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पाकिस्तान का कानून लागू करना चाहता है पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट!

जब यह मामला पंजाब के एडवोकेट जनरल अतुल नंदा के संज्ञान में लाया गया तो उन्होंने कहा कि मुझे इस बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है। मैं इस मुद्दे को संबंधित पीठ के समक्ष उठाउंगा ताकि इस मुद्दे को देखा जा सके।

Author नई दिल्ली | August 2, 2019 12:48 PM
अदालत ने यह निर्देश 29 जुलाई को याचिकाओं के एक समूह का निपटारा करते हुए यह निर्देश दिया था। (फाइल फोटो)

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने किसानों के हित में राज्य सरकार को प्राइवेट मनी लैंडिंग एक्ट 2007 के प्रावधानों को लागू करने का निर्देश दिया। हालांकि, निर्देश जारी करते समय अदालत शायद इस फैक्ट से बेखबर था कि इसमें जिस कानून की बात कही गई है वह भारत में मान्य ही नहीं है।

मालूम हो प्राइवेट मनी लैंडिंग एक्ट पाकिस्तान में लागू है। अदालत ने यह निर्देश 29 जुलाई को याचिकाओं के एक समूह का निपटारा करते हुए दिया था। अदालत ने याचिकाओं के निपटारे के दौरान पंजाब में किसानों की शिकायतों को दूर करने के लिए प्राइवेट मनी लेंडिंग एक्ट का लागू करने की बात कही।

अदालत के निर्देश में एक्ट के अंतर्गत लिखे गए फेडरल और प्रांतीय सरकार जैसे शब्द भी भारत सरकार के प्रारूप में इस्तेमाल नहीं किए जाते हैं। जब यह मामला पंजाब के एडवोकेट जनरल अतुल नंदा के संज्ञान में लाया गया तो उन्होंने कहा कि मुझे इस बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है। मैं इस मुद्दे को संबंधित पीठ के समक्ष उठाउंगा ताकि पीठ इस मुद्दे को देख सके।

हालांकि, यह पहली बार नहीं है कि पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में पाकिस्तान कानून को लेकर चर्चा हो रही हो। पिछले साल सिंतबर में संगरूर के दो युवाओं ने सरकारी नौकरी में नियमित किए जाने को लेकर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

युवकों ने जिस कानून का हवाला देते हुए याचिका दायर की थी वह कानून भारत नहीं बल्कि पाकिस्तान में लागू होता था। उस  समय यह बात हाईकोर्ट के संज्ञान में भी नहीं आई थी। इस मामले में अदालत ने सुनवाई करते हुए पंजाब सरकार को 11 अक्टूबर 2018 तक जवाब देने के लिए नोटिस भी जारी कर दिया था।

पंजाब सरकार के एडवोकेट जनरल की तरफ से जब यह सारा मामला सामने आया तो कार्मिक विभाग ने पाकिस्तानी कानून का हवाला देते हुए इस नोटिस का जवाब दिया था। दरअसल याचिका में पंजाब रेगुलराइजेशन ऑफ सर्विस एक्ट 2018 का हवाला दिया गया था। जबकि ऐसा कानून पाकिस्तान के पंजाब में बनाया गया था। इस संबंध में 30 अप्रैल 2018 को पाकिस्तान सरकार ने अधिसूचना भी जारी की थी। इस एक्ट के अंतर्गत वहां के 20 हजार अस्थायी कर्मचारियों को नियमित किया जाना जरूरी था।

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