पंजाब में चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर चल रहा किसानों का धरना सोमवार को तब खत्म हो गया जब पंजाब सरकार की ओर से किसानों को लिखित आश्वासन दिया गया। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) की अलग-अलग यूनियनों से जुड़े किसान इस प्रदर्शन में शामिल हुए थे और यह धरना 1 सितंबर से शुरू हुआ था। 7 सितंबर 2026 को सरकार के लिखित आश्वासन के बाद किसान अपने घर लौटना शुरू हो गए।
सरकार ने किसानों की जिन मांगों को मान लिया है उनमें सबसे प्रमुख मांग है कि सरकार एक महीने के अंदर पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र बुलाएगी जिसमें राज्य के नदी के पानी, खेती और किसानों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी।
सरकार ने मान ली किसानों की मांगें
किसानों को दिए गए आश्वासन में सरकार मौजूदा जल समझौतों की समीक्षा करने और नदी के पानी के बंटवारे से जुड़े पंजाब रीऑर्गेनाइजेशन एक्ट के प्रावधानों के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव लाने पर भी सहमत हुई है। पंजाब के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुडियां के साथ हुई बैठक में किसान नेताओं और सरकार के बीच ज्यादातर मुद्दों पर सहमति बन गई थी। बैठक में बलबीर सिंह राजेवाल, बूटा सिंह बुर्जगिल, हरिंदर सिंह लखोवाल, प्रेम सिंह भंगू और रमिंदर पटियाला समेत कई किसान नेता शामिल हुए।
लिखित आश्वासन के बाद खत्म हुआ धरना
प्रदर्शन कर रहे किसान नेताओं ने अपना धरना खत्म करने का ऐलान किया। हालांकि किसानों ने इससे पहले सरकार से लिखित आश्वासन मांगा था जो कि मिल भी गया। लिखित आश्वासन मिलने के बाद जगतपुरा गांव के पास प्रदर्शन समाप्त करने का ऐलान किया गया।
पानी के समझौतों पर विचार करेगी सरकार
बता दें कि पिछले मंगलवार से चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे किसान नेताओं ने कहा कि राज्य सरकार उनकी मांगों पर सहमत हो गई है। सरकार मौजूदा पानी के समझौतों पर फिर से विचार करने और नदी के पानी के बंटवारे से जुड़े पंजाब रीऑर्गेनाइजेशन एक्ट के नियमों के खिलाफ एक प्रस्ताव पास करने पर सहमत हो गई है।
कर्ज माफी का भी मिला आश्वासन
किसानों के कर्ज को लेकर भी सरकार ने बड़ा आश्वासन दिया है। किसानों के बकाया लोन के निपटारे के लिए वन-टाइम सेटलमेंट (OTS) स्कीम पर काम करने के लिए एक कमेटी बनाई जाएगी। इसमें कोऑपरेटिव बैंकों और अन्य संबंधित पक्षों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। कमेटी अपनी रिपोर्ट देने से पहले विधानसभा में मौजूद राजनीतिक दलों से भी सलाह लेगी।
गन्ना किसानों को मिलेगा उनका बकाया
इसके अलावा गन्ने के बकाया भुगतान का मुद्दा भी बैठक में उठा। सरकार ने भरोसा दिया कि निजी चीनी मिलों पर किसानों का बकाया समय पर चुकाया जाएगा। वहीं, सहकारी चीनी मिलों के भुगतान को व्यवस्थित करने के लिए ‘एक खिड़की, एक भुगतान’ व्यवस्था शुरू की जाएगी। सरकार की ओर से मांगें माने जाने के बाद किसान संगठनों ने अपना सात दिन लंबा प्रदर्शन खत्म कर दिया।
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