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गाजीपुर प्रदर्शन स्थल पर बोले किसान- यहां कोरोना नहीं, जहां बीजेपी वहीं बीमारी

जब पत्रकार ने किसानों से सवाल पूछते हुए कहा कि कोरोना वायरस की दूसरी लहर बेहद ही खतरनाक है और कई लोगों की जानें जा रही है। तो किसानों ने जवाब देते हुए कहा कि कई लोग थोड़ी खांसी आ जाने पर भी डर जा रहे हैं और उनकी जान चली जा रही है।

गाजीपुर बॉर्डर पर मौजूद किसान नेता जगतार सिंह बाजवा ने कहा कि कोरोना लोगों की जान जरूर ले रहा है। लेकिन ये तीनों कानून भी काफी घातक हैं। किसान कोरोना और तीनों कृषि कानून को लेकर पूरी तरह से सजग हैं। (एक्सप्रेस फोटो: जसबीर मल्ही )

कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बावजूद दिल्ली से सटे सभी सीमाओं पर किसानों का आंदोलन जारी है। किसान केंद्र सरकार द्वारा पारित किए गए तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग पर अड़े हैं। हालांकि कोरोना के बेकाबू होते संक्रमण का कोई असर किसान आंदोलन पर नहीं पड़ रहा है। आंदोलन में अभी भी बड़ी संख्या में किसान मौजूद हैं। किसानों ने यह भी कहा है कि आंदोलन स्थल पर कोरोना वायरस का कोई संक्रमण नहीं है और जहां भाजपा है वहीं यह महामारी फैली हुई है।

दरअसल न्यूज 24 के पत्रकार राजीव रंजन ने गाजीपुर बॉर्डर पर मौजूद किसानों से जब मास्क लगाने को लेकर सवाल पूछा तो उनलोगों ने कहा कि यहां कोई भी नहीं है, इसलिए मास्क लगाने की कोई जरूरत नहीं है। साथ ही किसानों ने कहा कि यहां कोई कोरोना नहीं है, जहां बीजेपी वाले होंगे वहीं कोरोना होगा। इसके अलावा किसानों ने यह भी कहा कि जब छह महीने में कोरोना नहीं आया तो कोरोना अब क्या आएगा।

इस दौरान जब पत्रकार ने किसानों से सवाल पूछते हुए कहा कि कोरोना वायरस की दूसरी लहर बेहद ही खतरनाक है और कई लोगों की जानें जा रही है। तो किसानों ने जवाब देते हुए कहा कि कई लोग थोड़ी खांसी आ जाने पर भी डर जा रहे हैं और उनकी जान चली जा रही है। साथ ही किसानों ने कहा कि हम लोग बचाव के लिए काढ़ा समेत कई देसी तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। अगर लोग अपना दिल मजबूत रखेंगे तो कोई समस्या नहीं होगी।

इस दौरान गाजीपुर बॉर्डर पर मौजूद किसान नेता जगतार सिंह बाजवा ने कहा कि कोरोना लोगों की जान जरूर ले रहा है। लेकिन ये तीनों कानून भी काफी घातक हैं। किसान कोरोना और तीनों कृषि कानून को लेकर पूरी तरह से सजग हैं। साथ ही किसान नेता ने कहा कि एम्स के कुछ पूर्व डॉक्टरों को बुलाकर यहां जांच भी करवाया गया लेकिन अभी तक कोरोना के कोई मामले ध्यान में नहीं आए और ना ही एक भी मौतें हुई है।

हालांकि किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि 26 तारीख को आंदोलन के 6 महीने पूरे हो जाने के बाद किसान संगठन एक बड़ा निर्णय लेगा और मोर्चे को आगे बढ़ाया जाएगा। बता दें कि कृषि कानूनों पर सरकार और किसान संगठनों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है लेकिन कोई हल नहीं निकल पाया। किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच बना गतिरोध अभी भी जारी है।

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