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Lockdown: बंदी में वक्त का भरपूर लुत्फ उठाएं – मनोचिकित्सक

कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव का मूल मन्त्र जरूरी सावधानी बरतने के साथ ही सामाजिक दूरी को बरकरार रखने में ही है। इसके लिए जरूरी है कि जब तक वायरस का खतरा बरकरार है तब तक न तो किसी के घर जाएँ और न ही किसी को अपने घर पर बुलाएं । अगर आस-पड़ोस में किसी से बात करना बहुत ही जरूरी हो तो एक मीटर की दूरी बनाए रखें। साबुन से अच्छी तरह से हाथ धोएं ।

Author गाजियाबाद | Updated: April 7, 2020 5:07 AM
बच्चों के साथ खेलता परिवार। (फाइल फोटो)

कोरोना विषाणु को मात देने के लिए घर से बाहर निकलना पूरी तरह से मना है। ऐसे में मनोचिकित्सक बता रहे हैं कि लोग घर में रहकर इसे सिर्फ बुरे वक्त की तरह न बिताएं बल्कि मुश्किल से मिलने वाली छुट्टी समझकर सुकून से बिताएं। इस महत्त्वपूर्ण समय को घर-परिवार के साथ बिताने के साथ ही सगे-संबंधियों और मित्रों से फोन या संदेशों के आदान-प्रदान के जरिये संपर्क में रहना भी एक अच्छा तरीका साबित हो सकता है। इससे जहां एक-दूसरे का हालचाल जान सकेंगे वहीं संबंधों में एक मिठास का भाव भी देखने को मिलेगी।

गाजियाबाद जिला मानसिक रोग प्रकोष्ठ में तैनात मनोचिकित्सक डॉ. साकेत नाथ तिवारी का कहना है कि पूर्णबंदी में लोगों की आमदनी व आजादी कम हो गयी है और उनके पास फालतू वक्त एवं असुरक्षा की भावना बढ़ गयी है। लिहाजा तनाव बढ़ना लाजमी है। खासकर ऐसे लोग ज्यादा परेशान हो सकते हैं, जिन्हें अपनी कार और मकान की ईएमआइ देनी होती है। हम इस तनाव को नजरिया बदलकर दूर कर सकते हैं । पूर्णबंदी कोरोना का फैलाव रोकने के लिए जरूरी है । दूसरा, आप घर में रहकर देश समाज के लिए योगदान दे रहे हैं। तीसरा, यह अनंत काल की समस्या नहीं है। यह जल्द ही खत्म हो जाएगा। इसलिए देशबंदी के वक्त को छुट्टी की तरह इस्तेमाल करें। पति-पत्नी एक दूसरे को वक्त दें। बच्चों के साथ खेलें। समय बचे तो भविष्य की योजना तैयार करें।

भागदौड़ के बीच मिला यह विराम एक मायने में और हमारे जीवन को संवारने में सहायक सिद्घ हो सकता है। पति-पत्नी इस बीच एक दूसरे को समझने का प्रयास करें और एक-दूसरे के व्यक्तित्व में आए परिवर्तन पर भी ध्यान दें और उसी के अनुकूल अपना व्यवहार परिवर्तन करने के लिए खुद को तैयार करें। बल्कि बच्चों के मामले में भी लागू होती है। साथ ही अपने वातार्लाप में नकारात्मक शब्दों का प्रयोग कम से करें। उन्होंने उदाहरण देकर बताया कि- टेंशन मत लो -बोलने के बजाय- मस्त रहो-बोलना एक सकारात्मक ऊर्जा देने काम करेगा।

उन्होंने बताया कि दौड़ती-भागती जिन्दगी में एकाएक आये ठहराव का असर किसी के भी आचार-व्यवहार में साफ देखा जा सकता है। ऐसे ही समय में लोगों के धैर्य की असली परीक्षा होती है । इस समय अपनी बदली दिनचर्या में कुछ समय अपने शुभचिंतकों से फोन के जरिये जुड़कर भी पुरानी यादों को ताजा करने के साथ ही सम्बन्धों को फिर से एक ताजगी दे सकते हैं। इसके लिए भी सावधानी बरतने की जरूरत है कि एक दूसरे से फोन पर भी बात करते समय सिर्फ और सिर्फ कोरोना विषाणु के खतरों के बारे में वातार्लाप न करें।

विभिन्न माध्यमों से लोग सिर्फ कोरोना के बारे में सुन-सुन कर ऊब चुके हैं, इसलिए उन्हें कुछ समय के लिए इससे हटकर बात करने की जरूरत महसूस होती है। इस पूर्णबंदी के वक्त प्रतिदिन कुछ समय के लिए वीडियो काल कर बाहर रह रहे अपनों से संपर्क में रह सकते हैं। इसके अलावा कुछ वक्त योगा करके तो कुछ समय पुस्तकों का अध्ययन करके बिता सकते हैं।

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