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अब्दुल्ला पर PSA: 82 साल के पूर्व सीएम के खिलाफ 21 पन्नों का डॉजियर, 3 साल पुराने बयान को भी बनाया आधार

अब्दुल्ला को उनके गुपकर रोड स्थित आवास पर पीएसए लगाए जाने से पहले से ही नजरबंद रखा गया था। अब्दुल्ला पर श्रीनगर के डीएम की ओर से 14 सितंबर को पीएसए लगाया गया था।

Author श्रीनगर | September 24, 2019 8:00 AM
Farooq Abdullahनैशनल कॉंफ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला। (एक्सप्रेस फोटो)

नैशनल कॉन्फ्रेंस नेता, तीन बार के मुख्यमंत्री और श्रीनगर से सांसद फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ पब्लिक सेफ्टी ऐक्ट (पीएसए) की कार्रवाई के लिए जम्मू-कश्मीर प्रशासन की ओर से दाखिल डॉजियर 21 पन्नों का है। इसमें अब्दुल्ला पर 27 आरोप लगाए हैं। इसके अलावा, 16 पुलिस रिपोर्ट, तीन एफआईआर और 13 बयानों को शामिल किया गया है। ये बयान कथित तौर पर खत्म किए जा चुके आर्टिकल 35ए के समर्थन में भी दिए गए थे।

बता दें कि अब्दुल्ला को उनके गुपकर रोड स्थित आवास पर पीएसए लगाए जाने से पहले से ही नजरबंद रखा गया था। अब्दुल्ला पर श्रीनगर के डीएम की ओर से 14 सितंबर को पीएसए लगाया गया था। अगले महीने 82 साल के होने जा रहे अब्दुल्ला की ‘बढ़ती उम्र’ और उनके ‘रुख’ का हवाला देते हुए उनके आवास को ही वैकल्पिक जेल बनाया गया है।

डॉजियर में आरोप लगाया गया है कि “the subject” यानी अब्दुल्ला श्रीनगर जिले या घाटी के आसपास के इलाकों में माहौल बिगाड़ने की क्षमता रखते हैं। डॉजियर के मुताबिक, अब्दुल्ला का बर्ताव भारत सरकार के खिलाफ जनभावनाओं को उकसाने वाला है और वह अपने बयानों से जनता को भड़का सकते हैं, जो देश की एकता और अखंडता के खिलाफ है। डॉजियर में अब्दुल्ला के 2016 में दिए एक बयान का भी जिक्र है।

डॉजियर में लिखा है, ‘ दिसंबर 2016 में अपने पिता की जयंती पर अब्दुल्ला ने नसीमबाग हजरतबल में अलगाववादी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस को लेकर यह बयान देकर विवाद खड़ा कर दिया कि उनकी पार्टी और हुर्रियत को कश्मीर की भलाई के लिए एकजुट हो जाना चाहिए।’ अब्दुल्ला के खिलाफ लगाए गए एक आरोप के मुताबिक, उन्होंने आतंकियों का महिमा मंडन करके देश विरोधी तत्वों द्वारा अंजाम दी गई आतंकी गतिविधियों को जायज ठहराया।

डॉजियर में उस बयान को भी शामिल किया गया है, जिसमें उन्होंने कहा था, ‘अगर आर्टिकल 370 अस्थाई है तो जम्मू कश्मीर के भारत से रिश्ते भी अस्थाई हैं।’ पीएसए के तहत कार्रवाई करने के लिए अब्दुल्ला के उन बयानों को भी आधार बनाया गया है, जो उन्होंने मीडिया में दिए थे। इनमें अब्दुल्ला द्वारा कश्मीर के कथित आजादी के संघर्ष के लिए अलगाववादी संगठन हुर्रियत कॉन्फ्रेंस से हाथ मिलाने से जुड़े बयान और राष्ट्र ध्वज को फहराने के खिलाफ धमकी देने के आरोप को भी आधार बनाया गया है। राज्य सरकार ने अपनी कार्रवाई के लिए अब्दुल्ला के उस बयान का भी जिक्र किया है, जिसमें उन्होंने कश्मीर के लिए ‘इस देश’ का इस्तेमाल किया था।

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