जब श्रीलंका के प्रधानमंत्री पर आगबबूला हो गए थे पं जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी ने यूं संभाला था मामला

इंडोनेशिया के बांडुंग में एक सम्मेलन के दौरान पंडित नेहरू श्रीलंका के प्रधानमंत्री जॉन कोटलेवाला पर बहुत ज्यादा नाराज हो गए थे। कई जगह यह भी बताया गया है कि उन्होंने प्रधानमंत्री पर हाथ भी तान दिया था।

पूर्व प्रधानमंत्री पंडित नेहरू और इंदिरा गांधी। एक्सप्रेस आर्काइव

पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को उनकी जयंती पर याद किया जा रहा है। नेहरू पर जितना कुछ लिखा गया है उससे यही पता लगता है कि उनका व्यक्तिव्य बहुआयामी था। वह जितना गंभीर थे उतना ही सहज और आम लोगों की तरह हरकत करने वाले भी थे। पंडित नेहरू के साथ कई वर्षों तक काम करने वाले आईपीएस अधिकारी केएफ रुस्तमजी की लिखी डायरी और बाद में इसी से लिखी गई किताब से उनके जीवन की कई रोचक घटनाओं के बारे में पता चलता है।

जब श्रीलंका के पीएम पर आगबबूला हो गए थे नेहरू
पंडित नेहरू ने अपने समय में अफ्रीका और एशिया के देशों को एक मंच पर लाने के लिए भी काम किया। इंडोनेशिया के बांडुंग में एक सम्मेलन के दौरान पंडित नेहरू श्रीलंका के प्रधानमंत्री जॉन कोटलेवाला पर बहुत ज्यादा नाराज हो गए थे। कई जगह यह भी बताया गया है कि उन्होंने प्रधानमंत्री पर हाथ भी तान दिया था।

दरअसल हुआ यह था कि जॉन कोटलेवाला ने पोलैंड, बुलगारिया, हंगरी और रोमानिया जैसे देशों को सोवियत सिंह का उपनिवेश बताया था और उसकी तुलना एशिया और अफ्रीका के दूसरे उपनिवेशों से की थी। नेहरू को यह बात इतनी बुरी लग गई की वह अपनी सीट से उठकर जॉन कोटलेवाला के पास पहुंच गए और जोर से चिल्लाने लगे। उन्होंने तेज से कहा, यह सब क्या है, भाषण देने से पहले मुझे दिखाया क्यों नहीं?

जॉन कोटलेवाला ने भी जवाब दिया कि जब आप हमें अपना भाषण नहीं दिखाते तो मैं क्यों दिखाता। इसपर नेहरू इतना गुस्सा हो गए कि लग रहा था वह हाथ ही उठा देंगे। तभी वहां मौजूद इंदिरा गांधी ने उन्हें शांत किया। इसके बावजूद दोनों में काफी देर तक तीखी बहस चलती रही। वहीं मौजूद चीन के तत्कालीन प्रधानमंत्री ने उन दोनों को समझाने की कोशिश की लेकिन काफी देर तक छोटे बच्चों की तरह बहस चलती रही।

बाद में जॉन केटलेवाला ने मांगी माफी
अगले दिन सब सामान्य हो गया था। बाद में सर जॉन ने माफी भी मांगी और कहा कि वह किसी भी रूप में सम्मेलन में व्यवधान नहीं डालना चाहते थे। श्रीलंका के तत्कालीन प्रधानमंत्री ने अपनी किताब में भी घटना का जिक्र किया औऱ कहा कि नेहरू के साथ हमेशा उनकी अच्छी दोस्ती रही।

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