पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने केंद्र सरकार के विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) [VB-G RAM G] Act, 2025 का कई महीनों तक विरोध किया था। लेकिन अब मान सरकार ने यू-टर्न ले लिया है और पंजाब में इस योजना को लागू करने का रास्ता साफ कर दिया है।
आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार का यह फैसला मुख्य रूप से उसकी वित्तीय परेशानियों से प्रेरित माना जा रहा है। सरकार को आशंका थी कि अगर यह योजना लागू नहीं की गई तो उसे केंद्र सरकार से मिलने वाले करीब 750 से 800 करोड़ रुपये के अनुदान से हाथ धोना पड़ सकता है। पिछले सप्ताह राज्य सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग ने अधिसूचना जारी कर 1 जुलाई से G RAM G Act लागू करने का ऐलान किया।
आपको बता दें कि यह अधिसूचना उस फैसले के करीब छह महीने बाद आई है जब 30 दिसंबर 2025 को मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार ने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर संसद से पारित G RAM G Act को लागू ना करने का फैसला लिया था।
उस समय AAP सरकार ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) की जगह G RAM G Act लाने के फैसले का जोरदार विरोध किया था।
विरोध में पंजाब सरकार ने बुलाया था विशेष सत्र
पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र में सभी दलों की सहमति से एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से VB-G RAM G कानून वापस लेने की मांग की गई थी। उस समय आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार का कहना था कि यह नया कानून मनरेगा (MGNREGA) के अधिकार-आधारित स्वरूप को कमजोर करता है, राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालता है और ग्रामीण मजदूरों के हितों के खिलाफ है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इसे ‘गरीब, किसान, दलित, महिला और मजदूर विरोधी’ कानून बताया था।
हालांकि अब सरकार का कहना है कि यह फैसला राजनीति नहीं बल्कि वित्तीय जरूरतों के कारण लिया गया है। सूत्रों के मुताबिक, पंजाब सरकार केंद्र से मिलने वाले 750 से 800 करोड़ रुपये के अनुदान को गंवाना नहीं चाहती थी। इस योजना पर हर साल करीब 1250 से 1300 करोड़ रुपये खर्च होंगे जिसमें राज्य सरकार का हिस्सा लगभग 500 करोड़ रुपये रहेगा।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इतनी बड़ी केंद्रीय सहायता छोड़ना संभव नहीं था क्योंकि यह राशि ग्रामीण इलाकों में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए है। योजना लागू नहीं करने का मतलब पात्र लाभार्थियों को इस सहायता से वंचित करना होता।
VB-G RAM G योजना के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को साल में 125 दिन का रोजगार मिलेगा। मजदूरी का खर्च केंद्र और राज्य सरकार 60:40 के अनुपात में वहन करेंगे। इसी व्यवस्था का AAP सरकार ने पहले विरोध किया था। वहीं मनरेगा में मजदूरी का पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाती थी और सामग्री व प्रशासनिक खर्च का 75 प्रतिशत हिस्सा भी केंद्र ही देता था।
सरकार ने इस साल के बजट में योजना के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि विधानसभा का प्रस्ताव राजनीतिक संदेश देने के लिए था लेकिन अब लोगों के हित में योजना लागू करना जरूरी हो गया है।
सूत्रों के अनुसार, फरवरी 2027 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनावों को देखते हुए भी सरकार ने इस योजना को लागू करने में तेजी दिखाई है।
कर्ज का बोझ और मुफ्त योजनाओं का दबाव
पंजाब सरकार पिछले कई वर्षों से गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रही है। वर्ष 2026-27 के बजट के अनुसार राज्य पर कुल कर्ज बढ़कर 4.07 लाख करोड़ रुपये हो गया है। अगले वित्त वर्ष में करीब 39970 करोड़ रुपये का नया कर्ज लेने के बाद यह आंकड़ा 4.47 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।
बढ़ते कर्ज के कारण ब्याज का बोझ भी लगातार बढ़ रहा है। चालू वित्त वर्ष में सरकार को कर्ज पर 28755 करोड़ रुपये ब्याज और 13725 करोड़ रुपये मूलधन चुकाने पर खर्च करने होंगे। इससे राज्य की आय का बड़ा हिस्सा कर्ज चुकाने में खर्च हो रहा है जबकि स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे जैसे विकास कार्यों के लिए संसाधन सीमित हो रहे हैं।
मार्च 2022 में भगवंत मान सरकार के सत्ता में आने के समय पंजाब पर 3.23 लाख करोड़ रुपये का कर्ज था जो अब लगातार बढ़ता गया है। सरकार की विभिन्न सब्सिडी और मुफ्त योजनाओं से सरकारी खजाने पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है। राज्य का कुल सब्सिडी बिल 26612 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है जबकि सरकार के कार्यकाल के अंत तक मुफ्त योजनाओं पर करीब 20000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ने का अनुमान है।
इसी बीच, 1 जुलाई से पंजाब सरकार अपनी प्रमुख ‘मावां धीयां सत्कार योजना’ भी शुरू करने जा रही है। इस योजना के तहत 18 वर्ष या उससे अधिक आयु की पात्र महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता दी जाएगी। सामान्य वर्ग की महिलाओं को 1000 रुपये प्रति माह जबकि अनुसूचित जाति (SC) की महिलाओं को 1500 रुपये प्रति माह मिलेंगे।
सरकार ने मौजूदा बजट में इस महिला सहायता योजना के लिए 9300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने घोषणा की है कि जुलाई में लाभार्थियों को अप्रैल, मई और जून- तीनों महीनों की राशि एक साथ दी जाएगी।
योजना लागू करने पर विपक्ष का घेराव
VB-G RAM G योजना लागू करने के फैसले पर विपक्ष ने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर यू-टर्न लेने का आरोप लगाया है।
पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने सवाल उठाया कि दिसंबर से जून के बीच ऐसा क्या बदल गया जिसके कारण सरकार ने अपना रुख बदल लिया। उन्होंने कहा कि अगक सरकार इस कानून को गरीब विरोधी मानती थी और विधानसभा से इसे खारिज कराने का प्रस्ताव पारित कराया था तो अब बिना किसी स्पष्टीकरण के इसे लागू क्यों किया जा रहा है।
शिरोमणि अकाली दल ने सरकार पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। पार्टी प्रमुख सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व वाले अकाली दल के प्रवक्ता परम्बंस सिंह बंटी रोमाना ने कहा कि पहले विधानसभा में कानून का विरोध करना और बाद में बिना कारण बताए उसे लागू करना सरकार के पाखंड को दिखाता है। उन्होंने सवाल किया कि विधानसभा का प्रस्ताव बड़ा है या फिर सरकार का उसे लागू करने का फैसला?
दूसरी ओर, पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने सरकार के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि गरीब मजदूरों को रोजगार और केंद्र से मिलने वाली राशि से वंचित नहीं किया जा सकता था। उन्होंने कहा कि सिद्धांत के तौर पर सरकार ने मनरेगा (MGNREGA) की जगह VB-G RAM G लाने का विरोध किया था लेकिन योजना लागू नहीं करने से लाभार्थियों का नुकसान होता।
AAP नेताओं का यह भी कहना है कि पंजाब ऐसा करने वाला अकेला गैर-भाजपा शासित राज्य नहीं है। उनके मुताबिक, कांग्रेस शासित हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक भी इस योजना को लागू करेंगे। हालांकि वे इसके कुछ प्रावधानों पर अपनी आपत्तियां जारी रखेंगे। पार्टी का कहना है कि सरकारें नीति का विरोध कर सकती हैं लेकिन ग्रामीण मजदूरों को केंद्र की वित्तीय सहायता से वंचित नहीं कर सकतीं।
नई दैनिक मजदूरी की दरें लागू
केंद्र सरकार ने मनरेगा की जगह लागू हुए नए ग्रामीण रोजगार कानून के तहत मजदूरों की नई दैनिक मजदूरी दरें जारी कर दी हैं। नए नियम बुधवार (1 जुलाई 2026) से लागू हो गए हैं। इसके तहत राज्यों के हिसाब से मजदूरी 300 रुपये से 409 रुपये प्रतिदिन तय की गई है जबकि सिक्किम की कुछ ग्राम पंचायतों में यह 450 रुपये होगी।
