था।

2007 में पंजाब की सत्ता से कांग्रेस की विदाई हो गई और उसके बाद 2012 में भी उसे हार मिली। 2017 में अमरिंदर सिंह एक बार फिर पंजाब के मुख्यमंत्री बने। 2021 में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने अमरिंदर सिंह के खिलाफ मोर्चा खोला तो कैप्टन भट्ठल से मिलने गए थे। हाईकमान ने तब कैप्टन अमरिंदर सिंह को सीएम की कुर्सी से हटा दिया था। इसके बाद अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस को अलविदा कह दिया था और अपनी पार्टी पंजाब लोक कांग्रेस बनाई थी। सितंबर, 2022 में उन्होंने अपनी पार्टी का बीजेपी में विलय कर दिया था।

अमरिंदर सिंह बीजेपी में हैं जबकि भट्ठल अभी भी कांग्रेस में हैं। पंजाब कांग्रेस में इन दिनों एक बार फिर से उथल-पुथल मची है तो कुछ दिन पहले पार्टी के पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल भट्ठल से मिलने उनके घर पर पहुंचे थे। इस दौरान दोनों नेताओं ने 2027 के विधानसभा के चुनाव को लेकर चर्चा की थी।

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25 अप्रैल, 1983 को पंजाब पुलिस के तत्कालीन डीआईजी अवतार सिंह अटवाल की स्वर्ण मंदिर से बाहर निकलते समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।