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जीएसटी- बड़े बिल्डरों की चांदी, छोटे चौपट

दिल्ली के संपत्ति बाजार का हाल बुरा है। यह धंधा लगभग चौपट हो चुका है। कुछ लोगों ने प्रॉपर्टी के व्यवसाय से खुद को अलग कर लिया है तो कुछ इस धंधे से किनारा करने का मन बना रहे हैं।
Author नई दिल्ली | October 12, 2017 05:25 am
प्रतीकात्मक फोटो। (फाइल)

सुमन केशव सिंह

दिल्ली के संपत्ति बाजार का हाल बुरा है। यह धंधा लगभग चौपट हो चुका है। कुछ लोगों ने प्रॉपर्टी के व्यवसाय से खुद को अलग कर लिया है तो कुछ इस धंधे से किनारा करने का मन बना रहे हैं। दिल्ली में प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री का कारोबार करने वाले विकास भारती कहते हैं कि दिल्ली में प्रॉपर्टी का धंधा करना खुद को मारने जैसा हो गया है। उनके अनुसार पहले नोटबंदी ने धंधे की हत्या की। उसके बाद जीएसटी के फेरे ने और सरकार की नई-नई पेचदार नीतियों ने धंधा करने वालों की ताबूत में अंतिम कील ही ठोक दी है।

विकास की मानें तो दिल्ली में लगभग 40 फीसद जमीन पर अवैध कब्जा है। कालोनियां अनधिकृत रूप से बसी हैं। लिहाजा यहां ज्यादातर प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री में रजिस्ट्री का कोई मतलब ही नहीं। चूंकि ज्यादातर अवैध हैं, ऐसे में वैध रास्ते से जाने का कोई मतलब ही नहीं बनता। बाकी बची जमीन सरकार के हिस्से में आती है। जिसमें भी करीब 16 से 17 फीसद जगह पूरी दिल्ली में बची है। जिन पर व्यापार करना अब बहुत मुश्किल हो चुका है। इधर, राकेश कुमार आजाद बताते हैं जीएसटी लागू होने के बाद यह माना जा रहा था कि दिल्ली की दो करोड़ रुपए तक की प्रॉपर्टी की कीमत 6 से 10 लाख रुपए तक कम हो जाएगी। 30 लाख रुपए (3,500 रुपए प्रतिवर्ग फुट) तक के फ्लैटों में भी 5 फीसद तक की कमी आएगी। जीएसटी के लागू होने के बाद डेवलपरों को आंशिक, मगर खरीदारों को काफी फायदा होगा। उम्मीद थी कि इस दायरे में दिल्ली की अनधिकृत कालोनियों में मौजूद प्रॉपर्टी पर भी मिलेगा। लेकिन चीजें इतनी साफ हो गर्इं है कि छोटे धंधा करने वाले अब कुछ बचा नहीं सकते।

प्रॉपर्टी डीलर और डेवलपर नफीस अहमद न्यू अशोक नगर और ओखला के प्रॉपर्टी डीलर कमर खान का कहना है कि दिल्ली में अब छोटे स्तर के डेवलपर के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने बताया कि प्रॉपर्टी के बिजनेस में अब रजिस्ट्री अनिवार्य हो गई है। रजिस्ट्री के आधार पर ही जमीन की कीमत और लोन तय होता है। ऐसे में केवल बड़े बिल्डरों के लिए ही इस धंधे में जगह बची है।

बड़े खिलाड़ी ही कर सकेंगे धंधा
नोएडा के प्रॉपर्टी डीलरों और बिल्डर कंपनियों की राय बताती है कि छोटे बिल्डर के लिए जगह नहीं है। नोएडा की बिल्डर कंपनी सन इंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड के मार्केटिंग व सेल्स मैनेजर सोनू राय का कहना है कि नोटबंदी ने प्रॉपर्टी के धंधे पर व्यापक असर डाला है। खरीदारों के मन में काफी डर था। लेकिन इधर कुछ महीनों में प्रॉपर्टी के व्यवसाय में तेजी आई है। जीएसटी के बाद बिल्डरों को फायदा हुआ।

बिल्डरों को निर्माण सामग्री पर कम टैक्स का लाभ मिला। नतीजा यह हुआ कि सरकार की नीतियों से यह लाभ अब ग्राहकों को भी मिल रहा है। सोनू कहते हैं कि जो वन बीएचके फ्लैट आज हम 20 लाख में बेच रहे हैं वह तब 22 लाख का था। इसके अलावा भी बिल्डर कई बार कार पार्किंग वगैरह के नाम पर अवैध वसूलते थे। लेकिन अब सौदे में बिल्डरों और खरीदारों के बीच रेरा और प्राधिकरण भी पार्टी है। अब इस धंधे में बड़े खिलाड़ी ही टिकेंगे, जिसका लाभ बड़े बिल्डरों को ही मिलेगा।

 

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