पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन होने के बाद टीएमसी नेताओं पर एक्शन जारी है। अब इसी बीच राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी चीफ ममता बनर्जी के खिलाफ सिलीगुड़ी में आपराधिक धमकी देने और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। यह मामला इस साल की शुरुआत में उत्तरी बंगाल में विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान उनके द्वारा की गई टिप्पणियों से संबंधित है।
न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए अधिवक्ता रिंकी चटर्जी सिंह ने कहा कि जब वह मुख्यमंत्री थीं, तब उन्होंने हिजाब पहनकर रेड रोड पर ईद की नमाज अदा की और बाद में हिंदू धर्म को ‘गंदा धर्म’ बताया। जब मैंने साइबर शाखा में एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश की, तो उसे स्वीकार नहीं किया गया। मुझे शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा और मेरी शिकायत कई दिनों तक दर्ज नहीं हुई।
रिंकी सिंह ने कहा कि बाद में, 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले, धर्मतला में हिंदू मतदाताओं को धमकाने वाले बयान दिए गए। एक हिंदू और एक कार्यकर्ता के रूप में मैंने व्यक्तिगत रूप से खुद को खतरे में महसूस किया और हमलों से डर गई। मैंने उकसावे, हिंसा भड़काने और धर्म का अपमान करने का हवाला देते हुए बीएनएस की कई धाराओं के तहत शिकायतें दर्ज कराईं। शुरू में पुलिस ने कार्रवाई करने से इनकार कर दिया, लेकिन बाद में मेरी शिकायत प्राप्त हुई और धाराएं लागू की गईं। मेरा मानना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की भी सीमाएं होती हैं।
साइबर अपराध इकाई ने स्थानीय वकील रिंकी चटर्जी सिंह द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत पर 15 मई को एफआईआर दर्ज की। सिंह ने पुलिस स्टेशन में दर्ज अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि टीएमसी सुप्रीमो ने सनातन धर्म को “गंदा धर्म” कहकर हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं का अपमान किया है।
वकील ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव प्रचार के दौरान ममता बनर्जी ने कहा था कि अगर कोई विशेष समुदाय हिंदुओं पर हमला करता है, तो “उनके 12 तो बेजे जाबे” (यानी हिंदुओं को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे)। शिकायत में कहा गया है कि ऐसी टिप्पणियों ने हिंदू समुदाय के सदस्यों में भय पैदा किया और मतदाताओं को डरा-धमकाकर प्रभावित करने के इरादे से सामाजिक अशांति, धार्मिक उकसावे और सांप्रदायिक असामंजस्य को बढ़ावा दिया।
इन धाराओं में दर्ज हुए मामला
ममता बनर्जी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 351 (1), 352 और 353 (2) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। जबकि धारा 351 (1) आपराधिक धमकी के अपराध से संबंधित है, धारा 352 शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान के अपराध से संबंधित है।
धारा 353(2) एक आपराधिक कानून प्रावधान है जो विभिन्न धार्मिक, नस्लीय या भाषाई समूहों के बीच घृणा, शत्रुता या दुर्भावना को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अफवाहों, झूठी सूचनाओं या भयावह खबरों के प्रसार को दंडित करता है।
शिकायतकर्ता ने लिखा, “पिछले कई वर्षों से सत्ताधारी राजनीतिक दल में उच्च पदों पर आसीन कई नेताओं ने कथित तौर पर हिंदू धर्म और सनातन धर्म के विरुद्ध अपमानजनक और निंदनीय टिप्पणियां की हैं। हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री ने भी ऐसे बयान दिए हैं, जिनसे हमारे अनुसार, भारत और विश्व भर में सनातन धर्म के लाखों अनुयायियों की धार्मिक भावनाओं और आस्थाओं को गहरी ठेस पहुंची है।
