ताज़ा खबर
 

पुलवामा हमले पर रिपोर्ट में CRPF ने सरकार से कहा- मेटल प्‍लेट से नहीं मिलती IED धमाकों से सुरक्षा

जम्मू कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले में शहीद हुए 40 जवानों की घटना के बाद केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ ) ने गृह मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट सौंपी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मेटल प्‍लेट से IED धमाकों से सुरक्षा नहीं मिलती है।

पुलवामा जिले के अवंतीपुरा में गुरुवार को सीआरपीएफ की बस पर किए गए हमले के बाद का दृश्य। (फोटोः पीटीआई)

जम्मू कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले में शहीद हुए 40 जवानों की घटना के बाद केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ ) ने गृह मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट सौंपी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मेटल प्‍लेट से IED धमाकों से सुरक्षा नहीं मिलती है।सुरक्षाबलों के काफिले के लिए बेहतर सुरक्षा के केंद्र सरकार से लंबे समय से अपील की गई है लेकिन मांग को पूरा करने की देरी के बाद बहस शुरू हो गई है। कहा जा रहा है कि सुरक्षा बल के जवानों को सड़क के बजाए एयरलिफ्ट करने से ऐसी अप्रिय घटनाओं से बचा जा सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि जम्मू कश्मीर से श्रीनगर और श्रीनगर से जम्मू कश्मीर जाने वाले काफीले गर्मियों के मौसम आराम से आवाजाही करते हैं लेकिन बर्फबारी और भूस्खलन के वक्त इनकी परस्पर आवाजाही नहीं हो पाती है। काफिले में लगभग तीन से चार हजार जवान होते हैं। ऐसे में अक्सर उन्हें जम्मू ट्रासिंट कैंप पर रुकना पड़ता है। कैंप की क्षमता हजार जवान से अधिक नहीं होती है ऐसे में उन्हें इसके आस पास के इलाके में रुकना पड़ता है।

बर्फबारी के कारण जम्मू कश्मीर से श्रीनगर जाने वाला काफिला पिछले 15 दिनों में तीन दिन ही आगे बढ़ पाया था। बीते चार फरवरी को 91 वाहनों समेत 2871 जवानों सुरक्षाबल के जवानों का काफिला आगे बढ़ा।जुलाई 2018 में साजो समान की देरी के चलते सीआरपीएप ने अपने हाथ में जिम्मेदारी लेते हुए सुरक्षा के लिहाज से गाड़ियों में ऑरमर प्लेट लगाई, कंक्रिट, और लकड़ी के जरिए काफिले को और सुरक्षित बनाने की कोशिश की।सीआरपीएफ के डीजी आरआर भटनागर का कहना है कि कश्मीर में तैनाती के लिए हम और बुलेट प्रूफ वाहन का इंतजाम कर रहे हैं। सजो समान मिलने की प्रक्रिया में देरी के चलते हमने खुद से प्रबंधन कर रहे हैं।

रिपोर्ट में कहा गया हैं कि काफिले पर हमले की चेतावनी सिर्फ आईडी और गोलियों की ही होती थी लेकिन यह पहली बार है जब आत्मघाती हमला हुआ है। इस मामले में पता चलता है कि हमलावर हाईवे से लिंक रोड काकापोरा से लेलहर के जरिए जवानों के काफिले के तरफ आए।
पूर्व सीआरपीएफ डीजीपी दुर्गा प्रसाद का कहना है कि अगर काफिले पर गोलियां भी चलाती तो जान माल का नुकसान कम होता लेकिन फिदायीन हमले पहली बार था ऐसे में जवानों को एयरलिफ्ट करना ज्यादा सुरक्षित होगा।

Next Stories
1 टैक्‍स देने वालों के लिए आधार-पैन को लिंक करना अनिवार्य, CBDT ने तय की अंतिम तारीख
2 Pulwama Terror Attack: शहीदों के अंतिम संस्‍कार में शामिल होंगे केंद्रीय मंत्री, पीएम ने राठौड़ को सौंपी जिम्‍मेदारी
3 वंदे भारत: नरेंद्र मोदी ने दिखाई हरी झंडी, अगले ही दिन फेल हुआ सबसे तेज ट्रेन का इंजन
ये पढ़ा क्या?
X