महाराष्ट्र में एक पूर्व विप्रो कर्मचारी ने आरोप लगाया है कि कंपनी के पुणे (हिंजवडी) ऑफिस में उसके एक सहकर्मी ने उस पर इस्लाम धर्म अपनाने और संबंध बनाने का दबाव डाला। पीड़िता का कहना है कि जब उसने इस पूरे मामले की शिकायत कंपनी में की, तो कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उसके अनुसार, उल्टा उसके खिलाफ ही कार्रवाई की गई और अगस्त 2025 में एक ऑनलाइन मीटिंग के दौरान उसे नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर किया गया।

यह मामला हिंदू जनजागृति समिति (Hindu Janajagruti Samiti) की तरफ से बुलाई गई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद सामने आया। इसके बाद पीड़िता ने हिंजवडी पुलिस स्टेशन में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई और विप्रो टेक्नोलॉजीज (Wipro Technologies) को 50 लाख रुपये के मुआवजे की मांग करते हुए कानूनी नोटिस भी भेजा।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि कंपनी के अंदर कुछ लोग हिंदू महिलाओं को दबाव में लेकर या तो उनकी शर्तें मानने के लिए मजबूर करते हैं या फिर नौकरी छोड़ने की स्थिति पैदा करते हैं। उसने यह भी कहा कि पिछले लगभग 10 महीनों से उसे लगातार मानसिक तनाव और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। उसका दावा है कि जब उसने बार-बार यह बात कंपनी में उठाई, तो उसे गंभीरता से नहीं लिया गया और मामले को दबाने की कोशिश की गई।

शिकायत में एक कर्मचारी शाहिना रफीक (Shahina Rafiq) पर भी आरोप लगाए गए हैं। पीड़िता का कहना है कि शाहिना रफीक ने नौकरी के पहले दिन से ही उसे परेशान करना शुरू कर दिया था। आरोप के अनुसार, उस पर यह भी दबाव बनाया गया कि वह कंट्री हेड रामकुमार के साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए तैयार हो और इस संबंध का इस्तेमाल करके उसे दुबई ट्रांसफर दिलाने की बात कही गई, जहां उसके लिए शादी और आर्थिक फायदे की व्यवस्था करने की बात भी कही गई।

पीड़िता का कहना है कि उसने इस मामले की शिकायत पहले भी की थी, लेकिन कोई उचित कार्रवाई नहीं हुई। उसने बताया कि 24 अप्रैल 2026 को भी उसने यह मुद्दा फिर से उठाया, जो उसके इस्तीफे के बाद का समय था, जब उसने अपनी बर्खास्तगी का कारण लिखित में मांगा था। उसका दावा है कि उसकी नौकरी से निकाला जाना गलत और अवैध था।

फिलहाल उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और उसे एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया के लिए बुलाया गया था। अधिकारियों के अनुसार जांच की जाएगी और उसके बाद आगे की कानूनी कार्रवाई होगी।

पीड़िता के वकील का कहना है कि उसे नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर करना श्रम कानूनों और न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। वकील ने मांग की है कि उसे दोबारा नौकरी पर रखा जाए, उचित मुआवजा दिया जाए और कंपनी इस मामले पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगे।

इसके साथ ही हिंदू जनजागृति समिति (Hindu Janajagruti Samiti) ने भी सरकार से इस मामले की विस्तृत जांच की मांग की है। हालांकि, अब तक विप्रो टेक्नोलॉजीज (Wipro Technologies) की तरफ से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह पूरा मामला पुलिस जांच और कानूनी प्रक्रिया के अधीन है, और सभी आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही की जाएगी।